E100 Fuel Update: सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार से पूछा है कि 100 प्रतिशत एथेनॉल से चलने वाली गाड़ियों के लिए ईंधन की आपूर्ति कैसे सुनिश्चित की जाएगी। गुरुवार को न्यायमूर्ति एमएम सुंदरेश और न्यायमूर्ति प्रसन्ना बी वराले की पीठ एथेनॉल सप्लाई ईयर (ESY) 2025-26 से जुड़ी याचिकाओं पर सुनवाई कर रही थी। इस दौरान पीठ ने हाल की मीडिया रिपोर्टों का हवाला देते हुए सरकार से सवाल किया। केंद्र की ओर से अटॉर्नी जनरल आर. वेंकटरमणी ने कहा कि इसके लिए मैन्युफैक्चरिंग व्यवस्था में बड़े पैमाने पर बदलाव करना होगा।
यह सवाल ऐसे समय आया है, जब सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय ने 26 अक्टूबर को केंद्रीय मोटर वाहन नियम, 1989 में संशोधन की अधिसूचना जारी की थी। इसके तहत E100 यानी लगभग शुद्ध एथेनॉल पर चलने वाली फ्लेक्स-फ्यूल गाड़ियों को मंजूरी दी गई है। इससे पहले 27 अक्टूबर को पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने कहा था कि पेट्रोल में एथेनॉल मिश्रण को 20 प्रतिशत से आगे बढ़ाने की केंद्र सरकार की तत्काल कोई योजना नहीं है।
सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि उसने अखबारों में 100 प्रतिशत एथेनॉल से चलने वाली गाड़ियों को मंजूरी दिए जाने की खबरें पढ़ी हैं। पीठ ने पूछा कि यदि ऐसी गाड़ियों को अनुमति दी गई है, तो उनके लिए ईंधन की उपलब्धता और आपूर्ति की व्यवस्था किस तरह की जाएगी। अटॉर्नी जनरल ने जवाब में कहा कि इसके लिए विनिर्माण व्यवस्था में व्यापक बदलाव की आवश्यकता होगी। मामले की अगली सुनवाई अगले महीने निर्धारित की गई है।
सुनवाई के दौरान अदालत ने किसानों को सशक्त बनाने की जरूरत पर भी जोर दिया। पीठ ने कहा कि इस विषय पर व्यापक जनहित और पर्यावरण के दृष्टिकोण से विचार किया जाना चाहिए। अदालत ने ग्रामीण आबादी और किसानों के हितों को महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि नीतिगत फैसलों में इस पहलू को भी ध्यान में रखा जाना चाहिए। सुनवाई में एक वकील ने दलील दी कि एथेनॉल को बढ़ावा देने से किसानों को किसी न किसी रूप में लाभ मिल सकता है। एक अन्य वकील ने कहा कि किसानों के हितों से जुड़े पहलू केंद्र सरकार की नीति में शामिल हैं।
फ्लेक्स-फ्यूल गाड़ियों को E85 और E100 जैसे अधिक एथेनॉल मिश्रण वाले ईंधन पर चलने के लिए तैयार किया जाता है। E85 में 85 प्रतिशत एथेनॉल और 15 प्रतिशत पेट्रोल होता है, जबकि E100 में लगभग शुद्ध एथेनॉल होता है। मंत्रालय के हालिया बदलावों में उत्सर्जन प्रमाणन संबंधी प्रावधानों को अपडेट करते हुए E85 के साथ E100 को भी स्पष्ट रूप से शामिल किया गया है।
इस मामले की पृष्ठभूमि एथेनॉल सप्लाई ईयर 2025-26 के लिए आवंटन से जुड़ी है। 30 जून को सुप्रीम कोर्ट ने कर्नाटक हाईकोर्ट के उस निर्देश पर रोक लगाने से इनकार करते हुए उसे यथावत रखा था, जिसमें एथेनॉल आवंटन बढ़ाने के लिए दिए गए एक प्रतिनिधित्व पर निर्णय लेने को कहा गया था। यह प्रतिनिधित्व एक एथेनॉल निर्माता ने दिया था, जिसने संबंधित सप्लाई ईयर के लिए अधिक आवंटन की मांग की थी।
हाईकोर्ट ने भारत पेट्रोलियम कॉरपोरेशन लिमिटेड, हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉरपोरेशन लिमिटेड और इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन लिमिटेड को इस प्रतिनिधित्व पर विचार करने का निर्देश दिया था। अदालत ने कहा था कि सरकार की नीति के तहत स्थापित समर्पित एथेनॉल संयंत्र अनुबंधों के अनुसार तेल विपणन कंपनियों को आपूर्ति करने के लिए बाध्य हैं। ऐसे संयंत्रों को दीर्घकालिक खरीद समझौतों में निर्धारित प्राथमिकता वाले आवंटन का लाभ देने से इनकार नहीं किया जाना चाहिए।
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