मुख्यमंत्री और मुख्य सचिव को भेजा गया प्रस्ताव
फेडरेशन की ओर से मुख्यमंत्री और मुख्य सचिव को भेजे गए पत्र में कहा गया है कि अंतरराष्ट्रीय हालात, कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों और देश में ईंधन पर बढ़ते दबाव को देखते हुए राज्य सरकार को समय रहते वैकल्पिक व्यवस्थाओं पर काम शुरू कर देना चाहिए। संगठन के संयोजक कमल वर्मा ने कहा कि यदि हालात और गंभीर होते हैं तो सरकारी कामकाज प्रभावित हो सकता है, इसलिए अभी से चरणबद्ध रणनीति बनाना जरूरी है।
उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में ऊर्जा संरक्षण और अनावश्यक यात्रा को कम करना राष्ट्रीय आवश्यकता बन चुका है। ऐसे में सरकारी विभागों को भी आधुनिक कार्यप्रणाली अपनाते हुए डिजिटल माध्यमों का अधिक उपयोग करना चाहिए।
प्रधानमंत्री की अपील का भी दिया हवाला
फेडरेशन ने अपने पत्र में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की हालिया अपील का भी उल्लेख किया है, जिसमें उन्होंने लोगों से ईंधन बचाने, अनावश्यक यात्रा कम करने और वर्क फ्रॉम होम जैसी व्यवस्थाओं को फिर से अपनाने की बात कही थी। संगठन का कहना है कि जब केंद्र स्तर पर ऊर्जा संरक्षण को प्राथमिकता दी जा रही है तो राज्य सरकारों को भी इस दिशा में ठोस कदम उठाने चाहिए।
फेडरेशन के अनुसार, सरकारी कर्मचारियों का प्रतिदिन लंबी दूरी तय कर कार्यालय पहुंचना पेट्रोल और डीजल की खपत को बढ़ाता है। यदि कुछ विभागों में सीमित या रोटेशन आधार पर वर्क फ्रॉम होम लागू किया जाए तो इससे काफी मात्रा में ईंधन बचाया जा सकता है।
ई-ऑफिस सिस्टम बना सबसे बड़ा आधार
संगठन ने यह भी तर्क दिया कि छत्तीसगढ़ सरकार पिछले कुछ वर्षों से ई-ऑफिस और पेपरलेस प्रशासन को बढ़ावा दे रही है। अधिकांश विभागों में फाइलों का डिजिटलीकरण हो चुका है और कई प्रशासनिक प्रक्रियाएं ऑनलाइन संचालित की जा रही हैं। ऐसे में कर्मचारियों को घर से काम करने में तकनीकी दिक्कतें नहीं आएंगी।
फेडरेशन का कहना है कि डिजिटल फाइल सिस्टम, ऑनलाइन मीटिंग और वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग जैसी सुविधाएं पहले से मौजूद हैं। इसलिए कई विभागों में कर्मचारियों को घर से काम करने की अनुमति देना अब व्यावहारिक विकल्प बन चुका है।
कोरोना काल का अनुभव बना आधार
संगठन ने कोरोना महामारी के दौरान लागू की गई वर्क फ्रॉम होम व्यवस्था का भी हवाला दिया। उस समय कई सरकारी विभागों ने सीमित कर्मचारियों के साथ सफलतापूर्वक काम किया था और प्रशासनिक कामकाज भी प्रभावित नहीं हुआ था।
फेडरेशन का कहना है कि उस दौरान विकसित की गई डिजिटल व्यवस्था और अनुभव का उपयोग वर्तमान परिस्थितियों में दोबारा किया जा सकता है। इससे सरकार पर अतिरिक्त आर्थिक दबाव भी कम होगा और कर्मचारियों की यात्रा संबंधी परेशानियां भी घटेंगी।
नवा रायपुर के कार्यालयों का उदाहरण
फेडरेशन ने विशेष रूप से नवा रायपुर स्थित मंत्रालय और अन्य बड़े सरकारी कार्यालयों का जिक्र किया है। संगठन के अनुसार, यहां प्रतिदिन हजारों कर्मचारी निजी वाहनों, बसों और अन्य परिवहन साधनों से पहुंचते हैं, जिससे भारी मात्रा में ईंधन की खपत होती है।
यदि चरणबद्ध तरीके से कुछ कर्मचारियों को घर से काम करने की अनुमति दी जाए तो ट्रैफिक का दबाव कम होगा, प्रदूषण में कमी आएगी और सरकार को भी ऊर्जा संरक्षण में मदद मिलेगी। इसके अलावा कर्मचारियों के समय और खर्च दोनों की बचत होगी।
“स्थिति बिगड़ने से पहले तैयारी जरूरी”
फेडरेशन ने सरकार से अपील की है कि संभावित ईंधन संकट या कीमतों में और बढ़ोतरी से पहले ही वैकल्पिक कार्य व्यवस्था तैयार कर ली जाए। संगठन का कहना है कि समय रहते निर्णय लेने से भविष्य में किसी भी आपात स्थिति से बेहतर तरीके से निपटा जा सकेगा।
हालांकि अब तक राज्य सरकार की ओर से इस मांग पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है, लेकिन कर्मचारियों के बीच यह मुद्दा तेजी से चर्चा में है। आने वाले दिनों में सरकार इस प्रस्ताव पर क्या निर्णय लेती है, इस पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं। छत्तीसगढ़ की हर अपडेट के लिए हमारे WhatsApp चैनल को फॉलो करें- https://whatsapp.com/channel/0029VbBj50DATRSgaSxCmo2v




