Raigarh News: BHU में रायगढ़ की डॉ. माधुरी त्रिपाठी को ‘मानस काव्य शिखर सम्मान’

Raigarh News: बनारस हिन्दू विश्वविद्यालय के भोजपुरी अध्ययन केन्द्र एवं ‘मानस’ पत्रिका के संयुक्त तत्वावधान में राहुल सभागार में आयोजित हिंदी पखवाड़ा अंतर्गत विचार संगोष्ठी में रायगढ़ जिले की उप संचालक कृषि विभाग में पदस्थ डॉ. माधुरी त्रिपाठी को ‘मानस काव्य शिखर सम्मान’ से सम्मानित किया गया। उन्हें शाल, श्रीफल, प्रशस्ति पत्र और स्मृति चिन्ह भेंटकर सम्मान प्रदान किया गया।

कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में वरिष्ठ कवि एवं साहित्यकार प्रो. श्रीप्रकाश शुक्ल उपस्थित रहे। प्रयागराज से आए सरस्वती पत्रिका के संपादक एवं आलोचक प्रो. प्रभाकर सिंह, प्रो. कमलेश वर्मा, साहित्यकार डॉ. पारूल सिंह राठौर, डाल्टनगंज से आईं प्रोफेसर डॉ. विभाशंकर, जी.एन.ए. कॉलेज झारखंड के प्रतिनिधि, मानस पत्रिका के संस्थापक डॉ. आर्य पुत्र दीपक सहित विश्वविद्यालय के प्रोफेसर, शोधार्थी, छात्र-छात्राएं और गणमान्य नागरिक मौजूद रहे।

विचार संगोष्ठी का विषय ‘हिंदी का लोक और लोक में हिंदी’ रखा गया था। इसमें चयनित साहित्यकारों, कवयित्रियों और रचनाकारों ने सहभागिता की। कार्यक्रम के प्रथम सत्र में चयन समिति द्वारा आमंत्रित रचनाकारों का सम्मान किया गया। आयोजन स्थल पर बड़ी संख्या में साहित्यप्रेमी मौजूद रहे और सम्मान समारोह के दौरान सभागार करतल ध्वनि से गूंज उठा।

आयोजकों के अनुसार, सम्मान समारोह में चार श्रेणियां निर्धारित की गई थीं। चयन समिति द्वारा संबंधित रचनाकारों की साहित्यिक उपलब्धियों का अध्ययन और साक्षात्कार करने के बाद विशिष्ट उपलब्धियों को ध्यान में रखते हुए नामों का चयन किया गया। इसके बाद चयनित रचनाकारों को आमंत्रित पत्र भेजे गए।

इस क्रम में रायगढ़ की डॉ. माधुरी त्रिपाठी को ‘मानस काव्य शिखर सम्मान’ प्रदान किया गया। आशुतोष कुमार विनायक को ‘मानस साहित्य सेवी सम्मान’, अखिलेश चंद्र को ‘मानस शब्द शिल्पी सम्मान’ और गोलेंद्र पटेल को ‘युवा काव्य सम्मान’ से सम्मानित किया गया।

कार्यक्रम का संचालन डॉ. प्रीति विश्वकर्मा ने किया, जबकि स्वागत उद्बोधन प्रो. प्रभाकर सिंह ने दिया। इस दौरान प्रो. मदनलाल, डॉ. विंध्याचल यादव, डॉ. महेन्द्र कुशवाहा, डॉ. रवि सोनकर, डॉ. सुरेन्द्र कुमार, डॉ. शैलेन्द्र सिंह और डॉ. शालिनी सिंह ने अपने विचार व्यक्त किए। आयोजकों ने बताया कि हिंदी भाषा उत्सव के अंतर्गत आयोजित सम्मान समारोह में रचनाकारों का चयन उनकी प्रतिभा और योग्यता के निर्धारित मापदंडों के आधार पर किया गया।

