CG NEWS: खाकी पर रिश्वत का दाग! ₹2500 लेते VIDEO वायरल, महासमुंद के आरक्षक पर गिरी गाज

CG NEWS: छत्तीसगढ़ के महासमुंद जिले में पुलिस विभाग की छवि को झटका देने वाला मामला सामने आया है। सांकरा थाना में पदस्थ आरक्षक अरुण प्रताप सिंह का कथित तौर पर ₹2500 रिश्वत लेते हुए वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद पुलिस प्रशासन ने तत्काल कार्रवाई करते हुए उन्हें लाइन अटैच कर दिया है। मामले की विभागीय जांच शुरू कर दी गई है। चालान कॉपी के बदले मांगे गए पैसे शिकायत के अनुसार, एक मामले की 103 पन्नों की चालान कॉपी उपलब्ध कराने के नाम पर आरक्षक ने पीड़ित से ₹2500 की मांग की थी। आरोप है कि रकम देने के बाद ही दस्तावेज उपलब्ध कराने की बात कही गई। जबकि नियमों के अनुसार चालान की पहली प्रति निशुल्क प्रदान की जाती है। पैसे नहीं दिए तो कोर्ट में चालान नहीं भेजने की धमकी पीड़ित का आरोप है कि जब उसने पैसे देने में असमर्थता जताई तो आरक्षक ने फोटोकॉपी खर्च का हवाला दिया और कथित रूप से कहा कि रकम नहीं देने पर चालान कोर्ट में जमा नहीं किया जाएगा। इससे परेशान होकर पीड़ित ने कथित तौर पर पूरे घटनाक्रम का वीडियो रिकॉर्ड कर लिया। वीडियो वायरल होते ही मचा हड़कंप वीडियो इंटरनेट मीडिया पर प्रसारित होने के बाद पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया। मामला वरिष्ठ अधिकारियों तक पहुंचा, जिसके बाद प्रारंभिक जांच कर तत्काल कार्रवाई की गई। हालांकि वायरल वीडियो की स्वतंत्र तकनीकी पुष्टि अभी बाकी है। तत्काल लाइन अटैच, जांच जारी महासमुंद की अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक प्रतिभा पाण्डेय ने बताया कि वायरल वीडियो संज्ञान में आने के बाद प्रारंभिक जांच कराई गई। प्रथम दृष्टया तथ्य सामने आने पर आरक्षक अरुण प्रताप सिंह को सांकरा थाना से हटाकर पुलिस लाइन भेज दिया गया है। मामले की विस्तृत विभागीय जांच जारी है। कड़ी कार्रवाई के संकेत पुलिस अधिकारियों का कहना है कि जांच रिपोर्ट आने के बाद दोष सिद्ध होने पर संबंधित कर्मचारी के खिलाफ कड़ी अनुशासनात्मक एवं कानूनी कार्रवाई की जाएगी। विभाग इस मामले को गंभीरता से देख रहा है। जनता के बीच उठे सवाल घटना के बाद पुलिस कार्यप्रणाली और पारदर्शिता को लेकर सवाल उठने लगे हैं। विशेष रूप से ऐसे मामलों में जहां आम नागरिकों को कानूनन मुफ्त मिलने वाले दस्तावेजों के बदले कथित रूप से पैसे मांगे जाने के आरोप सामने आते हैं। प्रभाव और महत्व महासमुंद में सामने आया यह मामला एक बार फिर सरकारी सेवाओं में पारदर्शिता और जवाबदेही की जरूरत को रेखांकित करता है। अब सबकी नजर विभागीय जांच पर टिकी है कि आरोपों की पुष्टि होने पर क्या कार्रवाई होती है। छत्तीसगढ़ की हर अपडेट के लिए हमारे WhatsApp चैनल को फॉलो करें- https://whatsapp.com/channel/0029VbBj50DATRSgaSxCmo2v