Raigarh News: रायगढ़ जिले के जामपाली खुली खदान और साइडिंग मार्ग पर भारी वाहनों की तेज रफ्तार को लेकर स्थानीय लोगों में चिंता बढ़ रही है। गोवंश के वाहनों की चपेट में आने से मौत की घटनाओं के बाद ग्रामीणों और गोवंश संरक्षण से जुड़े लोगों ने SECL प्रबंधन से सड़क सुरक्षा व्यवस्था तत्काल मजबूत करने की मांग की है। आरोप है कि खदान और साइडिंग से जुड़े मार्गों पर भारी वाहनों की आवाजाही के दौरान प्रभावी गति नियंत्रण और अन्य सुरक्षा उपाय पर्याप्त नहीं हैं। राष्ट्रीय गौरक्षा वाहिनी (भारत) के राष्ट्रीय महासचिव केदार नाथ साहू ने चेतावनी दी है कि सुरक्षा व्यवस्था में सुधार नहीं होने पर संगठन शांतिपूर्ण और वैधानिक तरीके से विरोध दर्ज कराएगा।
गोवंश की मौत से बढ़ा स्थानीय आक्रोश
जामपाली खुली खदान क्षेत्र में भारी वाहनों की लगातार आवाजाही रहती है। स्थानीय लोगों का कहना है कि सड़क पर गोवंश के आने की स्थिति में तेज रफ्तार भारी वाहनों से दुर्घटना का खतरा बढ़ जाता है।
गोवंश के वाहन की चपेट में आने से मौत की घटनाओं के बाद क्षेत्र में आक्रोश देखा जा रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि यह केवल पशुओं की सुरक्षा का मामला नहीं है, बल्कि इसी मार्ग से आने-जाने वाले आम लोगों के लिए भी सड़क सुरक्षा का गंभीर मुद्दा है।
स्थानीय लोगों के अनुसार, यदि भारी वाहनों की गति और आवाजाही पर प्रभावी नियंत्रण नहीं किया गया तो भविष्य में बड़ी दुर्घटनाओं की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता।
साइडिंग मार्गों की सुरक्षा पर उठे सवाल
स्थानीय लोगों ने जामपाली खदान और साइडिंग से जुड़े मार्गों पर सुरक्षा व्यवस्था को लेकर सवाल उठाए हैं। उनका आरोप है कि उत्पादन और डिस्पैच के लिए बड़ी संख्या में भारी वाहनों की आवाजाही होती है, लेकिन संवेदनशील स्थानों पर सड़क सुरक्षा के पर्याप्त इंतजाम जरूरी हैं।
उनका कहना है कि कई स्थानों पर वाहनों की गति नियंत्रित करने के लिए सख्त निगरानी की आवश्यकता है। रात के समय पर्याप्त प्रकाश व्यवस्था, चेतावनी संकेतक और गति नियंत्रण जैसे उपायों को प्रभावी बनाने की मांग की गई है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि भारी वाहनों के चालक निर्धारित गति सीमा का पालन करें, इसके लिए नियमित निगरानी और जिम्मेदारी तय करने की व्यवस्था होनी चाहिए।
SECL प्रबंधन के सामने रखीं पांच मांगें
गोवंश संरक्षण से जुड़े लोगों और स्थानीय ग्रामीणों ने SECL प्रबंधन के समक्ष सड़क सुरक्षा को लेकर कई मांगें रखी हैं।
उनकी प्रमुख मांगों में जामपाली खदान और साइडिंग मार्ग पर भारी वाहनों के लिए स्पीड लिमिट को सख्ती से लागू करना शामिल है। इसके अलावा दुर्घटना संभावित और संवेदनशील स्थानों पर स्पीड ब्रेकर तथा चेतावनी संकेतक लगाने की मांग की गई है।
रात में भारी वाहनों की आवाजाही को देखते हुए मार्गों पर पर्याप्त प्रकाश व्यवस्था सुनिश्चित करने की भी मांग उठाई गई है। वाहन चालकों की गति और संभावित लापरवाही की नियमित निगरानी के लिए प्रभावी व्यवस्था बनाने पर भी जोर दिया गया है।
स्थानीय लोगों ने गोवंश के साथ-साथ आम नागरिकों की सुरक्षा के लिए अतिरिक्त सुरक्षा उपाय तत्काल लागू करने की मांग की है।
केदार नाथ साहू ने की तत्काल कार्रवाई की मांग
राष्ट्रीय गौरक्षा वाहिनी (भारत) के राष्ट्रीय महासचिव केदार नाथ साहू ने कहा कि जामपाली क्षेत्र में सड़क और गोवंश सुरक्षा को लेकर अब केवल आश्वासन पर्याप्त नहीं है। उन्होंने SECL प्रबंधन से भारी वाहनों की रफ्तार नियंत्रित करने और आवश्यक सुरक्षा व्यवस्था लागू करने की मांग की।
उन्होंने कहा कि गोवंश की सुरक्षा के साथ आम नागरिकों की सुरक्षा भी प्राथमिकता होनी चाहिए। उनके अनुसार, अगली दुर्घटना की प्रतीक्षा करने के बजाय संभावित जोखिम वाले स्थानों की पहचान कर पहले से सुरक्षा उपाय किए जाने चाहिए।
साहू ने कहा कि यदि सुरक्षा व्यवस्था में जल्द सुधार नहीं किया गया तो ग्रामीणों और गोवंश संरक्षण से जुड़े लोग लोकतांत्रिक और वैधानिक तरीके से अपनी मांग को लेकर विरोध दर्ज कराएंगे।
‘उत्पादन के साथ सुरक्षा भी जरूरी’
स्थानीय लोगों का कहना है कि खदानों और औद्योगिक क्षेत्रों में उत्पादन एवं परिवहन गतिविधियां महत्वपूर्ण हैं, लेकिन इनके साथ सड़क सुरक्षा मानकों का पालन भी उतना ही आवश्यक है।
भारी वाहनों की लगातार आवाजाही वाले मार्गों पर गति नियंत्रण, पर्याप्त संकेतक, प्रकाश व्यवस्था और निगरानी से दुर्घटनाओं के जोखिम को कम किया जा सकता है। स्थानीय लोगों ने प्रबंधन से मांग की है कि जामपाली क्षेत्र में सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा कर जरूरी सुधार किए जाएं।
उनका कहना है कि विशेष रूप से उन स्थानों पर अतिरिक्त ध्यान दिया जाना चाहिए, जहां गोवंश या ग्रामीणों की आवाजाही अधिक रहती है।
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