NCERT New Syllabus: NCERT के नए पाठ्यक्रम में वेद और आपातकाल की एंट्री, शिक्षा या सियासत?

NCERT New Syllabus: राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद (NCERT) द्वारा कक्षा 9 के पाठ्यक्रम में किए गए बदलावों ने देशभर में नई राजनीतिक बहस को जन्म दे दिया है। सामाजिक विज्ञान की नई पुस्तक में चारों वेदों और वर्ष 1975 के आपातकाल (Emergency) को शामिल किए जाने के बाद भाजपा और कांग्रेस आमने-सामने आ गए हैं। एक पक्ष इसे इतिहास और भारतीय ज्ञान परंपरा से विद्यार्थियों को जोड़ने वाला कदम बता रहा है, जबकि दूसरा पक्ष इसे शिक्षा के राजनीतिकरण का प्रयास करार दे रहा है।

नई पुस्तक “Understanding Society: India and Beyond” में भारतीय सभ्यता, सांस्कृतिक विरासत और लोकतांत्रिक इतिहास से जुड़े कई नए विषय जोड़े गए हैं। इनमें ऋग्वेद, यजुर्वेद, सामवेद और अथर्ववेद के साथ-साथ पंचमहाभूत की अवधारणा को भी स्थान दिया गया है। वहीं 25 जून 1975 को लागू किए गए आपातकाल, प्रेस सेंसरशिप और नागरिक अधिकारों पर पड़े प्रभाव को भी विस्तार से शामिल किया गया है।

चारों वेदों और भारतीय ज्ञान परंपरा को मिली जगह

एनसीईआरटी के नए पाठ्यक्रम में प्राचीन भारतीय ज्ञान परंपरा को समझाने के लिए चारों वेदों का उल्लेख किया गया है। पुस्तक में विद्यार्थियों को भारतीय दर्शन, प्रकृति और मानव जीवन के संबंधों तथा पंचमहाभूत की अवधारणा से परिचित कराने का प्रयास किया गया है। शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि इससे छात्रों को भारत की सांस्कृतिक और बौद्धिक विरासत के बारे में व्यापक जानकारी मिलेगी।

आपातकाल पर नया अध्याय बना चर्चा का केंद्र

सबसे अधिक चर्चा आपातकाल को पाठ्यक्रम में शामिल किए जाने को लेकर हो रही है। पुस्तक में 1975 के आपातकाल, नागरिक स्वतंत्रताओं पर लगे प्रतिबंध, प्रेस सेंसरशिप और लोकतांत्रिक संस्थाओं पर पड़े प्रभाव का उल्लेख किया गया है। इसे भारतीय लोकतंत्र के महत्वपूर्ण ऐतिहासिक घटनाक्रम के रूप में प्रस्तुत किया गया है।

कांग्रेस ने जताई आपत्ति

कांग्रेस नेताओं ने इस बदलाव पर सवाल उठाए हैं। उनका आरोप है कि इतिहास को एक विशेष राजनीतिक दृष्टिकोण से प्रस्तुत करने का प्रयास किया जा रहा है। पार्टी का कहना है कि शिक्षा व्यवस्था को राजनीतिक विचारधाराओं से दूर रखा जाना चाहिए और छात्रों को संतुलित तथा निष्पक्ष इतिहास पढ़ाया जाना चाहिए।

कांग्रेस नेताओं का यह भी कहना है कि स्कूली शिक्षा का उद्देश्य विद्यार्थियों को तथ्यों से अवगत कराना होना चाहिए, न कि राजनीतिक विमर्श का हिस्सा बनाना।

भाजपा ने बताया ऐतिहासिक सत्य से परिचय

भाजपा और उसके समर्थक इस बदलाव को आवश्यक बताते हुए कहते हैं कि विद्यार्थियों को भारतीय इतिहास और लोकतंत्र के महत्वपूर्ण अध्यायों की जानकारी मिलनी चाहिए। उनका तर्क है कि आपातकाल भारतीय लोकतंत्र की एक महत्वपूर्ण घटना थी, जिसे नई पीढ़ी को समझना जरूरी है।

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने किया समर्थन

Vishnu Deo Sai ने इस निर्णय का समर्थन करते हुए कहा कि आपातकाल भारतीय लोकतंत्र का एक महत्वपूर्ण और संवेदनशील अध्याय है, जिसे नई पीढ़ी को जानना चाहिए। उन्होंने इसे लोकतांत्रिक मूल्यों और संवैधानिक अधिकारों को समझने के लिए आवश्यक बताया।

शिक्षा बनाम राजनीति की बहस तेज

एनसीईआरटी के इस बदलाव ने एक बार फिर शिक्षा और राजनीति के संबंधों पर बहस छेड़ दी है। समर्थकों का कहना है कि पाठ्यक्रम में भारतीय ज्ञान परंपरा और लोकतांत्रिक इतिहास दोनों को शामिल करना संतुलित शिक्षा का हिस्सा है, जबकि आलोचकों का मानना है कि इतिहास की व्याख्या को लेकर सावधानी बरतना आवश्यक है। छत्तीसगढ़ की हर अपडेट के लिए हमारे WhatsApp चैनल को फॉलो करें- https://whatsapp.com/channel/0029VbBj50DATRSgaSxCmo2v