CG Railway News: रायपुर रेलवे स्टेशन पहुंचने वाली कई यात्री ट्रेनों की देरी शुरुआती स्टेशनों से आगे बढ़ते-बढ़ते कई घंटे तक पहुंच रही है। अमरकंटक एक्सप्रेस और सारनाथ एक्सप्रेस इसके उदाहरण हैं, जिनकी देरी रास्ते में लगातार बढ़ी। इसके पीछे रायपुर मंडल में क्षमता से अधिक ट्रेनों के परिचालन और मालगाड़ियों को प्राथमिकता दिए जाने को प्रमुख कारण बताया जा रहा है। करीब 100 ट्रेनों के संचालन की क्षमता वाले मंडल में वर्तमान में 140 से अधिक ट्रेनें चल रही हैं। इसका असर यात्रियों के समय, कनेक्टिंग यात्रा और जरूरी कामों पर पड़ रहा है।
क्षमता से 40 फीसदी ज्यादा ट्रेनें
रायपुर मंडल में ट्रेनों के परिचालन की क्षमता करीब 100 ट्रेनों की बताई जा रही है। इसके मुकाबले वर्तमान में 140 से अधिक ट्रेनें संचालित हो रही हैं। यानी मंडल की क्षमता की तुलना में करीब 40 फीसदी अधिक ट्रेनों का परिचालन हो रहा है।
यात्री ट्रेनों के साथ बड़ी संख्या में मालगाड़ियां भी इसी रेल नेटवर्क पर संचालित होती हैं। मालगाड़ियों को प्राथमिकता मिलने के कारण कई बार यात्री ट्रेनों को रास्ते में रोकना पड़ता है। एक जगह हुई देरी आगे के स्टेशनों पर बढ़ती जाती है और आखिरकार ट्रेन अपने निर्धारित समय से कई घंटे पीछे पहुंचती है।
तीन मिनट की देरी चार घंटे पहुंची
अमरकंटक एक्सप्रेस की स्थिति इस देरी को समझने का एक उदाहरण है। ट्रेन भोपाल से महज 3 मिनट की देरी से रवाना हुई थी। लेकिन जबलपुर पहुंचते-पहुंचते इसकी देरी करीब 3 घंटे हो गई।
इसके बाद अनूपपुर में भी ट्रेन निर्धारित समय से काफी पीछे पहुंची। वहां ट्रेन का निर्धारित समय दोपहर 2:17 बजे था, जबकि ट्रेन करीब 3 घंटे की देरी से 5:13 बजे पहुंची।
उसलापुर में निर्धारित समय 4:55 बजे था, लेकिन ट्रेन रात 8:20 बजे पहुंची। रायपुर में ट्रेन के सुबह 6:55 बजे पहुंचने का निर्धारित समय था, लेकिन यह 4 घंटे 18 मिनट की देरी से सुबह 11:13 बजे पहुंची।
यानी शुरुआती स्टेशन से मामूली देरी से रवाना हुई ट्रेन की देरी रायपुर पहुंचने तक कई घंटे में बदल गई।
सारनाथ एक्सप्रेस भी हुई लेट
सारनाथ एक्सप्रेस में भी इसी तरह देरी बढ़ती गई। अनूपपुर स्टेशन पर ट्रेन का निर्धारित समय रात 12:06 बजे था, लेकिन ट्रेन 1 घंटे 7 मिनट की देरी से रात 1:14 बजे पहुंची।
इसके बाद करगी रोड में निर्धारित समय से करीब 1 घंटे 30 मिनट की देरी से ट्रेन पहुंची। यहां ट्रेन रात 3:41 बजे आई, जबकि निर्धारित समय 2:11 बजे था।
उसलापुर में ट्रेन का निर्धारित समय 3:30 बजे था। यहां ट्रेन 37 मिनट की देरी से पहुंची। इसके बाद रायपुर स्टेशन पर सुबह 5:45 बजे पहुंचने वाली ट्रेन करीब 2 घंटे 50 मिनट की देरी से सुबह 8:05 बजे पहुंची।
इस तरह रास्ते के अलग-अलग हिस्सों में ट्रेन की देरी यात्रियों के लिए लगातार बढ़ती गई।
वेटिंग हॉल में भीड़ से परेशानी
रविवार शाम करीब 4 बजे रायपुर रेलवे स्टेशन के एसी वेटिंग हॉल में भी यात्रियों की भीड़ दिखाई दी। बैठने तक की जगह नहीं होने से कई यात्री ट्रेन के इंतजार में परेशान नजर आए।
