CG Crime News: रायपुर में 2 बांग्लादेशी नागरिक पकड़े गए, 13 साल से रह रहा था मैकेनिक; फर्जी दस्तावेज नेटवर्क की जांच तेज

CG Crime News: छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में पुलिस ने दो बांग्लादेशी नागरिकों को पकड़ा है। इनमें से एक युवक करीब 13 साल से रायपुर में रहकर मैकेनिक का काम कर रहा था। पुलिस के मुताबिक इंटेलिजेंस इनपुट के आधार पर टिकरापारा थाना क्षेत्र में कार्रवाई की गई, जिसके बाद युवक की पहचान बांग्लादेशी नागरिक के रूप में हुई। कार्रवाई की जानकारी मिलने के बाद उसके माता-पिता फरार हो गए, जिनकी तलाश पुलिस कर रही है। इसी मामले के बीच पुलिस अब फर्जी दस्तावेज तैयार कराने वाले नेटवर्क और स्थानीय संपर्कों की भी जांच कर रही है।

इंटेलिजेंस इनपुट पर पुलिस की कार्रवाई

पुलिस के अनुसार टिकरापारा थाना क्षेत्र के संजय नगर में रहने वाले शेख रेहान के संबंध में इंटेलिजेंस से जानकारी मिली थी। इसके बाद पुलिस ने उसे हिरासत में लेकर पूछताछ की और उसके दस्तावेजों की जांच की।

जांच के दौरान उसके बांग्लादेशी नागरिक होने की जानकारी सामने आई। पुलिस के मुताबिक रेहान करीब 13 साल पहले अपने माता-पिता के साथ रायपुर आया था। इसके बाद से वह शहर में ही रह रहा था और मैकेनिक का काम करके अपनी आजीविका चला रहा था।

पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि इतने लंबे समय तक वह रायपुर में किन दस्तावेजों के आधार पर रह रहा था और स्थानीय स्तर पर उसकी पहचान एवं दस्तावेज तैयार कराने में किसकी भूमिका रही।

13 साल से रायपुर में कर रहा था काम

पूछताछ में सामने आया कि शेख रेहान लंबे समय से टिकरापारा क्षेत्र में मैकेनिक के तौर पर काम कर रहा था। पुलिस की जांच अब उसके रायपुर में रहने की पूरी अवधि और उसके संपर्कों पर केंद्रित है।

पुलिस यह भी पता लगाने का प्रयास कर रही है कि युवक के पास कौन-कौन से पहचान संबंधी दस्तावेज थे और वे दस्तावेज वास्तविक थे या किसी माध्यम से तैयार कराए गए थे।

कार्रवाई के बाद रेहान को डिटेंशन सेंटर भेजे जाने की जानकारी सामने आई है।

कार्रवाई की भनक लगते ही माता-पिता फरार

पुलिस कार्रवाई की जानकारी मिलने के बाद रेहान के माता-पिता मौके से फरार हो गए। पुलिस उनकी तलाश कर रही है और संभावित ठिकानों पर जांच की जा रही है।

पुलिस के लिए यह पहलू इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि रेहान के मुताबिक वह अपने माता-पिता के साथ ही करीब 13 वर्ष पहले रायपुर आया था। ऐसे में उनके शहर में आने, रहने और दस्तावेज तैयार कराने से जुड़े तथ्यों की भी जांच की जा रही है।

बहन की शादी रायपुर में हुई

जांच के दौरान पुलिस को यह भी जानकारी मिली कि रेहान की बहन की शादी रायपुर में ही एक स्थानीय व्यक्ति से हुई है। उसकी बहन का एक बच्चा भी है।

पुलिस ने उससे जुड़े तथ्यों को अलग-अलग स्तर पर जांच में शामिल किया है। फिलहाल पुलिस का मुख्य फोकस पकड़े गए नागरिकों की पहचान, उनके दस्तावेज और स्थानीय संपर्कों की जानकारी जुटाने पर है।

