National News: बारिश से देश के 45 बिजली संयंत्रों में कोयला संकट, छत्तीसगढ़ में स्टॉक जरूरत से ज्यादा

National News: लगातार हो रही बारिश ने देशभर में कोयला उत्पादन और बिजली संयंत्रों तक इसकी आपूर्ति को प्रभावित किया है। कोरबा सहित कई इलाकों में खदानों में पानी भरने और कैप्टिव कोल ब्लॉक्स में खनन प्रभावित होने से कोयले की उपलब्धता पर असर पड़ा है। केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण (CEA) की ताजा रिपोर्ट के अनुसार, देश के 186 प्रमुख बिजली संयंत्रों में से 45 में कोयले का स्टॉक क्रिटिकल स्तर पर पहुंच गया है। हालांकि, छत्तीसगढ़ में फिलहाल स्थिति सामान्य है और राज्य के बिजली संयंत्रों के पास जरूरत के मुकाबले अधिक कोयला उपलब्ध है।

बारिश से कोयला उत्पादन प्रभावित

सावन और भादो में लगातार हो रही झमाझम बारिश ने कोयला खदानों की रफ्तार धीमी कर दी है। छत्तीसगढ़ के कोरबा जिले सहित देशभर में रुक-रुककर हो रही भारी बारिश के कारण साउथ ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (SECL) और कोल इंडिया की अन्य कंपनियों की खदानों में उत्पादन प्रभावित हुआ है।

खदानों में पानी भरने के कारण खनन गतिविधियों पर असर पड़ा है। वहीं, कैप्टिव कोल ब्लॉक्स में भी बारिश के कारण खनन प्रभावित हुआ है। इसका सीधा असर बिजली संयंत्रों तक कोयला पहुंचाने की प्रक्रिया पर पड़ रहा है।

45 बिजली संयंत्रों में स्टॉक क्रिटिकल

कोयला आपूर्ति में आई कमी का असर देश के कई राज्यों के बिजली संयंत्रों पर दिखाई दे रहा है। केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण की रिपोर्ट के मुताबिक, देश के 186 प्रमुख बिजली संयंत्रों में से 45 संयंत्रों में कोयले का स्टॉक क्रिटिकल स्तर पर पहुंच गया है।

बिजली संयंत्रों के लिए पर्याप्त कोयला स्टॉक होना जरूरी है, क्योंकि आपूर्ति में किसी तरह की बाधा आने पर इसका सीधा असर बिजली उत्पादन पर पड़ सकता है। बारिश के कारण कोयले की आपूर्ति का चक्र प्रभावित होने से कई राज्यों में स्टॉक तेजी से घटा है।

हालांकि, छत्तीसगढ़ में फिलहाल ऐसी स्थिति नहीं है। यहां संतुलित स्टॉक और नियमित परिवहन के चलते बिजली संयंत्रों के लिए कोयले की उपलब्धता सामान्य बनी हुई है।

राजस्थान में सबसे ज्यादा कमी

केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण के नियमों के मुताबिक बिजली संयंत्रों में कम से कम 19 से 21 दिन का कोयला रिजर्व होना चाहिए, ताकि कोयले की आपूर्ति प्रभावित होने की स्थिति में भी बिजली उत्पादन जारी रखा जा सके।

राजस्थान में स्थिति गंभीर बताई गई है। राज्य के 7 बिजली संयंत्रों की कुल क्षमता 7,580 मेगावॉट है। इन संयंत्रों को रोजाना करीब 1.4 लाख टन कोयले की जरूरत होती है। नियमों के अनुसार यहां 21.87 लाख टन कोयले का स्टॉक होना चाहिए, लेकिन फिलहाल केवल 4.44 लाख टन कोयला उपलब्ध है।

इस तरह राजस्थान में उपलब्ध स्टॉक निर्धारित जरूरत की तुलना में काफी कम है और बारिश के बीच कोयला आपूर्ति को लेकर चिंता बढ़ गई है।

