Raigarh News: छत्तीसगढ़ के रायगढ़ जिले के युवा निशानेबाज Divyanshu Devangan ने अंतरराष्ट्रीय मंच पर स्वर्ण पदक और विश्व रिकॉर्ड हासिल कर देश और प्रदेश का नाम रोशन किया है। लेकिन जहां एक ओर पूरे शहर ने अपने इस युवा खिलाड़ी का ऐतिहासिक स्वागत किया, वहीं दूसरी ओर जिला प्रशासन की चुप्पी और औपचारिक सम्मान का अभाव अब सवालों के घेरे में आ गया है।
विश्व स्तर की प्रतियोगिता में शानदार प्रदर्शन कर गोल्ड मेडल जीतने के बाद जब दिव्यांशु रायगढ़ लौटे तो शहर में उत्सव जैसा माहौल दिखाई दिया। बाइक रैली, फूल-मालाओं और जयघोष के बीच उनका स्वागत किया गया। हर तरफ केवल एक ही चर्चा थी—रायगढ़ का बेटा अब दुनिया में भारत का नाम चमका रहा है।
लेकिन इस गौरवपूर्ण उपलब्धि के बीच प्रशासनिक उपेक्षा को लेकर लोगों में नाराजगी भी साफ दिखाई दी।
प्रेस वार्ता में बोले दिव्यांशु – “मानसिक मजबूती ही असली ताकत”
बीते रविवार आयोजित प्रेस वार्ता में दिव्यांशु देवांगन ने बेहद आत्मविश्वास और सरलता के साथ अपने संघर्ष, तैयारी और भविष्य के सपनों को साझा किया।
उन्होंने कहा कि:
“अंतरराष्ट्रीय स्तर पर जीत हासिल करने के लिए सिर्फ तकनीक नहीं, बल्कि मानसिक संतुलन और आत्मविश्वास सबसे बड़ी ताकत होती है।”
दिव्यांशु ने बताया कि प्रतियोगिता के दौरान दबाव काफी ज्यादा था, लेकिन उन्होंने अपना फोकस बनाए रखा।
विश्व रिकॉर्ड वाली परफॉर्मेंस को लेकर उन्होंने कहा कि बड़े देशों और अनुभवी खिलाड़ियों के बीच मुकाबला चुनौतीपूर्ण जरूर था, लेकिन अब भारतीय खिलाड़ी भी दुनिया में मजबूती से अपनी पहचान बना रहे हैं।
जीत के बाद सबसे पहले आया कोच का फोन
मीडिया से बातचीत के दौरान जब उनसे पूछा गया कि जीत के बाद सबसे पहला फोन किसका आया, तो उन्होंने मुस्कुराते हुए कहा:
- सबसे पहले कोच से बात हुई,
- फिर पिता,
- दोस्तों,
- और करीबियों के फोन आए।
उन्होंने अपनी सफलता का श्रेय:
- माता-पिता,
- कोच,
- और परिवार के सहयोग को दिया।
दिव्यांशु ने कहा कि संसाधनों की कमी कभी उनके सपनों के बीच दीवार नहीं बनी, क्योंकि परिवार ने हर परिस्थिति में उनका साथ दिया।
ओलंपिक जीतना है अगला सपना
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर गोल्ड मेडल जीतने के बाद अब दिव्यांशु की नजरें ओलंपिक पर टिकी हैं।
उन्होंने साफ कहा कि:
“मेरा सपना ओलंपिक तक पहुंचना और देश के लिए मेडल जीतना है।”
उन्होंने बताया कि उनका अगला मुकाबला जर्मनी में होने वाला है, जिसकी तैयारी अभी से शुरू कर दी गई है।
स्पोर्ट्स एक्सपर्ट्स का मानना है कि जिस तरह की निरंतरता और मानसिक मजबूती दिव्यांशु ने दिखाई है, वह आने वाले समय में भारत के बड़े शूटिंग सितारों में शामिल हो सकते हैं।
रायगढ़ में शूटिंग अकादमी खोलने पर क्या बोले?
