Tiger Shroff firing case: मुंबई में अभिनेता टाइगर श्रॉफ की कार पर हुई फायरिंग के मामले में मुंबई क्राइम ब्रांच ने सभी आरोपियों के खिलाफ महाराष्ट्र कंट्रोल ऑफ ऑर्गनाइज्ड क्राइम एक्ट (MCOCA) की धाराएं जोड़ दी हैं। इस कार्रवाई के बाद मामले में आरोपियों के खिलाफ संगठित अपराध से जुड़े प्रावधानों के तहत भी जांच की जाएगी। पुलिस के मुताबिक, फायरिंग का कथित उद्देश्य पैसे की वसूली करना, गैंग का दबदबा बढ़ाना और लोगों के बीच डर पैदा करना था।
हिंदुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, मुंबई क्राइम ब्रांच के डिप्टी कमिश्नर ऑफ पुलिस राज तिलक रौशन ने बताया कि सक्षम अधिकारी की मंजूरी मिलने के बाद मामले में MCOCA की धाराएं जोड़ी गई हैं। IANS की रिपोर्ट के मुताबिक, 27 अक्टूबर को आरोपियों के खिलाफ MCOCA की धारा 3(1)(ii), 3(2) और 3(4) भी शामिल की गईं। 18 अक्टूबर को टाइगर श्रॉफ की कार पर फायरिंग हुई थी। इसके अगले दिन, 19 अक्टूबर को मामले में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 109(1), यानी हत्या के प्रयास, और धारा 3(5), यानी साझा मंशा, के साथ आर्म्स एक्ट की संबंधित धाराओं के तहत FIR दर्ज की गई थी। पुलिस अब फायरिंग की घटना के साथ कथित संगठित अपराध से जुड़े पहलुओं की भी जांच कर रही है। मामले में अब तक 11 गिरफ्तार फायरिंग के बाद फरार हुए तीन आरोपियों फूल सिंह, रेहान अंसारी और ऋतिक महतो को 19 अक्टूबर को कोटा रेलवे स्टेशन पर जयपुर जा रही ट्रेन से गिरफ्तार किया गया था। अगले दिन दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने कथित हथियार सप्लायर राधा वर्मा, बबीता राव, कुणाल और सुमित सरोलिया को गिरफ्तार किया। इसके बाद कथित तौर पर लॉजिस्टिक मदद और फंडिंग करने के आरोप में सरपंच खटक उर्फ अंकित, समीर खत्री और जतिन पंचाल को सोनीपत से पकड़ा गया। बाद में प्रांजल ठकराल को इंदौर से गिरफ्तार किया गया। इस तरह मामले में गिरफ्तार आरोपियों की कुल संख्या 11 हो गई है। एक पुलिस अधिकारी के अनुसार, जांच अभी जारी है और आगे भी गिरफ्तारियां हो सकती हैं। वसूली और दहशत फैलाने के लिए फायरिंग का आरोप टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक, मुंबई क्राइम ब्रांच का कहना है कि फायरिंग के पीछे पैसे वसूलने, गैंग का प्रभाव बढ़ाने और लोगों में भय पैदा करने का मकसद था। जांच में आरोपियों के लॉरेंस गैंग से कथित संबंध सामने आने की बात कही गई है। पुलिस के अनुसार, अभिनेता को निशाना बनाकर गैंग अपना दबदबा बढ़ाना और वसूली के जरिए आर्थिक फायदा हासिल करना चाहता था। पुलिस ने अनिल पंडित को इस मामले का मुख्य आरोपी बताया है। उसके बारे में कहा गया है कि उसने सोशल मीडिया के जरिए अभिनेता पर हमले की जिम्मेदारी लेने का दावा किया था। पुलिस उसे लॉरेंस गैंग का कथित ऑपरेटिव बता रही है। हालांकि, मामले में आरोपों की अंतिम पुष्टि न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही होगी। फायरिंग की घटना के बाद फिल्म इंडस्ट्री में कलाकारों की सुरक्षा को लेकर भी चिंता जताई गई थी। फेडरेशन ऑफ वेस्टर्न इंडिया सिने एम्प्लॉइज (FWICE) के अध्यक्ष बीएन तिवारी ने कलाकारों की सुरक्षा बढ़ाने की मांग की थी। उन्होंने चेतावनी दी थी कि यदि पर्याप्त सुरक्षा नहीं मिली, तो फिल्म इंडस्ट्री उत्तर प्रदेश जैसे राज्यों में स्थानांतरित होने पर विचार कर सकती है। फिलहाल मुंबई क्राइम ब्रांच मामले की आगे की जांच कर रही है। छत्तीसगढ़ की हर अपडेट के लिए हमारे WhatsApp चैनल को फॉलो करें- https://whatsapp.com/channel/0029VbBj50DATRSgaSxCmo2v




