Karwa Chauth 2026: इन जगहों पर रात 8:18 बजे दिखेगा करवा चौथ का चांद, बादल बिगाड़ सकते हैं दर्शन

Karwa Chauth 2026: करवा चौथ पर गुरुवार, 29 अक्टूबर को छत्तीसगढ़ में महिलाएं पति की लंबी उम्र और सुखी वैवाहिक जीवन की कामना के साथ व्रत रखेंगी। दिनभर निर्जला उपवास रखने के बाद महिलाएं रात में चंद्रमा के दर्शन, पूजा और अर्घ्य देकर व्रत का पारण करेंगी। चंद्रोदय के अनुमानित समय के अनुसार, राजधानी रायपुर में रात 8:18 बजे चांद दिखाई देने की संभावना है। वहीं, प्रदेश के अलग-अलग शहरों में चंद्रमा के दर्शन का समय अलग-अलग रहेगा। इस बार चक्रवात के संभावित प्रभाव के चलते कई क्षेत्रों में बादल छाए रहने की आशंका जताई गई है, जिससे चंद्रमा के दर्शन में देरी हो सकती है।

उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, छत्तीसगढ़ में सबसे पहले बलरामपुर में रात 8:02 बजे चंद्रोदय होने का अनुमान है। इसके बाद अंबिकापुर में रात 8:03 बजे और कोरबा में रात 8:06 बजे चंद्रमा दिखाई दे सकता है। राजधानी रायपुर में चंद्रोदय का अनुमानित समय रात 8:18 बजे बताया गया है। वहीं, जगदलपुर में रात 8:17 से 8:22 बजे के बीच चंद्रमा के दर्शन होने की संभावना है। ये समय अनुमानित हैं और स्थानीय मौसम के अनुसार वास्तविक दर्शन में अंतर हो सकता है। इस बार चक्रवात के प्रभाव से प्रदेश के कुछ हिस्सों में आसमान में बादल छाए रहने की आशंका है। ऐसे में चंद्रमा क्षितिज से ऊपर आने के बाद भी तुरंत दिखाई नहीं दे सकता। ऊंची इमारतों, पहाड़ियों और स्थानीय मौसम की परिस्थितियों के कारण भी चांद देखने में 10 से 15 मिनट तक की देरी हो सकती है। इसलिए व्रत रखने वाली महिलाओं को निर्धारित समय के आसपास मौसम की स्थिति पर नजर रखने की सलाह दी गई है। ज्योतिषाचार्य पंडित मनोज शुक्ला के अनुसार, यदि बादलों के कारण करवा चौथ पर चंद्रमा के प्रत्यक्ष दर्शन नहीं हो पाते हैं, तो महिलाएं भगवान शिव और भगवान गणेश के मंदिर जाकर मानसिक रूप से चंद्रदेव का स्मरण और दर्शन कर सकती हैं। धार्मिक मान्यता के अनुसार, भगवान शिव की जटाओं में चंद्रदेव विराजमान हैं। चंद्रमा के दर्शन और पूजा के बाद व्रत का पारण करने की परंपरा है। हालांकि, प्रत्यक्ष दर्शन नहीं होने की स्थिति में पूजा की विधि और पारण को लेकर महिलाएं अपनी पारिवारिक परंपरा या संबंधित धार्मिक मार्गदर्शन का पालन कर सकती हैं। करवा चौथ का व्रत सुबह सूर्योदय से पहले सरगी ग्रहण करने के साथ शुरू होता है। परंपरा के अनुसार, सास अपनी बहू को सरगी देती हैं। इसमें फल, मिठाई, मेवे और फेनी जैसी चीजें शामिल होती हैं। सरगी ग्रहण करने के बाद महिलाएं दिनभर निर्जला व्रत रखती हैं। शाम के समय करवा चौथ माता और भगवान गणेश की पूजा की जाती है। कई परिवारों में इस दौरान करवा चौथ की कथा सुनने की परंपरा भी निभाई जाती है। रात में चंद्रमा के दर्शन होने पर महिलाएं पूजा करती हैं, अर्घ्य अर्पित करती हैं और इसके बाद व्रत खोलती हैं। इस अवसर पर महिलाएं पारंपरिक परिधान पहनती हैं और सोलह शृंगार करती हैं। हाथों में मेहंदी लगाना भी इस पर्व की प्रमुख परंपराओं में शामिल है। करवा चौथ के अवसर पर दुल्हन मेहंदी, अरेबिक मेहंदी, मंडला आर्ट और बेल-पत्ती वाली डिजाइन पसंद की जाती हैं। कई महिलाएं अपनी हथेलियों पर चांद, छलनी और पति-पत्नी की आकृतियां भी बनवाती हैं। मेहंदी के गहरे रंग को पारंपरिक रूप से प्रेम और सुहाग से जोड़कर देखा जाता है। करवा चौथ पर चंद्रमा के दर्शन व्रत की पूजा का महत्वपूर्ण हिस्सा माने जाते हैं। इस बार बादलों की आशंका के कारण अलग-अलग क्षेत्रों में दर्शन के समय में अंतर हो सकता है। रायपुर में रात 8:18 बजे चंद्रोदय का अनुमान है, लेकिन वास्तविक दर्शन स्थानीय मौसम पर निर्भर करेंगे। ऐसे में महिलाओं को धैर्य रखने और पूजा-पाठ के लिए अपनी पारिवारिक परंपराओं के अनुसार तैयारी करने की सलाह दी गई है। छत्तीसगढ़ की हर अपडेट के लिए हमारे WhatsApp चैनल को फॉलो करें- https://whatsapp.com/channel/0029VbBj50DATRSgaSxCmo2v