कबाड़ का काम करने वाला दूसरा नागरिक भी पकड़ा गया

पुलिस ने संजय नगर क्षेत्र से एक अन्य बांग्लादेशी नागरिक को भी पकड़ा है। उसकी पहचान जमालकरी के नाम से बताई गई है। पुलिस के अनुसार वह कबाड़ का कारोबार करता था।

दोनों से पूछताछ के जरिए पुलिस यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि क्या दोनों के बीच कोई संपर्क था या वे किसी साझा नेटवर्क से जुड़े हुए थे।

इसके साथ ही उनके रायपुर में रहने की अवधि, कामकाज और स्थानीय स्तर पर संपर्कों की भी जानकारी जुटाई जा रही है।

फर्जी दस्तावेज नेटवर्क की जांच

मामले का सबसे महत्वपूर्ण पहलू फर्जी दस्तावेजों से जुड़ा हुआ है। पुलिस को आशंका है कि कुछ एजेंट पैसे लेकर बांग्लादेशी नागरिकों को भारत में लाने और उनके लिए पहचान से जुड़े दस्तावेज तैयार कराने में मदद कर सकते हैं।

हालांकि, इस संबंध में पुलिस की जांच अभी जारी है और किसी एजेंट या संगठित नेटवर्क की भूमिका की अंतिम पुष्टि जांच पूरी होने के बाद ही होगी।

पुलिस अब यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि पकड़े गए नागरिकों के पास आधार कार्ड, पहचान पत्र या अन्य दस्तावेज किस माध्यम से पहुंचे। यदि दस्तावेज फर्जी पाए जाते हैं तो इन्हें तैयार कराने और उपलब्ध कराने वाले लोगों पर भी कार्रवाई की जा सकती है।

बीजापुर मामले से भी जुड़ रहे तार

इस कार्रवाई के बीच बीजापुर में पकड़े गए एक अन्य बांग्लादेशी नागरिक से मिले इनपुट की भी जांच की जा रही है। बताया गया है कि वहां की पुलिस टीम भी जांच के सिलसिले में रायपुर पहुंची है।

इससे पुलिस को अलग-अलग मामलों के बीच संभावित कनेक्शन की जानकारी जुटाने में मदद मिल सकती है। हालांकि, दोनों मामलों के बीच सीधा संबंध है या नहीं, यह जांच के बाद ही स्पष्ट होगा।

पहले भी सामने आ चुके हैं मामले

रायपुर में इससे पहले भी बांग्लादेशी नागरिकों के पकड़े जाने के मामले सामने आ चुके हैं। पुलिस अब इस पहलू की भी जांच कर रही है कि क्या इन मामलों में किसी एक नेटवर्क या एजेंट की भूमिका रही है।

जांच एजेंसियों के सामने चुनौती यह पता लगाने की है कि यदि फर्जी दस्तावेजों के जरिए किसी व्यक्ति को स्थानीय नागरिक के रूप में स्थापित किया गया, तो इसके पीछे कौन-कौन लोग सक्रिय थे।

पुलिस की जांच में सामने आएगा पूरा नेटवर्क

दो बांग्लादेशी नागरिकों के पकड़े जाने के बाद अब पुलिस की जांच केवल उनकी पहचान तक सीमित नहीं है। उनके भारत आने, रायपुर में रहने, रोजगार करने, स्थानीय संपर्क बनाने और दस्तावेज हासिल करने से जुड़े सभी पहलुओं की पड़ताल की जा रही है।

माता-पिता के फरार होने के बाद उनकी तलाश भी पुलिस के लिए महत्वपूर्ण हो गई है। वहीं, पकड़े गए दोनों लोगों से पूछताछ के आधार पर पुलिस संभावित नेटवर्क और अन्य संदिग्ध लोगों तक पहुंचने का प्रयास कर रही है। छत्तीसगढ़ की हर अपडेट के लिए हमारे WhatsApp चैनल को फॉलो करें- https://whatsapp.com/channel/0029VbBj50DATRSgaSxCmo2v