CG News: ओपी चौधरी का बड़ा ऐलान, हाउसिंग बोर्ड अब बनाएगा सड़क-पुल और स्टेडियम, 700 करोड़ का कर्ज खत्म

CG News: छत्तीसगढ़ गृह निर्माण एवं अधोसंरचना विकास मंडल यानी हाउसिंग बोर्ड अब केवल आवास निर्माण तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि सड़क, पुल, खेल परिसर, सार्वजनिक भवन, टाउन प्लानिंग और शहरी पुनर्विकास जैसी परियोजनाओं में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। वित्त, आवास एवं पर्यावरण मंत्री ओपी चौधरी ने 27 अक्टूबर को नवा रायपुर स्थित छत्तीसगढ़ संवाद के ऑडिटोरियम में आयोजित राज्य स्तरीय तकनीकी प्रशिक्षण कार्यशाला को संबोधित करते हुए यह बात कही। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में मंडल को आर्थिक रूप से मजबूत, आत्मनिर्भर और बहुआयामी अधोसंरचना विकास संस्था बनाने की दिशा में काम किया जा रहा है। मंत्री के अनुसार, लगभग 700 करोड़ रुपये की ऋण देनदारी समाप्त करने और वन टाइम सेटलमेंट (ओटीएस) योजना के जरिए रिक्त संपत्तियों की बिक्री को गति देने से मंडल को नई परियोजनाओं की दिशा में आगे बढ़ने का अवसर मिला है। ओपी चौधरी ने कहा कि विकसित छत्तीसगढ़ 2047 के लक्ष्य को हासिल करने के लिए हाउसिंग बोर्ड को पारंपरिक कार्यप्रणाली से आगे बढ़ना होगा। इसके लिए आधुनिक तकनीक, नवाचार, बेहतर वित्तीय प्रबंधन और परिणामोन्मुखी कार्यसंस्कृति अपनाना जरूरी है। उन्होंने कहा कि मंडल के पास अनुभवी अभियंताओं, तकनीकी अधिकारियों और कर्मचारियों का मानव संसाधन है। इस क्षमता का उपयोग आवास निर्माण के साथ अन्य महत्वपूर्ण अधोसंरचना परियोजनाओं में भी किया जाना चाहिए। उन्होंने अधिकारियों को अन्य राज्यों की निविदाओं में भाग लेने और प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता विकसित करने के लिए प्रेरित किया। मंत्री ने अगले दो वर्षों में छत्तीसगढ़ के बाहर भी परियोजनाएं हासिल करने का लक्ष्य लेकर काम करने की जरूरत बताई। 700 करोड़ की ऋण देनदारी समाप्त, संपत्तियों की बिक्री को मिली गति मंत्री ने बताया कि कुछ वर्ष पहले हाउसिंग बोर्ड बड़ी ऋण देनदारी, सीमित परियोजनाओं और लंबे समय से खाली पड़ी संपत्तियों के कारण वित्तीय चुनौतियों का सामना कर रहा था। राज्य सरकार ने वित्त विभाग के सहयोग से लगभग 700 करोड़ रुपये की लंबित ऋण देनदारी समाप्त करने का निर्णय लिया, जिससे मंडल को वित्तीय दबाव से राहत मिली। उन्होंने बताया कि रिक्त संपत्तियों की बिक्री के लिए ओटीएस योजना लागू की गई। आकर्षक छूट, विपणन और नियमित निगरानी के माध्यम से संपत्तियों के विक्रय को गति मिली। उन्होंने इस प्रक्रिया में मंडल अध्यक्ष अनुराग सिंह देव सहित अधिकारियों और कर्मचारियों के योगदान की सराहना की। नई आवासीय परियोजनाओं को लेकर मंत्री ने कहा कि अब वास्तविक मांग का आकलन किए बिना परियोजनाएं शुरू करने से बचना होगा। पहले पर्याप्त मांग सुनिश्चित नहीं होने के कारण कई आवास खाली रह जाते थे और संस्था की पूंजी लंबे समय तक फंसी रहती थी। इस स्थिति को रोकने के लिए परियोजनाओं की निविदा प्रक्रिया में शुरुआती तीन महीने के भीतर 30 प्रतिशत बुकिंग अथवा कुल 60 प्रतिशत बुकिंग की शर्त जोड़ी गई है। उन्होंने अधिकारियों को स्थान चयन, निर्माण गुणवत्ता, लागत, नागरिक सुविधाओं और विपणन व्यवस्था पर विशेष ध्यान देने के निर्देश दिए। टीपीएस और पीपीपी मॉडल से अधोसंरचना विकास की तैयारी ओपी चौधरी ने कहा कि विकास कार्यों के लिए केवल सरकारी बजट पर निर्भर रहना पर्याप्त नहीं है। सार्वजनिक-निजी भागीदारी (पीपीपी), टाउन प्लानिंग स्कीम (टीपीएस) और पुनर्विकास जैसे मॉडल अपनाकर अधोसंरचना परियोजनाओं को गति दी जा सकती है। उनके अनुसार, टीपीएस के माध्यम से निजी भूमि का योजनाबद्ध विकास कर सड़क, जलापूर्ति और अन्य सार्वजनिक सुविधाओं का निर्माण किया जा सकता है। इससे भूमि अधिग्रहण से जुड़ी कठिनाइयों को कम करने और व्यवस्थित शहरी विकास को बढ़ावा देने में मदद मिल सकती है। मंत्री ने सेरीखेड़ी की टाउन प्लानिंग परियोजना का उदाहरण देते हुए बताया कि लगभग 800 करोड़ रुपये की अधोसंरचना