मुख्यमंत्री साय ने कहा कि स्वर्गीय लरंग साय जनसेवा के प्रति समर्पित ऐसे जननेता थे, जिन्होंने अपना जीवन गरीबों, वंचितों, जनजातीय समाज और क्षेत्र के विकास के लिए समर्पित किया। अविभाजित मध्यप्रदेश में विधायक, सांसद और मंत्री के रूप में उन्होंने महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभाईं और जनता के हितों को सर्वोपरि रखा। जनजातीय समाज के अधिकारों, सम्मान और विकास के लिए उनका योगदान अविस्मरणीय है। उनकी प्रतिमा आने वाली पीढ़ियों को समाजसेवा, समर्पण और जनकल्याण के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देती रहेगी।
मुख्यमंत्री ने लरंग साय के साथ अपने व्यक्तिगत संबंधों को याद करते हुए बताया कि पहली बार विधायक बनने के बाद उन्हें काका लरंग साय के निकट संपर्क में आने और उनके अनुभवों से सीखने का अवसर मिला। सांसद के रूप में दिल्ली में रहने के दौरान लरंग साय अक्सर उनके निवास पर आते थे और कई बार वहीं ठहरते भी थे। मुख्यमंत्री ने बताया कि उन्होंने उनसे कहा था कि दिल्ली आने पर उनके लिए निवास में एक कमरा हमेशा आरक्षित रहेगा। उन्होंने यह भी कहा कि पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के साथ लरंग साय के आत्मीय संबंध थे और अटल जी उनका विशेष सम्मान करते थे। उनका सरल जीवन, सहज स्वभाव और जनसेवा के प्रति समर्पण अनुकरणीय है।
कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने क्षेत्र के विकास के लिए तीन महत्वपूर्ण घोषणाएं कीं। शंकरगढ़ स्थित बालक हायर सेकेंडरी स्कूल के जर्जर भवन के स्थान पर नए विद्यालय भवन का निर्माण कराया जाएगा। चांदो में सामाजिक, सांस्कृतिक और सार्वजनिक कार्यक्रमों के लिए बड़े सामुदायिक भवन का निर्माण किया जाएगा। इसके अलावा स्वर्गीय लरंग साय की स्मृतियों को चिरस्थायी बनाने के लिए उनकी प्रतिमा स्थल के समीप भव्य स्मृति द्वार बनाया जाएगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि स्मृति द्वार उनके जनसेवा के प्रति समर्पण और क्षेत्र के विकास में योगदान का प्रतीक बनेगा।
मुख्यमंत्री साय ने कहा कि बलरामपुर जिले में एक साथ इतने विकास कार्यों का भूमिपूजन और लोकार्पण क्षेत्र की प्रगति के लिए महत्वपूर्ण कदम है। नए कार्यों से निर्माण गतिविधियों को गति मिलेगी, जबकि पूर्ण परियोजनाओं से नागरिकों को बेहतर सुविधाएं प्राप्त होंगी। सड़क, अधोसंरचना और अन्य बुनियादी सुविधाओं के विस्तार से ग्रामीण क्षेत्रों में विकास के नए अवसर उपलब्ध होंगे। उन्होंने कहा कि सरकार सरगुजा और बस्तर सहित प्रदेश के सभी क्षेत्रों के संतुलित विकास के लिए प्रतिबद्ध है और विकास का लाभ अंतिम गांव तथा अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाना उसका संकल्प है।
गरीब परिवारों के आवास और विशेष पिछड़ी जनजातियों के कल्याण पर मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश में प्रतिदिन लगभग 1,600 प्रधानमंत्री आवासों का निर्माण किया जा रहा है। बस्तर में आत्मसमर्पण करने वाले नक्सलियों के पुनर्वास के लिए केंद्र सरकार से मांगे गए 15 हजार अतिरिक्त प्रधानमंत्री आवासों को भी स्वीकृति मिली है। उन्होंने इसके लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रति आभार व्यक्त किया। मुख्यमंत्री ने बताया कि प्रदेश में पहाड़ी कोरवा, बिरहोर, कमार, बैगा और अबूझमाड़िया जैसे विशेष पिछड़ी जनजातीय समुदायों की आबादी लगभग 3 लाख 20 हजार है। प्रधानमंत्री जनमन योजना के तहत इन समुदायों के लिए करीब 32 हजार आवास स्वीकृत किए गए हैं। बिजली, पेयजल, राशन कार्ड और अन्य बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए भी काम किया जा रहा है।
