PRICE HIKE: इंडिगो का घाटा 27% घटा, फिर भी महंगे ईंधन से बढ़ेंगे हवाई किराए!

PRICE HIKE: इंडिगो की पैरेंट कंपनी इंटरग्लोब एविएशन लिमिटेड को वित्त वर्ष 2026-27 की दूसरी तिमाही में 1,879.1 करोड़ रुपये का शुद्ध घाटा हुआ है। हालांकि, पिछले वित्त वर्ष की समान अवधि में कंपनी को 2,582.1 करोड़ रुपये का घाटा हुआ था। इस तरह कंपनी का घाटा सालाना आधार पर 27.2 प्रतिशत कम हुआ है। दूसरी ओर, ईंधन की बढ़ती कीमतों ने एयरलाइन की लागत पर दबाव बढ़ा दिया है। कंपनी के अधिकारियों के मुताबिक, महंगे ईंधन के असर को देखते हुए हवाई टिकटों के दाम बढ़ाने की जरूरत पड़ सकती है।

कंपनी के अनुसार, सितंबर 2026 में समाप्त तिमाही के दौरान उसका रेवेन्यू 25.9 प्रतिशत बढ़कर 23,363.8 करोड़ रुपये पहुंच गया, जबकि पिछले साल इसी अवधि में यह 18,555.3 करोड़ रुपये था। कुल आय भी 24 प्रतिशत बढ़कर 24,311.9 करोड़ रुपये रही। हालांकि, आय में बढ़ोतरी के बावजूद कंपनी घाटे से बाहर नहीं निकल सकी। इंडिगो का EBITDAR इस तिमाही में 120.8 प्रतिशत बढ़कर 2,459.9 करोड़ रुपये हो गया, जो पिछले साल 1,114.3 करोड़ रुपये था। EBITDAR का मतलब ब्याज, टैक्स, डेप्रिसिएशन, अमॉर्टाइजेशन और किराये के खर्च से पहले की कमाई है। कंपनी का EBITDAR मार्जिन भी पिछले साल के 6 प्रतिशत से बढ़कर 10.5 प्रतिशत हो गया। यह आंकड़ा परिचालन प्रदर्शन में सुधार को दर्शाता है, हालांकि कंपनी का शुद्ध घाटा बना हुआ है। ईंधन पर बढ़ते खर्च ने कंपनी की वित्तीय स्थिति को प्रभावित किया है। दूसरी तिमाही में इंडिगो का फ्यूल खर्च सालाना आधार पर 67.2 प्रतिशत बढ़कर 9,966.8 करोड़ रुपये पहुंच गया, जबकि पिछले साल यह 5,961.8 करोड़ रुपये था। कंपनी का कुल खर्च भी 18.6 प्रतिशत बढ़कर 26,188.4 करोड़ रुपये हो गया। अन्य खर्च में 0.6 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई और यह 16,221.6 करोड़ रुपये रहा। रिपोर्ट के मुताबिक, ईंधन की कीमतों में 14 प्रतिशत से अधिक की बढ़ोतरी के बाद इंडिगो ने 6 अक्टूबर से टिकटों पर अतिरिक्त फ्यूल चार्ज लागू किया था। घरेलू उड़ानों में दूरी के आधार पर 375 से 1,300 रुपये तक और अंतरराष्ट्रीय उड़ानों में गंतव्य के अनुसार 1,000 से 10,000 रुपये तक अतिरिक्त शुल्क लगाया गया। यूरोप की उड़ानों पर 10,000 रुपये और दक्षिण-पूर्व एशिया, खाड़ी देशों तथा पूर्वी एशिया की उड़ानों पर 5,500 रुपये का शुल्क जोड़े जाने की जानकारी दी गई है। कंपनी के मुख्य कार्यकारी अधिकारी विली वॉल्श ने कहा कि ईंधन की लागत में भारी बढ़ोतरी के कारण किराया बढ़ाने के अलावा विकल्प सीमित हो गए हैं। उन्होंने यह भी कहा कि आने वाले समय में ईंधन की लागत ऊंचे स्तर पर रहने की आशंका है। कंपनी अपने आंतरिक खर्च कम करने का प्रयास करेगी, लेकिन पूरी बढ़ोतरी का बोझ खुद उठाना संभव नहीं होगा। सितंबर 2026 के अंत तक इंडिगो का कुल कर्ज सालाना आधार पर 16.7 प्रतिशत बढ़कर 87,303.1 करोड़ रुपये हो गया, जबकि एक साल पहले यह 74,813.8 करोड़ रुपये था। इसमें 55,159.2 करोड़ रुपये की कैपिटलाइज्ड ऑपरेटिंग लीज देनदारी शामिल है। शेयर बाजार में कंपनी का शेयर मामूली गिरावट के साथ 4,675 रुपये पर बंद हुआ। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, इस साल अब तक शेयर में 9 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई है।   छत्तीसगढ़ की हर अपडेट के लिए हमारे WhatsApp चैनल को फॉलो करें- https://whatsapp.com/channel/0029VbBj50DATRSgaSxCmo2v