डॉ. माधुरी त्रिपाठी साहित्य के क्षेत्र में गद्य और पद्य दोनों विधाओं में लेखन के लिए जानी जाती हैं। उनके शोध और लेखन कार्यों में ‘मारीशस में गिरमिटिया मजदूरों का यथार्थ चित्रण और भारतीय लोक परंपरा का मूल्यांकन’ विषय से संबंधित शोध पत्र भी शामिल हैं। उनके चार शोध पत्रों में ‘मारीशस में गिरमिटिया मजदूरों का स्वर्णिम काल’ विषय पर किया गया लेखन भी शामिल बताया गया है।

उपलब्ध जानकारी के अनुसार, उनके इन शोध कार्यों के लिए उन्हें मारीशस गणराज्य के निवर्तमान राष्ट्रपति पृथ्वीराज सिंह रूपुन के हाथों सम्मानित होने का अवसर भी मिला था। उनके आलेख और शोध पत्रों की प्रशंसा राष्ट्रपति के मंचीय उद्बोधन में किए जाने की जानकारी दी गई है।

साहित्यिक गतिविधियों के साथ डॉ. माधुरी त्रिपाठी को प्रखर वक्ता और एंकर के रूप में भी विभिन्न मंचों पर सम्मान प्राप्त हुआ है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कोलंबो, बैंकॉक, मारीशस, वियतनाम और मलेशिया में आयोजित साहित्य सम्मेलनों में साहित्यिक सेवाओं के लिए सम्मानित किए जाने की जानकारी भी उनके परिचय में दी गई है। उन्हें राज्यपाल पुरस्कार तथा तत्कालीन मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह के हाथों भी सम्मान प्राप्त होने का उल्लेख किया गया है।

साहित्य के क्षेत्र में उन्हें महादेवी वर्मा सम्मान, पवहारी शरण द्विवेदी सम्मान, ब्रज कोकिला सम्मान, साहित्य विशारद सम्मान, साहित्य गौरव सम्मान, भाषा भास्कर सम्मान, श्रेष्ठ रचनाकार सम्मान, शारदा साहित्य रत्न सम्मान, चंद्रमौली सम्मान, ऋतंभरा सम्मान, साहित्य वाचस्पति सम्मान, शब्द भूषण सम्मान, काव्य विभूति सम्मान, कलम भूषण सम्मान, सिहरी गौरव सम्मान, साहित्य सारथी सम्मान, शब्द शिल्पी सम्मान और सृजन श्री सम्मान सहित कई साहित्यिक सम्मान मिलने की जानकारी दी गई है।

इसके अलावा काव्यपाठ, साहित्यिक मंचों पर सहभागिता और वाद-विवाद प्रतियोगिताओं में भी उन्होंने उपलब्धियां हासिल की हैं। साहित्य विधा के अंतर्गत स्वर्ण पदक से सम्मानित होने तथा निबंध लेखन में युवा महोत्सव में राष्ट्रीय पुरस्कार प्राप्त करने का भी उल्लेख किया गया है। उनके अनेक आलेख, कविताएं और समसामयिक विषयों पर लेख प्रकाशित हो चुके हैं।

डॉ. माधुरी त्रिपाठी की प्रकाशित पुस्तकों में ‘बिखर गई मोतियां’, ‘जुल्म के साये में’, ‘फड़फड़ाता परिंदा’, ‘गुमनाम जिंदगी’, ‘धुंध की चादर’, ‘पत्ता-पत्ता बोलता है’, ‘पिता को लिखी पाती’, ‘मुझको मिली ख्याति’ और ‘वो मुसाफिर’ शामिल हैं।

‘मानस काव्य शिखर सम्मान’ मिलने की जानकारी के बाद उनके मित्रों, स्नेहीजनों और शुभचिंतकों ने उन्हें बधाई एवं शुभकामनाएं दीं। सम्मान समारोह के माध्यम से रायगढ़ की साहित्यिक प्रतिभा को बनारस हिन्दू विश्वविद्यालय के मंच पर सम्मान मिलने से जिले के साहित्यिक क्षेत्र से जुड़े लोगों में भी खुशी का माहौल है। छत्तीसगढ़ की हर अपडेट के लिए हमारे WhatsApp चैनल को फॉलो करें- https://whatsapp.com/channel/0029VbBj50DATRSgaSxCmo2v