खरीफ विपणन वर्ष 2023-24 में राज्य में लगभग 144.92 लाख मीट्रिक टन धान की खरीदी की गई थी। इसके बाद वर्ष 2024-25 में लगभग 149.25 लाख मीट्रिक टन धान का उपार्जन हुआ। वहीं, खरीफ विपणन वर्ष 2025-26 में लगभग 142 लाख मीट्रिक टन धान खरीदा गया। इस तरह तीन खरीफ सीजन में कुल लगभग 437 लाख मीट्रिक टन धान की खरीदी हुई। सरकार के मुताबिक, इस अवधि में किसानों को 1.40 लाख करोड़ रुपये से अधिक का भुगतान किया गया। धान खरीदी की यह व्यवस्था प्रदेश के किसानों को उनकी उपज का मूल्य उपलब्ध कराने के साथ ग्रामीण अर्थव्यवस्था में भी आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा देने का माध्यम बनी है।
15 नवंबर से शुरू होगा धान खरीदी अभियान, 3100 रुपए मिलेगा प्रति क्विंटल
किसानों के हित में मंत्रिपरिषद ने खरीफ विपणन वर्ष 2026-27 में 15 नवंबर से धान खरीदी शुरू करने का निर्णय लिया है। इस वर्ष 27.50 लाख से अधिक किसानों से 3100 रुपये प्रति क्विंटल की दर से धान खरीदा जाएगा। खरीदी की अधिकतम सीमा 21 क्विंटल प्रति एकड़ निर्धारित की गई है। किसानों को पंजीयन और धान बेचने की प्रक्रिया में सुविधा देने के लिए भी कुछ बदलाव किए गए हैं। एग्रीस्टैक आईडी वाले पिछले वर्ष के पंजीकृत किसानों को दोबारा पंजीयन कराने से छूट दी गई है। ऐसे किसानों को धान विक्रय के लिए समिति में ऋण पुस्तिका लाने की आवश्यकता भी नहीं होगी।
धान खरीदी की प्रक्रिया में पारदर्शिता लाने के लिए डिजिटल क्रॉप सर्वे के माध्यम से रकबे का ऑनलाइन निर्धारण और बायोमेट्रिक आधारित खरीदी की व्यवस्था की जाएगी। इसके अलावा इस वर्ष 360 नए उपार्जन केंद्र शुरू किए जाएंगे। इससे प्रदेश में धान खरीदी केंद्रों की कुल संख्या बढ़कर 3100 हो जाएगी। सरकार का कहना है कि नए केंद्रों से किसानों को धान बेचने में सुविधा मिलेगी और खरीदी व्यवस्था का दायरा बढ़ेगा।
कृषक उन्नति योजना के तहत 35,904 करोड़ रुपए से अधिक का भुगतान
किसानों को आर्थिक संबल देने के लिए संचालित कृषक उन्नति योजना के तहत खरीफ 2023 से खरीफ 2025 तक लगभग 25.52 लाख किसानों को 35,904.90 करोड़ रुपये का भुगतान किया गया है। इसके साथ ही धान के स्थान पर अन्य लाभकारी फसलें लेने वाले किसानों को प्रोत्साहित करने के लिए सहायता राशि में भी वृद्धि की गई है। पहले यह राशि 11 हजार रुपये प्रति एकड़ थी, जिसे बढ़ाकर 15 हजार रुपये प्रति एकड़ किया गया है। इसका उद्देश्य किसानों को फसल विविधीकरण के लिए प्रोत्साहित करना है।
प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना के अंतर्गत भी छत्तीसगढ़ के किसानों को अब तक 12,267.39 करोड़ रुपये से अधिक की राशि प्रदान की जा चुकी है। इस योजना के माध्यम से पात्र किसानों को आर्थिक सहायता उपलब्ध कराई जा रही है। राज्य सरकार की योजनाओं के साथ केंद्र सरकार की योजनाओं के जरिए भी किसानों को आर्थिक सहयोग देने का प्रयास किया जा रहा है।
कृषि यंत्रों और सिंचाई सुविधाओं के विस्तार पर जोर
खेती को आधुनिक और अधिक लाभकारी बनाने के लिए कृषि यंत्रों की उपलब्धता तथा सिंचाई सुविधाओं के विस्तार पर काम किया जा रहा है। वर्ष 2024-25 से अब तक किसानों को 8,567 कृषि यंत्र उपलब्ध कराए गए हैं। इसके अलावा 678 फार्म मशीनरी बैंक स्थापित किए गए हैं। इन व्यवस्थाओं के माध्यम से किसानों को खेती के काम में मशीनों का उपयोग करने की सुविधा देने पर जोर दिया गया है।