प्रेस वार्ता के दौरान जब उनसे रायगढ़ में शूटिंग अकादमी खोलने को लेकर सवाल पूछा गया, तो उन्होंने कहा कि फिलहाल ऐसा कोई विचार नहीं है।
उन्होंने बताया कि:
- शहर में पहले से कुछ संस्थान इस दिशा में काम कर रहे हैं,
- और फिलहाल उनका पूरा फोकस अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं पर है।
हालांकि स्थानीय खेल प्रेमियों का मानना है कि यदि भविष्य में दिव्यांशु जैसे खिलाड़ी रायगढ़ में प्रशिक्षण व्यवस्था से जुड़ते हैं तो जिले के युवाओं को बड़ा फायदा मिल सकता है।
पूरा परिवार बना ताकत
प्रेस वार्ता में दिव्यांशु के साथ:
- पिता शैलेन्द्र देवांगन,
- माता यामिनी देवांगन,
- नानी श्रीमती चंद्रा,
- नाना देवलाल,
- बड़े नाना जगदीश मेहर,
- और दादी भी मौजूद रहीं।
परिवार ने दिव्यांशु की उपलब्धि पर खुशी जताते हुए कहा कि मेहनत, अनुशासन और परिवार के सहयोग से ही यह मुकाम हासिल हुआ है।
परिवार कला और सांस्कृतिक परिवेश से जुड़ा माना जाता है, जिसने दिव्यांशु को शुरू से प्रोत्साहित किया।
“प्रतिभा महानगरों की मोहताज नहीं”
दिव्यांशु की सफलता ने एक बार फिर साबित कर दिया कि:
- बड़े शहर ही प्रतिभा के केंद्र नहीं होते,
- छोटे शहरों और कस्बों से भी विश्व स्तर के खिलाड़ी निकल सकते हैं।
रायगढ़ जैसे शहर से निकलकर अंतरराष्ट्रीय मंच पर विश्व रिकॉर्ड बनाना हजारों युवाओं के लिए प्रेरणा बन चुका है।
सोशल मीडिया पर भी लोग:
- “Raigarh Shooter”,
- “Divyanshu Devangan Gold Medal”,
- और “CG Shooting Champion” जैसे कीवर्ड के साथ उनकी जमकर सराहना कर रहे हैं।
प्रशासनिक उपेक्षा पर उठे सवाल
जहां आम जनता, सामाजिक संगठन और खेल प्रेमी दिव्यांशु के सम्मान में आगे आए, वहीं जिला प्रशासन की ओर से किसी बड़े औपचारिक सम्मान या अभिनंदन कार्यक्रम का आयोजन नहीं होना अब चर्चा का विषय बन गया है।
परिवारजनों ने भी अप्रत्यक्ष रूप से इस बात पर निराशा जताई।
लोगों का कहना है कि:
- जब कोई खिलाड़ी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तिरंगा बुलंद करता है,
- विश्व रिकॉर्ड बनाता है,
- और देश का नाम रोशन करता है, तो उसका सम्मान केवल परिवार या समाज नहीं बल्कि प्रशासन की भी जिम्मेदारी होती है।
शहरवासियों ने किया ऐतिहासिक स्वागत
9 मई को रायगढ़ पहुंचने पर शहरवासियों ने दिव्यांशु का ऐतिहासिक स्वागत किया।
शहर में:
- बाइक रैली निकाली गई,
- फूल बरसाए गए,
- और युवाओं ने जयघोष के साथ उनका अभिनंदन किया।
कई सामाजिक संगठनों और खेल प्रेमियों ने उन्हें प्रदेश का गौरव बताया।
युवाओं के लिए बन गए प्रेरणा
दिव्यांशु की सफलता आज रायगढ़ ही नहीं बल्कि पूरे छत्तीसगढ़ के युवाओं के लिए प्रेरणा बन चुकी है।
स्पोर्ट्स एक्सपर्ट्स का कहना है कि:
- यदि ऐसे खिलाड़ियों को सही सुविधाएं,
- आर्थिक सहयोग,
- और प्रशासनिक समर्थन मिले, तो छत्तीसगढ़ देश को कई अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ी दे सकता है।
अब प्रशासन से लोगों की उम्मीद
अब लोगों की निगाहें जिला प्रशासन पर टिकी हैं।
लोग उम्मीद कर रहे हैं कि:
- विश्व रिकॉर्ड बनाने वाले इस खिलाड़ी को सम्मानित किया जाएगा,
- और जिले में खेल प्रतिभाओं को बढ़ावा देने के लिए ठोस कदम उठाए जाएंगे।
फिलहाल रायगढ़ का यह युवा शूटर अपनी मेहनत, संघर्ष और गोल्डन उपलब्धि के कारण पूरे प्रदेश के लिए गर्व का विषय बना हुआ है। छत्तीसगढ़ की हर अपडेट के लिए हमारे WhatsApp चैनल को फॉलो करें- https://whatsapp.com/channel/0029VbBj50DATRSgaSxCmo2v