विकास लागत वाली परियोजना को पीपीपी मॉडल से आगे बढ़ाने की पहल की गई है। उनके अनुसार, प्रारंभिक गणना में विकास लागत के समायोजन के लिए करीब 218 एकड़ भूमि की आवश्यकता आंकी गई थी, लेकिन प्रतिस्पर्धात्मक निविदा प्रक्रिया के बाद यह आवश्यकता लगभग 124 एकड़ रह गई। इस प्रकार करीब 94 एकड़ भूमि की बचत का दावा किया गया है। मंत्री ने कहा कि ऐसे मॉडल सरकारी संसाधनों पर प्रत्यक्ष वित्तीय दबाव कम करने और नागरिक सुविधाओं के विकास में उपयोगी हो सकते हैं। उन्होंने शासकीय भूमि के पुनर्विकास पर भी जोर दिया। उनके अनुसार, शहरों में महत्वपूर्ण स्थानों पर स्थित सरकारी जमीन का बेहतर उपयोग कर आधुनिक कलेक्ट्रेट भवन, सरकारी कार्यालय, पुस्तकालय, उद्यान, स्टेडियम और इंडोर खेल परिसर जैसी सुविधाएं विकसित की जा सकती हैं। भूमि के एक हिस्से के व्यावसायिक उपयोग से प्राप्त संसाधनों को सार्वजनिक सुविधाओं के निर्माण में लगाया जा सकता है। खेल अधोसंरचना, आधुनिक तकनीक और एआई पर भी जोर मंत्री ने कहा कि खेल परिसरों का निर्माण करने के साथ उनके संचालन और रखरखाव की व्यवस्था भी मजबूत होनी चाहिए। विशेषज्ञ संस्थाओं की भागीदारी से खेल सुविधाओं का बेहतर उपयोग सुनिश्चित किया जा सकता है। उन्होंने नवा रायपुर में बैडमिंटन, तैराकी, स्क्वैश और क्रिकेट जैसी खेल विधाओं के लिए प्रशिक्षण सुविधाएं विकसित करने की पहल का उल्लेख किया। उनके अनुसार, राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय खेल आयोजनों से होटल, परिवहन, पर्यटन, व्यापार और सेवा क्षेत्र की गतिविधियों को भी प्रोत्साहन मिल सकता है। राज्य स्तरीय प्रशिक्षण कार्यशाला में अधिकारियों और कर्मचारियों को प्रशासनिक दक्षता, वित्तीय प्रबंधन, संपदा प्रबंधन और निर्माण गुणवत्ता से संबंधित विषयों पर प्रशिक्षण दिया गया। सत्रों में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, ऑनलाइन आवास प्रबंधन, सूचना का अधिकार, आरडब्ल्यूए हैंडओवर प्रक्रिया, आरसीसी संरचनाओं की मजबूती और आधुनिक विपणन रणनीतियों पर भी चर्चा की गई। आईआईएम रायपुर, आईआईआईटी नवा रायपुर और एनआईटी रायपुर सहित विभिन्न संस्थानों के विशेषज्ञों के तकनीकी सत्र निर्धारित किए गए। अनुराग सिंह देव ने बताया 1,800 करोड़ रुपये राजस्व का आंकड़ा मंडल अध्यक्ष अनुराग सिंह देव ने कहा कि हाउसिंग बोर्ड का अधोसंरचना विकास मंडल के रूप में विस्तार केवल नाम या अधिनियम में बदलाव नहीं है, बल्कि संस्था की सोच और कार्यशैली बदलने का अवसर है। उन्होंने अधिकारियों और कर्मचारियों से तकनीकी दक्षता, नवाचार और परिणामोन्मुखी दृष्टिकोण के साथ काम करने का आह्वान किया। उन्होंने बताया कि पिछले लगभग 18 महीनों में मंडल ने करीब 8 हजार संपत्तियों की बिक्री और 1,800 करोड़ रुपये के राजस्व अर्जन का आंकड़ा हासिल किया है। उनके अनुसार, लगभग 2 हजार करोड़ रुपये से अधिक की नई परियोजनाओं को आगे बढ़ाया गया है और दिसंबर में भी नई परियोजनाएं शुरू करने की तैयारी है। अनुराग सिंह देव ने कहा कि मंडल का लक्ष्य प्रदेश के सभी 33 जिलों में बेहतर सुविधाओं से युक्त व्यवस्थित और आधुनिक टाउनशिप विकसित करना है। इनमें उद्यान, बाजार, सामुदायिक सुविधाएं, पर्यावरण संरक्षण और ईवी चार्जिंग स्टेशन जैसी व्यवस्थाओं पर ध्यान दिया जाएगा। उन्होंने बकाया राशि की वसूली, संपत्तियों की बिक्री और परियोजनाओं के समयबद्ध क्रियान्वयन पर जोर दिया। कार्यशाला में आवास एवं पर्यावरण सचिव अंकित आनंद, मंडल आयुक्त अवनीश शरण, अपर आयुक्त हर्ष कुमार जोशी सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी, अभियंता, तकनीकी विशेषज्ञ और प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों से आए अधिकारी-कर्मचारी उपस्थित रहे। मंत्री ओपी चौधरी ने कहा कि आधुनिक तकनीक, बेहतर प्रबंधन, वित्तीय अनुशासन और निजी भागीदारी के माध्यम से हाउसिंग बोर्ड को आत्मनिर्भर बनाते हुए प्रदेश के दीर्घकालिक विकास में उसकी भूमिका बढ़ाई जाएगी। छत्तीसगढ़ की हर अपडेट के लिए हमारे WhatsApp चैनल को फॉलो करें- https://whatsapp.com/channel/0029VbBj50DATRSgaSxCmo2v