Raigarh News: रायगढ़ जिले के धरमजयगढ़ वन मंडल से गणेश चतुर्थी के मौके पर वन्यजीव प्रेमियों के लिए खुशी की खबर सामने आई है। बाकारूमा रेंज के ससकोबा परिसर में एक मादा हथिनी ने नन्हे शावक को जन्म दिया है। खास बात यह है कि जिस दिन देशभर में भगवान गणेश का जन्मोत्सव मनाया जा रहा था, उसी दिन जंगल में हाथियों के कुनबे में एक नए सदस्य का आगमन हुआ। शावक के जन्म के बाद वन विभाग ने उसकी मां और पूरे हाथी दल की निगरानी बढ़ा दी है।
जानकारी के अनुसार, बाकारूमा रेंज के ससकोबा परिसर के 99 पीएफ क्षेत्र में करीब 11 हाथियों का दल विचरण कर रहा है। इसी दल में शामिल एक मादा हथिनी ने गणेश चतुर्थी के दिन शावक को जन्म दिया। वन विभाग के अनुसार, नवजात शावक अपनी मां के साथ सुरक्षित है और हाथियों का दल फिलहाल जंगल के भीतर विचरण कर रहा है।
शावक के जन्म की जानकारी मिलने के बाद वन विभाग की टीम ने संबंधित क्षेत्र में निगरानी बढ़ा दी है। विभाग की प्राथमिकता मां और नवजात शावक की सुरक्षा सुनिश्चित करना है। हाथियों के दल की गतिविधियों पर लगातार नजर रखी जा रही है, ताकि किसी तरह की परेशानी की स्थिति उत्पन्न न हो।
बाकारूमा रेंजर विष्णु मरावी के अनुसार, धरमजयगढ़ वन मंडल क्षेत्र में लगातार हाथियों की मौजूदगी बनी हुई है। ऐसे में हाथियों के दल में नए शावक का जन्म वन विभाग के लिए निगरानी की दृष्टि से महत्वपूर्ण है। टीम हाथियों की गतिविधियों पर नजर बनाए हुए है और क्षेत्र की स्थिति पर लगातार निगरानी की जा रही है।
वन विभाग के साथ हाथी मित्र दल के सदस्य भी क्षेत्र में सक्रिय हैं। ग्रामीणों को हाथियों के दल से सुरक्षित दूरी बनाए रखने और जंगल में अनावश्यक रूप से नहीं जाने की समझाइश दी जा रही है। विभाग की ओर से लोगों को हाथियों की गतिविधियों के दौरान सावधानी बरतने और किसी भी तरह की छेड़छाड़ से बचने के लिए कहा गया है।
गणेश चतुर्थी के दिन हाथी के शावक के जन्म की जानकारी सामने आने से इस घटना का धार्मिक और सांस्कृतिक संदर्भ भी लोगों के बीच चर्चा का विषय बना है। गणेश चतुर्थी भगवान गणेश के जन्मोत्सव के रूप में मनाई जाती है और हाथी को भगवान गणेश के स्वरूप से जोड़ा जाता है। इसी वजह से ग्रामीणों और वन्यजीव प्रेमियों के बीच शावक के जन्म को लेकर उत्साह देखा जा रहा है।
हालांकि, वन विभाग की ओर से इस घटना को मुख्य रूप से वन्यजीव संरक्षण और सुरक्षा की दृष्टि से देखा जा रहा है। नवजात शावक के साथ उसकी मां की सुरक्षा के लिए मानवीय हस्तक्षेप को कम रखना जरूरी माना जा रहा है। इसी को देखते हुए ग्रामीणों से जंगल के संबंधित क्षेत्र में नहीं जाने की अपील की गई है।
वन विभाग की टीम हाथियों के दल की लगातार निगरानी कर रही है। विभाग का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि नवजात शावक और उसकी मां सुरक्षित रहें तथा हाथियों की मौजूदगी के कारण आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों में मानव-हाथी संघर्ष की स्थिति उत्पन्न न हो। ग्रामीणों से हाथियों की गतिविधियों की जानकारी मिलने पर सतर्क रहने और विभागीय समझाइश का पालन करने को कहा गया है।
गणेश चतुर्थी के अवसर पर हाथियों के दल में शावक के जन्म की यह जानकारी धरमजयगढ़ क्षेत्र में वन्यजीव संरक्षण को लेकर भी चर्चा में है। फिलहाल वन विभाग की निगाह मां और शावक की गतिविधियों पर बनी हुई है और हाथियों के दल की निगरानी लगातार जारी है।
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