Raipur News: तेलीबांधा तालाब में फिर मरने लगीं मछलियां, बदबू और फेन से बढ़ी चिंता

Raipur News: राजधानी रायपुर के प्रमुख पर्यटन स्थलों में शामिल तेलीबांधा तालाब एक बार फिर पर्यावरणीय संकट की चपेट में आ गया है। तालाब में लगातार मछलियों के मरने, पानी में फेन बनने और तेज बदबू फैलने से स्थानीय लोगों और पर्यावरण विशेषज्ञों की चिंता बढ़ गई है। तालाब के किनारों पर बड़ी संख्या में मृत मछलियां दिखाई देने के बाद लोगों ने नगर निगम और प्रशासन से तत्काल कार्रवाई की मांग की है।

स्थानीय नागरिकों का कहना है कि पिछले कई महीनों से तालाब की नियमित सफाई नहीं हुई है। इसके चलते जलकुंभी तेजी से फैल रही है और पानी की गुणवत्ता लगातार खराब होती जा रही है। स्थिति इतनी गंभीर हो चुकी है कि तालाब के आसपास दुर्गंध फैलने लगी है, जिससे सुबह-शाम घूमने आने वाले लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।

ऑक्सीजन की कमी से जलीय जीवन पर संकट

पर्यावरण विशेषज्ञ नितिन सिंघवी के अनुसार तालाब में अत्यधिक जलकुंभी फैलने से पानी की सतह लगभग ढंक जाती है। इससे सूर्य की रोशनी पानी के भीतर तक नहीं पहुंच पाती और धीरे-धीरे ऑक्सीजन का स्तर कम होने लगता है। यही वजह है कि मछलियों और अन्य जलीय जीवों के जीवित रहने के लिए जरूरी वातावरण खत्म होने लगता है।

विशेषज्ञों का कहना है कि सीमित मात्रा में जलकुंभी जलाशय की सुंदरता बढ़ाती है, लेकिन जब इसका फैलाव 60 से 70 प्रतिशत तक पहुंच जाता है, तब यह पूरे पारिस्थितिक तंत्र को प्रभावित करने लगती है। पानी की सतह पर मोटी परत बनने से गैसों का आदान-प्रदान भी प्रभावित होता है और मछलियां दम घुटने जैसी स्थिति में मरने लगती हैं।

पानी में फेन और बदबू ने बढ़ाई परेशानी

तालाब में बढ़ती गंदगी और जैविक अपशिष्ट के कारण पानी में लगातार फेन बन रहा है। कई स्थानों पर पानी का रंग भी बदलता दिखाई दे रहा है। आसपास रहने वाले लोगों का कहना है कि शाम के समय बदबू काफी तेज हो जाती है, जिससे क्षेत्र का वातावरण प्रभावित हो रहा है।

विशेषज्ञ मानते हैं कि यदि समय रहते सफाई और जल प्रबंधन की व्यवस्था नहीं की गई तो स्थिति और गंभीर हो सकती है। लगातार जमा हो रही गाद के कारण तालाब की गहराई भी कम होती जा रही है, जिससे जलधारण क्षमता प्रभावित हो रही है।

डेंगू और मलेरिया का खतरा बढ़ा

स्वास्थ्य विशेषज्ञ डा. पंकज किशोर के मुताबिक रुका हुआ पानी और जलकुंभी का घना फैलाव मच्छरों के पनपने के लिए अनुकूल वातावरण तैयार करता है। इससे डेंगू, मलेरिया और अन्य वेक्टर जनित बीमारियों का खतरा बढ़ सकता है।

विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द सुधारात्मक कदम नहीं उठाए गए तो यह केवल पर्यावरणीय संकट नहीं रहेगा, बल्कि सार्वजनिक स्वास्थ्य से जुड़ी बड़ी समस्या बन सकता है।

पर्यटन और बोटिंग गतिविधियां प्रभावित

तेलीबांधा तालाब रायपुर शहर की पहचान माने जाने वाले प्रमुख पर्यटन केंद्रों में शामिल है। यहां हर दिन बड़ी संख्या में लोग मॉर्निंग वॉक, बोटिंग और मनोरंजन के लिए पहुंचते हैं। लेकिन तालाब में फैलती गंदगी, मृत मछलियां और दुर्गंध अब इसकी खूबसूरती पर असर डाल रही हैं।

स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि समय पर सफाई और संरक्षण कार्य नहीं हुए तो आने वाले समय में यह तालाब अपनी पहचान खो सकता है।

नगर निगम ने जांच के दिए निर्देश

मामले को लेकर रायपुर नगर निगम के स्वास्थ्य विभाग की अध्यक्ष गायत्री चंद्राकर ने कहा कि तालाब में मछलियों के मरने और जलकुंभी फैलाव की जानकारी मिली है। निरीक्षण टीम को मौके पर भेजकर पानी की गुणवत्ता, ऑक्सीजन स्तर और अन्य कारणों की जांच कराई जाएगी। साथ ही सफाई और आवश्यक सुधारात्मक कार्रवाई भी की जाएगी।

फैक्ट फाइल

  • स्थान: तेलीबांधा तालाब
  • मुख्य समस्या: मछलियों की मौत, पानी में फेन और तेज बदबू
  • संभावित कारण: जलकुंभी का अत्यधिक फैलाव और सफाई कार्य ठप
  • पर्यावरणीय असर: ऑक्सीजन की कमी से जलीय जीवों पर खतरा
  • स्वास्थ्य जोखिम: मच्छरों की बढ़ोतरी, डेंगू और मलेरिया का खतरा
  • प्रभावित गतिविधियां: पर्यटन, मॉर्निंग वॉक और बोटिंग छत्तीसगढ़ की हर अपडेट के लिए हमारे WhatsApp चैनल को फॉलो करें- https://whatsapp.com/channel/0029VbBj50DATRSgaSxCmo2v