Monsoon Update: देश में बारिश का घाटा 40% से घटकर 14% हुआ, अब कई राज्यों में फिर कमजोर पड़ सकता है मानसून

Monsoon Update: देशभर में दक्षिण-पश्चिम मानसून पूरी तरह सक्रिय हो चुका है, लेकिन इसकी रफ्तार अब भी सभी क्षेत्रों में एक जैसी नहीं है। भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के अनुसार, 1 जून से 9 जुलाई 2026 के बीच देश में सामान्य से 14 प्रतिशत कम बारिश दर्ज की गई है। हालांकि, जून के अंत तक यह कमी करीब 40 प्रतिशत थी, जिसे जुलाई के पहले सप्ताह में हुई अच्छी बारिश ने काफी हद तक कम कर दिया है।

जुलाई की बारिश से मिली बड़ी राहत

पिछले एक सप्ताह के दौरान देश के कई हिस्सों में हुई व्यापक बारिश से जलाशयों का जलस्तर बढ़ा है और सूखे जैसे हालात वाले क्षेत्रों को राहत मिली है। मुंबई में भारी बारिश के चलते जलाशयों की क्षमता 10 प्रतिशत से बढ़कर लगभग 49 प्रतिशत तक पहुंच गई, जिससे शहर की जलापूर्ति को लेकर चिंता कम हुई।

मध्य और पश्चिम भारत में भी सामान्य से अधिक वर्षा दर्ज की गई, जिससे राष्ट्रीय स्तर पर बारिश का घाटा घटा है।

इन राज्यों में अब भी कम बारिश

IMD के अनुसार, पूर्वी उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड, पंजाब, महाराष्ट्र का मराठवाड़ा क्षेत्र, केरल और कर्नाटक के कुछ हिस्सों में अब भी सामान्य से कम वर्षा हुई है। इन क्षेत्रों में बारिश की कमी का असर खेती और जल संसाधनों पर पड़ रहा है।

मानसून ट्रफ बदल रहा है अपना रुख

मौसम विभाग के वैज्ञानिकों के मुताबिक, मानसून ट्रफ (निम्न दबाव की पट्टी) अब धीरे-धीरे उत्तर की ओर खिसक रही है। इसके कारण आने वाले दिनों में बारिश का वितरण बदल सकता है। जहां कुछ राज्यों में भारी बारिश होगी, वहीं कई इलाकों में मानसून की गतिविधियां कमजोर पड़ सकती हैं।

इन राज्यों में भारी बारिश की संभावना

IMD ने अगले कुछ दिनों में उत्तर प्रदेश, बिहार, पश्चिम बंगाल, सिक्किम और पूर्वोत्तर भारत के कई हिस्सों में भारी से बहुत भारी बारिश का अनुमान जताया है। वहीं दिल्ली में बारिश की गतिविधियां कम हो सकती हैं और मौसम अपेक्षाकृत शुष्क रहने की संभावना है।

इसके अलावा मध्य भारत और दक्षिणी प्रायद्वीपीय राज्यों में भी अगले सप्ताह मानसून की सक्रियता कमजोर रह सकती है।

खेती और जल प्रबंधन पर रहेगा असर

जुलाई का महीना पूरे मानसून सीजन की कुल वर्षा का लगभग एक-तिहाई हिस्सा लेकर आता है। ऐसे में इस महीने की बारिश का सीधा असर खरीफ फसलों, जलाशयों और पेयजल उपलब्धता पर पड़ता है। मौसम विशेषज्ञों ने बारिश में सुधार के बावजूद जल संरक्षण और संसाधनों के बेहतर प्रबंधन की आवश्यकता पर जोर दिया है। छत्तीसगढ़ की हर अपडेट के लिए हमारे WhatsApp चैनल को फॉलो करें- https://whatsapp.com/channel/0029VbBj50DATRSgaSxCmo2v