उत्तर प्रदेश में भी स्टॉक घटा

उत्तर प्रदेश के 6 बिजली संयंत्रों की कुल क्षमता 9,115 मेगावॉट है। इन संयंत्रों में रोजाना करीब 1.32 लाख टन कोयले की खपत होती है।

नियमों के मुताबिक यहां 24.73 लाख टन कोयला उपलब्ध होना चाहिए, लेकिन वर्तमान में स्टॉक केवल 8 लाख टन बताया गया है। बारिश के कारण आपूर्ति प्रभावित होने से यहां भी बिजली संयंत्रों में कोयले की उपलब्धता चिंता का विषय बनी हुई है।

गुजरात के प्लांट भी प्रभावित

गुजरात में 3 बिजली संयंत्रों की कुल क्षमता 4,010 मेगावॉट है। इन संयंत्रों को रोजाना करीब 58 हजार टन कोयले की जरूरत होती है।

नियमानुसार इन बिजली संयंत्रों में 12.9 लाख टन कोयले का स्टॉक होना चाहिए, जबकि वर्तमान में केवल 6.51 लाख टन कोयला उपलब्ध है। बारिश के कारण कोयले की आपूर्ति प्रभावित होने से गुजरात में भी स्टॉक निर्धारित स्तर से नीचे है।

छत्तीसगढ़ में जरूरत से ज्यादा स्टॉक

देश के कई राज्यों में जहां कोयले की कमी चिंता बढ़ा रही है, वहीं छत्तीसगढ़ के बिजली संयंत्रों की स्थिति फिलहाल सामान्य है। छत्तीसगढ़ राज्य विद्युत उत्पादन कंपनी की कुल उत्पादन क्षमता 2,840 मेगावॉट है।

इन बिजली संयंत्रों के संचालन के लिए रोजाना करीब 44 हजार टन कोयले की आवश्यकता होती है। नियमों के मुताबिक राज्य में 7.48 लाख टन कोयले का सुरक्षित स्टॉक होना चाहिए।

इसके मुकाबले वर्तमान में कंपनी के पास 8.30 लाख टन कोयला मौजूद है। यानी उपलब्ध स्टॉक निर्धारित सुरक्षित सीमा से अधिक है। बेहतर प्रबंधन और नियमित आपूर्ति के कारण फिलहाल छत्तीसगढ़ के बिजली संयंत्रों पर कोयले की कमी का संकट नहीं है।

कोरबा की मेगा खदानों से आपूर्ति

छत्तीसगढ़ में बिजली संयंत्रों के लिए कोयले की आपूर्ति में SECL की महत्वपूर्ण भूमिका है। SECL की छत्तीसगढ़ और मध्य प्रदेश में करीब 60 खदानें हैं।

कोरबा की गेवरा, दीपका और कुसमुंडा जैसी बड़ी मेगा परियोजनाओं से लगातार कोयला उपलब्ध कराया जा रहा है। इन खदानों से राज्य के एचटीपीएस, डीएसपीएम और मड़वा बिजली संयंत्रों के साथ-साथ एनटीपीसी कोरबा, सीपत तथा निजी क्षेत्र के बालको और केपीएल को भी कोयला भेजा जा रहा है।

बारिश के बावजूद इन परियोजनाओं से हो रही आपूर्ति के कारण छत्तीसगढ़ के बिजली संयंत्रों के पास फिलहाल पर्याप्त स्टॉक बना हुआ है।

बारिश के बीच आपूर्ति पर नजर

देश के कई हिस्सों में कोयला स्टॉक के क्रिटिकल स्तर पर पहुंचने के बीच आने वाले दिनों में खदानों से उत्पादन और बिजली संयंत्रों तक परिवहन महत्वपूर्ण रहेगा। छत्तीसगढ़ में फिलहाल उपलब्ध स्टॉक जरूरत से अधिक होने के कारण राज्य को तत्काल कोयला संकट का सामना नहीं करना पड़ रहा है। छत्तीसगढ़ की हर अपडेट के लिए हमारे WhatsApp चैनल को फॉलो करें- https://whatsapp.com/channel/0029VbBj50DATRSgaSxCmo2v