CG Overspeeding News: छत्तीसगढ़ की सड़कों पर तेज रफ्तार से वाहन चलाने की स्थिति सामने आई है। परिवहन विभाग की ओर से राज्य के सात स्थानों पर लगाए गए लेजर आधारित स्पीड कैमरों से एक महीने के सर्वे में 1.89 लाख ओवरस्पीड वाहनों की पहचान की गई है। सर्वे में सामने आया कि तेज रफ्तार का मामला केवल आउटर और नेशनल हाईवे तक सीमित नहीं है, बल्कि शहर के भीतर भारी ट्रैफिक वाले इलाकों में भी वाहन चालक निर्धारित गति से अधिक रफ्तार में वाहन चलाते पाए गए।
परिवहन विभाग ने सड़क हादसों पर नियंत्रण और ओवरस्पीडिंग की स्थिति का आकलन करने के लिए राज्य के चुनिंदा स्थानों पर लेजर आधारित स्पीड कैमरे लगाए हैं। इन कैमरों के जरिए भीड़ और यातायात के बीच से गुजरने वाले वाहनों की गति रिकॉर्ड की जा रही है। धमतरी, अंबिकापुर, जगदलपुर, मंदिर हसौद, तेलीबांधा और वीआईपी रोड समेत सात स्थानों पर यह सर्वे किया जा रहा है।
एक महीने की जांच में सबसे अधिक ओवरस्पीडिंग अंबिकापुर और धमतरी मार्ग पर दर्ज की गई। यहां बड़ी संख्या में वाहन 80 से 120 किलोमीटर प्रति घंटे से अधिक की गति से गुजरते हुए रिकॉर्ड किए गए। मंदिर हसौद क्षेत्र में भी 100 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से वाहन चलाने वाले सामने आए हैं।
सर्वे का एक महत्वपूर्ण पहलू रायपुर के तेलीबांधा और वीआईपी रोड जैसे व्यस्त इलाकों में सामने आया है। इन स्थानों पर दिनभर भारी यातायात रहता है, इसके बावजूद कई कार और बाइक चालक तेज रफ्तार में वाहन चलाते पाए गए। इससे यह स्पष्ट हुआ कि ओवरस्पीडिंग की समस्या केवल खुले हाईवे या शहर से बाहर की सड़कों तक सीमित नहीं है।
परिवहन विभाग के अधिकारियों के मुताबिक, 100 किलोमीटर प्रति घंटे से अधिक की गति वाले वाहनों के मामले मुख्य रूप से रात के समय अधिक सामने आए। हालांकि दिन में भी कई वाहन चालक तेज रफ्तार से वाहन चलाते पाए गए। अधिकारियों के अनुसार बाइक चालकों की तेज गति भी सड़क सुरक्षा के लिहाज से चिंता का विषय है।
राज्य में लगातार बढ़ रहे सड़क हादसों को रोकने के लिए परिवहन और यातायात विभाग की ओर से अलग-अलग स्तर पर कार्रवाई की जा रही है। हेलमेट नियम के उल्लंघन से लेकर ट्रैफिक सिग्नल तोड़ने जैसे मामलों में ऑनलाइन चालान की कार्रवाई की जा रही है। अब ओवरस्पीडिंग की निगरानी के लिए तकनीकी माध्यमों का इस्तेमाल बढ़ाने की दिशा में भी काम किया जा रहा है।
अब तक राज्य में हाई स्पीड को लेकर कार्रवाई सीमित स्तर पर होती रही है। इस बीच यह सवाल भी सामने आता रहा है कि जब अलग-अलग सड़कों पर स्थानीय स्तर पर स्पीड लिमिट निर्धारित नहीं है, तो ओवरस्पीडिंग के आधार पर कार्रवाई किस आधार पर की जा रही है। पड़ताल के दौरान सामने आया कि केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय की ओर से विभिन्न श्रेणी के वाहनों के लिए निर्धारित अधिकतम गति सीमा को आधार बनाकर कार्रवाई की जा रही है।
हालांकि राज्य में फिलहाल ऐसे हाईटेक स्पीड कैमरों की संख्या सीमित है, जो एक साथ बड़ी संख्या में वाहनों की गति को रिकॉर्ड कर सकें। परिवहन विभाग द्वारा सात चयनित स्थानों पर लगाए गए लेजर स्पीड कैमरों के जरिए मौजूदा स्थिति का सर्वे किया जा रहा है। इस सर्वे से यह भी पता लगाने का प्रयास किया जा रहा है कि किन मार्गों और क्षेत्रों में ओवरस्पीडिंग की समस्या अधिक है।
सर्वे में 1.89 लाख ओवरस्पीड वाहनों की पहचान होने के बाद तेज रफ्तार पर निगरानी और कार्रवाई को लेकर परिवहन विभाग के सामने चुनौती बढ़ गई है। खासतौर पर उन स्थानों पर स्थिति चिंताजनक बताई जा रही है जहां यातायात का दबाव अधिक रहता है। विभाग की ओर से जुटाए जा रहे आंकड़ों के आधार पर आगे की कार्रवाई और निगरानी व्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में कदम उठाए जाने की संभावना है।
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