Raipur News: करोड़ों का स्टूडियो बना शोपीस! मोबाइल से वीडियो बनाने को मजबूर KTU के छात्र, एक साल से बंद पड़ी आधुनिक सुविधा

Raipur News: पत्रकारिता और डिजिटल मीडिया शिक्षा को आधुनिक तकनीक से जोड़ने के उद्देश्य से स्थापित किए गए करोड़ों रुपये के अत्याधुनिक स्टूडियो का लाभ छात्रों को नहीं मिल पा रहा है। राजधानी रायपुर स्थित कुशाभाऊ ठाकरे पत्रकारिता एवं जनसंचार विश्वविद्यालय में करोड़ों की लागत से तैयार किया गया हाईटेक स्टूडियो पिछले एक वर्ष से अधिक समय से लगभग बंद पड़ा हुआ है। हालत यह है कि जिन संसाधनों के जरिए छात्रों को प्रोफेशनल एंकरिंग, ब्रॉडकास्टिंग और डिजिटल कंटेंट प्रोडक्शन का प्रशिक्षण मिलना था, वे अब उपयोग के अभाव में धूल खा रहे हैं।

विश्वविद्यालय में मीडिया और जनसंचार की पढ़ाई कर रहे विद्यार्थियों का कहना है कि उन्हें आधुनिक स्टूडियो सुविधाओं का सपना दिखाकर प्रवेश दिलाया गया था, लेकिन डेढ़ साल बीत जाने के बाद भी अधिकांश छात्रों को स्टूडियो में काम करने का अवसर नहीं मिला है। नतीजतन उन्हें अपने प्रैक्टिकल, प्रोजेक्ट और वीडियो असाइनमेंट मोबाइल फोन के जरिए पूरे करने पड़ रहे हैं।

आधुनिक उपकरण लेकिन संचालित करने वाला कोई नहीं

जानकारी के अनुसार स्टूडियो में प्रोफेशनल कैमरे, कंट्रोल सिस्टम, ऑडियो-वीडियो रिकॉर्डिंग यूनिट और अन्य आधुनिक उपकरण लगाए गए हैं। लेकिन सबसे बड़ी समस्या यह है कि इन उपकरणों को संचालित करने के लिए प्रशिक्षित तकनीकी स्टाफ उपलब्ध नहीं है। विश्वविद्यालय में स्टूडियो संचालन के लिए न तो पर्याप्त तकनीकी कर्मचारियों की नियुक्ति की गई है और न ही किसी विशेषज्ञ को जिम्मेदारी सौंपी गई है।

सूत्रों का कहना है कि स्टूडियो में लगे कई उपकरण लंबे समय से उपयोग में नहीं आए हैं। वहीं एयर कंडीशनिंग सिस्टम भी खराब बताया जा रहा है, जिसके कारण महंगे इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों के रखरखाव को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं।

मोबाइल कैमरे से सीख रहे मीडिया प्रोडक्शन

मीडिया शिक्षा में व्यावहारिक प्रशिक्षण को सबसे महत्वपूर्ण माना जाता है। टीवी एंकरिंग, न्यूज प्रोडक्शन, कैमरा संचालन और डिजिटल ब्रॉडकास्टिंग जैसे विषयों के लिए स्टूडियो आधारित प्रशिक्षण आवश्यक होता है। लेकिन विश्वविद्यालय के विद्यार्थी फिलहाल मोबाइल कैमरे से वीडियो शूट कर रहे हैं और उसी के जरिए एडिटिंग का काम भी सीख रहे हैं।

छात्रों का कहना है कि प्रोफेशनल स्टूडियो में काम करने का अनुभव और मोबाइल फोन से वीडियो बनाने का अनुभव पूरी तरह अलग होता है। ऐसे में पढ़ाई पूरी करने के बाद उद्योग जगत की अपेक्षाओं के अनुरूप कौशल विकसित करने में उन्हें कठिनाई हो सकती है।

प्रवेश के समय किए गए थे बड़े दावे

विद्यार्थियों का आरोप है कि प्रवेश प्रक्रिया के दौरान विश्वविद्यालय की आधुनिक सुविधाओं, स्टूडियो और डिजिटल मीडिया इंफ्रास्ट्रक्चर को प्रमुखता से दिखाया गया था। कई छात्रों ने इसी आधार पर यहां प्रवेश लिया, लेकिन वास्तविकता इसके विपरीत निकली।

छात्रों का कहना है कि उन्होंने न केवल खुद स्टूडियो का उपयोग नहीं किया, बल्कि अपने वरिष्ठ विद्यार्थियों को भी वहां नियमित रूप से काम करते नहीं देखा। इससे विद्यार्थियों में नाराजगी बढ़ रही है।

कुलपति बोले- जल्द होगी समीक्षा

मामले को लेकर विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. मनोज दयाल ने कहा कि वे हाल ही में विश्वविद्यालय में आए हैं और कैंपस की विभिन्न व्यवस्थाओं को चरणबद्ध तरीके से सुधारने का प्रयास किया जा रहा है।

उन्होंने कहा कि स्टूडियो की स्थिति और संचालन से जुड़ी जानकारी संबंधित अधिकारियों से ली जाएगी तथा आवश्यक सुधारात्मक कदम उठाए जाएंगे। कुलपति ने संकेत दिए हैं कि इस विषय पर जल्द समीक्षा की जाएगी ताकि विद्यार्थियों को उपलब्ध संसाधनों का लाभ मिल सके।

शिक्षा की गुणवत्ता पर उठ रहे सवाल

विशेषज्ञों का मानना है कि जब किसी विश्वविद्यालय में करोड़ों रुपये खर्च कर आधुनिक सुविधाएं विकसित की जाती हैं, तो उनका उपयोग सुनिश्चित करना भी उतना ही जरूरी होता है। यदि संसाधन केवल भवनों और उपकरणों तक सीमित रह जाएं और विद्यार्थियों को उनका लाभ न मिले, तो शिक्षा की गुणवत्ता पर स्वाभाविक रूप से सवाल खड़े होते हैं।

मीडिया और संचार के क्षेत्र में व्यावहारिक अनुभव सबसे महत्वपूर्ण माना जाता है। ऐसे में छात्रों को आधुनिक स्टूडियो सुविधाओं से वंचित रहना उनके पेशेवर विकास को प्रभावित कर सकता है।

अब विद्यार्थियों और अभिभावकों की नजर विश्वविद्यालय प्रशासन पर है कि आखिर करोड़ों रुपये की लागत से तैयार इस अत्याधुनिक स्टूडियो को कब तक पूरी तरह चालू किया जाता है और छात्रों को वह सुविधाएं कब मिलती हैं, जिनके वादे के आधार पर उन्हें प्रवेश दिया गया था। छत्तीसगढ़ की हर अपडेट के लिए हमारे WhatsApp चैनल को फॉलो करें- https://whatsapp.com/channel/0029VbBj50DATRSgaSxCmo2v