मुख्यमंत्री ने किसानों के लिए कहा कि प्रदेश में आगामी 15 नवंबर से धान खरीदी शुरू होगी। किसानों से 3,100 रुपये प्रति क्विंटल की दर से प्रति एकड़ अधिकतम 21 क्विंटल धान खरीदा जाएगा। किसानों की सुविधा के लिए प्रदेश में 360 नए धान खरीदी केंद्र शुरू किए जा रहे हैं। इससे किसानों को अपनी उपज बेचने के लिए लंबी दूरी तय करने और खरीदी केंद्रों में लंबी कतारों का सामना करने से राहत मिलने की उम्मीद है। उन्होंने कहा कि सरकार का प्रयास है कि धान बेचने के दौरान किसी भी किसान को परेशानी न हो।
वनांचल के परिवारों की आजीविका मजबूत करने के लिए मुख्यमंत्री ने बताया कि बस्तर और सरगुजा संभाग में लगभग 13 लाख परिवार तेंदूपत्ता संग्रहण से जुड़े हैं। उनकी आय बढ़ाने के लिए तेंदूपत्ता संग्रहण की पारिश्रमिक दर 4,000 रुपये से बढ़ाकर 5,500 रुपये प्रति मानक बोरा की गई है। तेंदूपत्ता संग्राहकों के लिए चरण पादुका योजना भी दोबारा शुरू की गई है। इसके अलावा प्रदेश के साढ़े पांच लाख से अधिक भूमिहीन कृषि मजदूर परिवारों को प्रतिवर्ष 10 हजार रुपये की एकमुश्त आर्थिक सहायता दी जा रही है। मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार गरीबों, किसानों, श्रमिकों और वनांचल के परिवारों को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने के लिए प्रयासरत है।
सुशासन पर मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार प्रशासनिक व्यवस्था को पारदर्शी, जवाबदेह और नागरिक-केंद्रित बनाने के लिए काम कर रही है। मंत्रालय में ई-ऑफिस प्रणाली लागू की गई है और शासकीय सेवाओं को डिजिटल माध्यम से सुलभ बनाया जा रहा है। मुख्यमंत्री हेल्पलाइन के जरिए नागरिक अपनी शिकायतें दर्ज करा सकते हैं। उन्होंने कहा कि शिकायतों का समयबद्ध निराकरण और नागरिकों को बिना अनावश्यक परेशानी के सरकारी सेवाएं उपलब्ध कराना सुशासन का महत्वपूर्ण हिस्सा है। मुख्यमंत्री ने बारिश के बावजूद कार्यक्रम में उपस्थित क्षेत्रवासियों का आभार जताया और प्रतिकूल मौसम के कारण व्यक्तिगत रूप से शामिल नहीं हो पाने पर खेद व्यक्त किया।
कृषि मंत्री रामविचार नेताम ने कहा कि स्वर्गीय लरंग साय का योगदान सामरी क्षेत्र तक सीमित नहीं था, बल्कि पूरे सरगुजा अंचल के विकास में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका रही। उनकी प्रतिमा की स्थापना भावी पीढ़ियों को उनके आदर्शों से परिचित कराने की पहल है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में सरगुजा अंचल में विकास कार्यों को गति मिल रही है और बलरामपुर जिले में सड़क, पुल-पुलिया, तालाब तथा अन्य बुनियादी सुविधाओं का विस्तार होगा।
महिला एवं बाल विकास मंत्री तथा जिले की प्रभारी मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े ने कहा कि लरंग साय जनजातीय समाज के प्रमुख नेता और जनसेवा के प्रति समर्पित व्यक्तित्व थे। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार महिलाओं, किसानों, गरीबों और जनजातीय समाज के कल्याण के लिए काम कर रही है। महतारी वंदन योजना के माध्यम से महिलाओं को प्रतिमाह 1,000 रुपये की आर्थिक सहायता दी जा रही है। उन्होंने विश्वास जताया कि मुख्यमंत्री के नेतृत्व में बलरामपुर सहित पूरे सरगुजा अंचल में विकास और जनकल्याण के कार्य आगे बढ़ेंगे। कार्यक्रम में विधायक उद्धेश्वरी पैकरा, जिला सहकारी केंद्रीय बैंक के अध्यक्ष रामकिशुन सिंह, बब्रुवाहन महाराज, ओम प्रकाश जायसवाल सहित अन्य जनप्रतिनिधि और बड़ी संख्या में क्षेत्रवासी उपस्थित थे।
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