प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना के तहत प्रदेश में 46,615 हेक्टेयर क्षेत्र में ड्रिप और स्प्रिंकलर सिंचाई का विस्तार किया गया है। इसके लिए किसानों को 201.07 करोड़ रुपये से अधिक का अनुदान दिया गया है। सिंचाई की इन आधुनिक तकनीकों के जरिए कृषि क्षेत्र में पानी के उपयोग को बेहतर बनाने और किसानों को सुविधाएं उपलब्ध कराने का प्रयास किया जा रहा है।
डिजिटल कृषि व्यवस्था को मजबूत करने के लिए एग्रीस्टैक के तहत प्रदेश के 19,751 गांवों की जियो-रेफरेंसिंग पूरी की जा चुकी है। इसके साथ ही 43 लाख से अधिक किसानों का पंजीयन किया गया है। डिजिटल रिकॉर्ड के माध्यम से कृषि से संबंधित जानकारी को व्यवस्थित करने और योजनाओं के क्रियान्वयन में पारदर्शिता लाने पर जोर दिया जा रहा है।
दलहन-तिलहन उत्पादन को बढ़ावा, 219 करोड़ रुपए का भुगतान
प्रदेश में धान के अलावा दलहन और तिलहन फसलों के उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए भी योजनाएं संचालित की जा रही हैं। प्रधानमंत्री अन्नदाता आय संरक्षण अभियान के तहत 29 जिलों के 273 केंद्रों के माध्यम से अरहर, सोयाबीन, चना, मसूर और सरसों की खरीदी की गई। इस खरीदी के बदले किसानों को 219.08 करोड़ रुपये का भुगतान किया गया है।
राष्ट्रीय खाद्य तेल मिशन के अंतर्गत प्रदेश में 94,615 हेक्टेयर क्षेत्र में विस्तार और 10 तेल निष्कर्षण इकाइयों की स्थापना प्रस्तावित है। इन प्रयासों के जरिए तिलहन उत्पादन को प्रोत्साहित करने और कृषि क्षेत्र में फसल विविधीकरण को बढ़ावा देने की योजना है। धान के साथ अन्य फसलों को भी किसानों के लिए लाभकारी विकल्प बनाने पर जोर दिया जा रहा है।
फसल बीमा और उर्वरक उपलब्धता पर भी काम
किसानों को प्राकृतिक आपदाओं और फसल नुकसान की स्थिति में आर्थिक सुरक्षा देने के लिए प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत खरीफ एवं रबी 2025-26 में 16.70 लाख से अधिक किसानों ने बीमा कराया। इनमें से 1 लाख 40 हजार 730 किसानों को 292.43 करोड़ रुपये का दावा भुगतान किया गया है। फसल बीमा के माध्यम से नुकसान की स्थिति में किसानों को आर्थिक सहायता उपलब्ध कराने का प्रावधान है।
खेती के लिए जरूरी उर्वरकों की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए खरीफ 2026 में 15.55 लाख मीट्रिक टन का लक्ष्य निर्धारित किया गया था। इसके मुकाबले प्रदेश में 18.02 लाख मीट्रिक टन से अधिक उर्वरक का भंडारण किया गया। उर्वरकों की कालाबाजारी और जमाखोरी रोकने के लिए निरीक्षण और कार्रवाई भी की गई है।
प्रदेश में लगभग 40 लाख कृषक परिवार हैं, जिनमें 82 प्रतिशत किसान लघु एवं सीमांत श्रेणी के हैं। ऐसे में कृषि क्षेत्र का विकास सीधे ग्रामीण परिवारों की आर्थिक स्थिति से जुड़ा हुआ है। राज्योत्सव के अवसर पर सरकार की ओर से प्रस्तुत आंकड़ों में धान खरीदी, कृषक उन्नति योजना, किसान सम्मान निधि, आधुनिक कृषि यंत्र, सिंचाई, फसल विविधीकरण और बीमा योजनाओं को प्रमुखता दी गई है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में किसानों को आर्थिक सहायता और कृषि सुविधाएं उपलब्ध कराने के इन प्रयासों को प्रदेश की ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण बताया गया है।
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