अपने गढ़ को बचाने की कोशिश में ममता बनर्जी की तृणमूल कांग्रेस का सीधा मुकाबला भारतीय जनता पार्टी (BJP) से है। बीजेपी की ओर से इस चुनाव में प्रमुख चेहरा मुख्यमंत्री की पूर्व सहयोगी और वर्तमान नेता प्रतिपक्ष सुवेंदु अधिकारी हैं, जो अब उनके सबसे बड़े राजनीतिक प्रतिद्वंद्वी बन चुके हैं।
इस चुनाव में कांग्रेस और वाम दल भी मैदान में हैं, हालांकि उनकी भूमिका सीमित मानी जा रही है। राजनीतिक समीकरणों में एक नया मोड़ उस समय आया जब तृणमूल से निलंबित विधायक हुमायूं कबीर ने अपनी अलग पार्टी बनाकर चुनावी मैदान में उतरने का फैसला किया। बाबरी के नाम पर मस्जिद बनाने की पहल के कारण वे पहले ही चर्चा में आ चुके थे।
पश्चिम बंगाल में मतदान दो चरणों में 23 और 29 अप्रैल को हुआ था। कुछ स्थानों पर गड़बड़ी की शिकायतों के बाद फाल्टा विधानसभा क्षेत्र और कुछ अन्य बूथों पर पुनर्मतदान भी कराया गया।
सरकार बनाने का गणित क्या कहता है?
पश्चिम बंगाल विधानसभा में कुल 294 सीटें हैं। सरकार बनाने के लिए किसी भी पार्टी या गठबंधन को कम से कम 148 सीटों का बहुमत हासिल करना जरूरी है। जो भी दल इस आंकड़े को पार करेगा, वही राज्य में सरकार बनाएगा।
इस बार एग्जिट पोल किसी स्पष्ट विजेता का अनुमान लगाने में असफल रहे थे, जिससे मतगणना को लेकर उत्सुकता और भी बढ़ गई थी।
पिछले चुनाव के नतीजे और इस बार की टक्कर
वर्ष 2021 के विधानसभा चुनाव में तृणमूल कांग्रेस ने 215 सीटें जीतकर सत्ता बरकरार रखी थी, जबकि बीजेपी ने 77 सीटें जीतकर राज्य में पहली बार मुख्य विपक्षी दल के रूप में उभरकर बड़ी राजनीतिक बढ़त बनाई थी। उस चुनाव में कांग्रेस और वाम दलों का खाता तक नहीं खुला था।
हालांकि 2021 में ममता बनर्जी नंदीग्राम सीट से सुवेंदु अधिकारी के खिलाफ चुनाव हार गई थीं, लेकिन बाद में भवानीपुर सीट से उपचुनाव जीतकर उन्होंने विधानसभा में वापसी की थी।
इस बार सुवेंदु अधिकारी ने मुकाबले को और दिलचस्प बनाते हुए भवानीपुर में ही ममता बनर्जी को सीधी चुनौती दी है। यही वजह है कि इस सीट पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं और यह मतगणना का सबसे बड़ा फोकस बन गया है।
पूरे बंगाल में दिखा राजनीतिक घमासान
इस बार का चुनाव केवल सीटों की लड़ाई नहीं, बल्कि विचारधाराओं, जमीनी राजनीति, लोकलुभावन वादों और विकास के एजेंडे के बीच सीधा टकराव रहा।
बंगाल, जहां 15 साल पहले वामपंथ का किला ढह गया था, वहां एक बार फिर बड़े राजनीतिक बदलाव की संभावनाएं नजर आ रही हैं। चुनाव प्रचार के दौरान पूरे राज्य में जबरदस्त राजनीतिक गर्मी देखने को मिली, जिसका असर अब मतगणना के रुझानों में भी साफ दिखाई दे रहा है।
फिलहाल सभी की नजरें अंतिम नतीजों पर टिकी हुई हैं, जो यह तय करेंगे कि पश्चिम बंगाल में सत्ता की कमान किसके हाथ में जाएगी—क्या तृणमूल अपनी पकड़ बचा पाएगी या बीजेपी इतिहास रचते हुए पहली बार पूर्ण बहुमत के साथ सरकार बनाएगी।