कुछ यात्री लगातार मोबाइल फोन पर अपनी ट्रेन का स्टेटस चेक करते रहे। ट्रेन के निर्धारित समय और वास्तविक स्थिति के बीच अंतर बढ़ने से यात्रियों को अपनी आगे की यात्रा की योजना बदलनी पड़ रही थी।
रायगढ़ से रायपुर पहुंचे आयुष कुमार नंद को आगे बस से बस्तर जाना था। उनके मुताबिक, ट्रेन रास्ते में जगह-जगह रुकती रही और भीड़ के कारण भी सफर में परेशानी हुई।
सुबह की ट्रेन रात में पहुंची
ट्रेन की देरी का एक और मामला कोरबा-यशवंतपुर एक्सप्रेस का सामने आया। सुरेंद्र बाबू को ट्रेन नंबर 12252 से अनंतपुर जाना था।
रायपुर में इस ट्रेन का निर्धारित पहुंचने का समय सुबह 11:40 बजे और रवाना होने का समय 11:45 बजे है। वे निर्धारित समय के अनुसार स्टेशन पहुंच गए थे, लेकिन ट्रेन करीब 8 घंटे लेट थी।
ट्रेन रात 8:23 बजे रायपुर पहुंची और 8:34 बजे रवाना हुई। यानी जिस ट्रेन का इंतजार सुबह से किया जा रहा था, वह रात में स्टेशन पहुंची।
साढ़े पांच घंटे की देरी से छूटी मीटिंग
बैतूल निवासी सीजो नागपुर से 12833 अहमदाबाद-हावड़ा एक्सप्रेस से रायपुर आ रहे थे। ट्रेन को शनिवार रात करीब 11 बजे रायपुर पहुंचना था, लेकिन यह रविवार सुबह करीब 5:30 बजे पहुंची।
रातभर ट्रेन के सफर के बाद सीजो फ्रेश होने के लिए होटल गए। वहां थकान के कारण उन्हें नींद लग गई और उनकी जरूरी मीटिंग छूट गई।
यह मामला बताता है कि ट्रेन की देरी सिर्फ स्टेशन पर इंतजार तक सीमित नहीं रहती, बल्कि यात्रियों के आगे के कार्यक्रमों और जरूरी कामों पर भी असर डाल सकती है।
रेलवे ने बताया अपना प्रयास
रायपुर मंडल के सीनियर डीसीएम सुष्कर विपुल बिलासराव ने कहा कि दूसरे मंडलों से आने वाली ट्रेनें रायपुर पहुंचते-पहुंचते लेट हो जाती हैं। उन्होंने बताया कि मंडल का प्रयास रहता है कि ट्रेनों को जल्द से जल्द संचालित किया जाए और समय पर रवाना किया जाए।
रेलवे के सामने एक तरफ यात्री ट्रेनों को समय पर चलाने की चुनौती है, तो दूसरी तरफ उसी रेल नेटवर्क पर मालगाड़ियों का परिचालन भी जारी रहता है। ट्रेनों की संख्या बढ़ने के साथ परिचालन व्यवस्था पर दबाव बढ़ने की स्थिति यात्रियों की देरी में दिखाई दे रही है।
यात्रियों के लिए बढ़ती चुनौती
रायपुर आने वाली ट्रेनों में देरी का असर उन यात्रियों पर ज्यादा पड़ रहा है, जिन्हें रायपुर से आगे बस, दूसरी ट्रेन या अन्य साधनों से यात्रा करनी होती है। कई घंटे की देरी के कारण आगे की यात्रा का पूरा समय बदल जाता है।
अमरकंटक एक्सप्रेस और सारनाथ एक्सप्रेस के उदाहरणों में शुरुआती स्टेशनों की देरी और रायपुर पहुंचने के समय की देरी के बीच बड़ा अंतर दिखाई देता है। वहीं कोरबा-यशवंतपुर एक्सप्रेस के मामले में यात्रियों को करीब आठ घंटे तक इंतजार करना पड़ा।
फिलहाल रायपुर मंडल में यात्री ट्रेनों की समयबद्धता यात्रियों के लिए बड़ी चिंता बनी हुई है। रेलवे की ओर से ट्रेनों को जल्द संचालित करने का प्रयास किए जाने की बात कही गई है। छत्तीसगढ़ की हर अपडेट के लिए हमारे WhatsApp चैनल को फॉलो करें- https://whatsapp.com/channel/0029VbBj50DATRSgaSxCmo2v




