Rakhi News: छत्तीसगढ़ में रक्षाबंधन का पर्व इस बार जेलों के भीतर भी भाई-बहन के स्नेह और भावनात्मक मिलन का अवसर बना। प्रदेश की 5 केंद्रीय जेलों, 22 जिला जेलों और 6 उपजेलों सहित कुल 33 जेलों में बंदियों से मिलने पहुंचीं बहनों ने अपने भाइयों की कलाई पर राखी बांधी। कई स्थानों पर लंबे समय बाद भाई-बहन की मुलाकात हुई, जिससे भावुक दृश्य देखने को मिले। डीजी जेल हिमांशु गुप्ता के अनुसार, रक्षाबंधन के अवसर पर जेल प्रशासन ने बंदियों और उनके परिजनों की मुलाकात के लिए आवश्यक व्यवस्थाएं की थीं।
33 जेलों में बहनों ने बांधी राखी
रक्षाबंधन के मौके पर प्रदेशभर की जेलों में बड़ी संख्या में महिलाएं अपने बंदी भाइयों से मिलने पहुंचीं। जेलों में मुलाकात के दौरान बहनों ने भाइयों को राखी बांधी और उनके बेहतर भविष्य की कामना की।
छत्तीसगढ़ में वर्तमान में 5 केंद्रीय, 22 जिला और 6 उपजेल संचालित हैं। इन सभी 33 जेलों में रक्षाबंधन के अवसर पर विशेष मुलाकात की व्यवस्था की गई। जेल के भीतर भाई-बहन के मिलन के दौरान कई परिवार भावुक नजर आए।
रक्षाबंधन केवल एक पारंपरिक त्योहार नहीं, बल्कि भाई-बहन के रिश्ते में विश्वास, स्नेह और जिम्मेदारी का प्रतीक है। ऐसे में जेलों में बंद भाइयों तक पहुंचकर बहनों ने इस रिश्ते की डोर को बनाए रखने का संदेश दिया।
बंदियों से मिलकर साझा की खुशियां
जेल में बंद कई कैदियों के लिए यह दिन सामान्य दिनों से अलग रहा। अपने परिवार से दूर रहने वाले बंदियों को रक्षाबंधन पर बहनों से मिलने का अवसर मिला। बहनों ने राखी बांधकर भाइयों के प्रति अपना स्नेह व्यक्त किया।
मुलाकात के दौरान परिवार के सदस्यों ने बंदियों का हालचाल जाना। रक्षाबंधन के कारण जेल परिसर में भी पारिवारिक भावनाओं से जुड़ा माहौल देखने को मिला।
जेल प्रशासन की ओर से मुलाकात प्रक्रिया को व्यवस्थित रखने के लिए आवश्यक इंतजाम किए गए थे। सुरक्षा व्यवस्था के बीच परिजनों को निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार बंदियों से मिलने की अनुमति दी गई।
गरिमा गृह में भी मनाया गया पर्व
रायपुर के ट्रांसजेंडर शेल्टर होम ‘गरिमा गृह’ में भी रक्षाबंधन का पर्व मनाया गया। यहां भी भाई-बहन के स्नेह और सामाजिक जुड़ाव का संदेश दिया गया।
रक्षाबंधन के विभिन्न आयोजनों के माध्यम से समाज में आपसी सम्मान और रिश्तों की महत्ता को रेखांकित किया गया। प्रदेश के अलग-अलग स्थानों पर पर्व को सामाजिक सरोकारों से जोड़कर भी मनाया गया।
सरेंडर महिला नक्सलियों ने बांधी DRG जवानों को राखी
कांकेर जिले के भानुप्रतापपुर क्षेत्र के ग्राम चौगेल (मुल्ला) में रक्षाबंधन के अवसर पर एक अलग तस्वीर सामने आई। यहां सरेंडर कर चुकी महिला नक्सलियों ने DRG जवानों को राखी बांधी।
इस अवसर पर भाई-बहन के पारंपरिक पर्व को विश्वास और सामाजिक मुख्यधारा से जुड़ाव के संदेश के रूप में देखा गया। सरेंडर के बाद सामान्य जीवन की दिशा में आगे बढ़ रही महिलाओं ने जवानों के साथ रक्षाबंधन की खुशियां साझा कीं।
कार्यक्रम ने यह संदेश भी दिया कि हिंसा का रास्ता छोड़कर समाज की मुख्यधारा से जुड़ने वाले लोगों के लिए नए अवसर और सामान्य जीवन की संभावनाएं मौजूद हैं।
भाई-बहन के रिश्ते का दिखा अलग रूप
एक ओर प्रदेश की 33 जेलों में बहनें अपने बंदी भाइयों की कलाई पर राखी बांधने पहुंचीं, तो दूसरी ओर कांकेर में सरेंडर महिला नक्सलियों और DRG जवानों के बीच रक्षाबंधन का आयोजन हुआ।
इन अलग-अलग तस्वीरों में एक समान बात भाई-बहन के रिश्ते से जुड़ा स्नेह, विश्वास और सामाजिक जुड़ाव रहा। जेलों में बंद भाइयों से मिलने पहुंचीं बहनों ने यह भी दिखाया कि परिस्थितियां बदल सकती हैं, लेकिन पारिवारिक रिश्तों का महत्व बना रहता है।
रायपुर के गरिमा गृह से लेकर कांकेर के चौगेल गांव और प्रदेश की 33 जेलों तक रक्षाबंधन के इस पर्व ने छत्तीसगढ़ में रिश्तों और सामाजिक सद्भाव की अलग-अलग तस्वीरें पेश कीं।




