Petrol-Diesel Price Hike: 4 साल बाद बढ़े ईंधन के दाम, पेट्रोल-डीजल ₹3 महंगा, CNG भी महंगी

Petrol-Diesel Price Hike: देशभर में महंगाई के बीच आम लोगों को बड़ा झटका लगा है। केंद्र सरकार ने शुक्रवार 15 मई से पेट्रोल और डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी कर दी है। करीब चार साल बाद खुदरा उपभोक्ताओं के लिए ईंधन की कीमतों में यह बड़ी वृद्धि हुई है। नई दरों के तहत पेट्रोल और डीजल दोनों पर लगभग ₹3 प्रति लीटर तक की बढ़ोतरी की गई है, जबकि CNG की कीमत भी ₹2 प्रति किलो बढ़ा दी गई है।

सरकार का यह फैसला ऐसे समय आया है जब ईरान युद्ध के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में भारी उछाल देखने को मिल रहा है। बढ़ती क्रूड ऑयल कीमतों के चलते सरकारी तेल कंपनियों पर लगातार आर्थिक दबाव बढ़ रहा था। अब इसका असर सीधे आम जनता की जेब पर पड़ने लगा है।

चारों महानगरों में बढ़े पेट्रोल के दाम

नई कीमतों के अनुसार दिल्ली में पेट्रोल अब ₹97.77 प्रति लीटर हो गया है, जिसमें ₹3 की बढ़ोतरी हुई है। मुंबई में पेट्रोल ₹106.68 प्रति लीटर पहुंच गया है। वहीं कोलकाता में पेट्रोल की कीमत ₹108.74 और चेन्नई में ₹103.67 प्रति लीटर हो गई है।

लगातार कई महीनों से अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें बढ़ने के बावजूद तेल कंपनियां खुदरा कीमतें स्थिर रखे हुए थीं, लेकिन अब कंपनियों का घाटा इतना बढ़ गया कि कीमतें बढ़ाना जरूरी माना गया।

डीजल भी हुआ महंगा

डीजल की कीमतों में भी लगभग ₹3 प्रति लीटर की वृद्धि की गई है। दिल्ली में डीजल ₹90.67 प्रति लीटर, मुंबई में ₹93.14, कोलकाता में ₹95.13 और चेन्नई में ₹95.25 प्रति लीटर हो गया है।

डीजल महंगा होने का सीधा असर ट्रांसपोर्ट और माल ढुलाई पर पड़ता है। ऐसे में आने वाले दिनों में सब्जियां, राशन, दूध और रोजमर्रा के अन्य सामानों की कीमतों में भी बढ़ोतरी देखने को मिल सकती है।

CNG उपभोक्ताओं को भी झटका

सरकार ने CNG की कीमतों में भी बढ़ोतरी कर दी है। दिल्ली में CNG अब ₹79.09 प्रति किलो हो गई है, जबकि मुंबई महानगर क्षेत्र में इसकी कीमत ₹84 प्रति किलो पहुंच गई है।

CNG महंगी होने से ऑटो, टैक्सी और सार्वजनिक परिवहन सेवाओं का खर्च भी बढ़ सकता है। इसका असर सीधे यात्रियों की जेब पर पड़ने की संभावना है।

ईरान युद्ध के बाद बढ़ा दबाव

विशेषज्ञों के अनुसार ईरान युद्ध शुरू होने के बाद वैश्विक बाजार में क्रूड ऑयल की कीमतों में 50 प्रतिशत से अधिक की तेजी आई है। फरवरी में भारत जिस कच्चे तेल को लगभग 69 डॉलर प्रति बैरल के औसत भाव पर खरीद रहा था, वही अब 113 से 114 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच चुका है।

भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा आयात करता है। ऐसे में अंतरराष्ट्रीय कीमतों में बढ़ोतरी का सीधा असर भारतीय अर्थव्यवस्था पर पड़ता है। तेल कंपनियां लंबे समय से बढ़ती लागत का बोझ खुद उठा रही थीं।

तेल कंपनियों को हो रहा था भारी नुकसान

रिपोर्ट्स के मुताबिक इंडियन ऑयल, भारत पेट्रोलियम और हिंदुस्तान पेट्रोलियम जैसी सरकारी तेल कंपनियों को प्रतिदिन करीब ₹1600 करोड़ तक का नुकसान हो रहा था। कंपनियां महंगे दाम पर कच्चा तेल खरीद रही थीं लेकिन खुदरा कीमतों में बढ़ोतरी नहीं की जा रही थी।

सरकार ने अब तक महंगाई को नियंत्रित रखने के लिए कीमतें नहीं बढ़ाई थीं, लेकिन लगातार बढ़ते घाटे के कारण आखिरकार यह फैसला लेना पड़ा।

PM मोदी ने की ईंधन बचाने की अपील

प्रधानमंत्री Narendra Modi ने हाल ही में लोगों से ईंधन बचाने की अपील की थी। उन्होंने वर्क फ्रॉम होम, ऑनलाइन मीटिंग और सार्वजनिक परिवहन के अधिक उपयोग पर जोर दिया था ताकि पेट्रोल-डीजल की खपत कम हो सके।

उन्होंने लोगों से विदेशी यात्राएं कम करने, गैर-जरूरी खर्च रोकने और ऊर्जा बचत को राष्ट्रीय जिम्मेदारी मानने की अपील भी की थी।

महंगाई पर बढ़ेगा असर

आर्थिक विशेषज्ञों का मानना है कि पेट्रोल-डीजल और CNG की कीमतें बढ़ने से आने वाले समय में महंगाई और बढ़ सकती है। ट्रांसपोर्ट महंगा होने से खाद्य सामग्री, दूध, सब्जियों और अन्य उपभोक्ता वस्तुओं के दाम बढ़ने की आशंका है।

इससे आम परिवारों का घरेलू बजट प्रभावित हो सकता है। खासकर मध्यम वर्ग और रोज कमाने-खाने वाले लोगों पर इसका असर अधिक देखने को मिलेगा।

सरकार का दावा- देश में ईंधन संकट नहीं

केंद्र सरकार ने कहा है कि देश में फिलहाल ईंधन की कोई कमी नहीं है। भारत के पास करीब 60 दिनों का ईंधन स्टॉक और लगभग 45 दिनों का LPG भंडार मौजूद है। सरकार लगातार वैश्विक हालात पर नजर बनाए हुए है।

हालांकि विशेषज्ञों का कहना है कि यदि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें लंबे समय तक ऊंची बनी रहती हैं, तो आने वाले महीनों में और दबाव बढ़ सकता है। छत्तीसगढ़ की हर अपडेट के लिए हमारे WhatsApp चैनल को फॉलो करें- https://whatsapp.com/channel/0029VbBj50DATRSgaSxCmo2v