Mahadev App Case: महादेव ऑनलाइन सट्टेबाजी ऐप मामले में केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) ने जांच को नई दिशा देते हुए छह नई चार्जशीट दाखिल की हैं। एजेंसी ने भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 और भारतीय दंड संहिता (IPC) की धोखाधड़ी, जालसाजी और आपराधिक षड्यंत्र से जुड़ी धाराओं के तहत छह आरोपियों के खिलाफ अदालत में आरोपपत्र पेश किए हैं। इसके साथ ही पहले से आरोपी बनाए जा चुके कथित मुख्य संचालकों सौरभ चंद्राकर और रवि उप्पल के खिलाफ अतिरिक्त साक्ष्य भी अदालत में जमा किए गए हैं।
इन छह आरोपियों के खिलाफ दाखिल हुई चार्जशीट
सीबीआई ने जिन छह लोगों के खिलाफ नई चार्जशीट दाखिल की है, उनमें आशीम दास, रोहित गुलाटी, विकास छापरिया, अनिल धममानी, विशाल आहूजा और धीरज आहूजा शामिल हैं। एजेंसी का आरोप है कि ये सभी कथित रूप से ऑनलाइन सट्टेबाजी नेटवर्क और उससे जुड़े वित्तीय लेन-देन में शामिल रहे।
मनी ट्रेल और म्यूल अकाउंट्स की जांच
जांच एजेंसी के अनुसार, अवैध सट्टेबाजी से अर्जित धन को छिपाने के लिए कई बैंक खातों और कथित म्यूल अकाउंट्स (Mule Accounts) का इस्तेमाल किया गया। प्रारंभिक जांच में यह भी सामने आया कि रकम को कई स्तरों पर ट्रांसफर कर विदेश भेजने की कोशिश की गई। सीबीआई अब पूरे वित्तीय नेटवर्क की परतें खोलने में जुटी है और यह पता लगा रही है कि यह पैसा किन माध्यमों से कहां तक पहुंचा।
भ्रष्टाचार और संरक्षण नेटवर्क भी जांच के दायरे में
सीबीआई का दावा है कि अवैध कमाई का एक हिस्सा कथित तौर पर संरक्षण राशि और रिश्वत के रूप में प्रभावशाली लोगों तक पहुंचाया गया। इसी आधार पर मामले में भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धाराएं भी जोड़ी गई हैं। एजेंसी अब इस कथित संरक्षण नेटवर्क और सार्वजनिक पदों के दुरुपयोग की भी जांच कर रही है।
सौरभ चंद्राकर और रवि उप्पल पर शिकंजा
जांच के अनुसार, महादेव ऐप के कथित मुख्य संचालक सौरभ चंद्राकर और रवि उप्पल कई वर्षों पहले भारत छोड़कर पश्चिम एशिया चले गए थे और वहीं से नेटवर्क संचालित कर रहे थे। दोनों के खिलाफ अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कानूनी कार्रवाई जारी है। चार प्रमुख फरार आरोपियों के खिलाफ इंटरपोल रेड कॉर्नर नोटिस जारी कराया गया है और उन्हें भगोड़ा आर्थिक अपराधी घोषित कराने की प्रक्रिया भी चल रही है, ताकि उनकी संपत्तियां जब्त की जा सकें।
ED के बाद अब CBI की जांच भी तेज
महादेव ऐप मामला पहले प्रवर्तन निदेशालय (ED) की मनी लॉन्ड्रिंग जांच के कारण चर्चा में आया था। ईडी ने कई राज्यों में छापेमारी, गिरफ्तारियां और संपत्ति जब्ती की कार्रवाई की थी। अब सीबीआई ऑनलाइन सट्टेबाजी के अलावा कथित भ्रष्टाचार, अवैध वित्तीय लेन-देन, संरक्षण नेटवर्क और सार्वजनिक पदों के दुरुपयोग की भी जांच कर रही है।
डिजिटल और वित्तीय साक्ष्यों की पड़ताल जारी
सीबीआई डिजिटल ट्रांजेक्शन, बैंक खातों, सोशल मीडिया गतिविधियों और आरोपियों के संपर्कों की जांच कर रही है। एजेंसी का कहना है कि यदि जांच के दौरान नए तथ्य सामने आते हैं तो आगे भी पूरक चार्जशीट दाखिल की जा सकती हैं। अधिकारियों के अनुसार, लक्ष्य पूरे ऑनलाइन सट्टेबाजी नेटवर्क और उससे जुड़े सभी लोगों की भूमिका उजागर करना है।
क्या होगा आगे?
महादेव ऐप केस देश के सबसे बड़े डिजिटल अपराध मामलों में गिना जा रहा है, जिसमें ऑनलाइन सट्टेबाजी, मनी लॉन्ड्रिंग, वित्तीय अनियमितता और कथित भ्रष्टाचार जैसे कई गंभीर पहलू शामिल हैं। आने वाले दिनों में जांच एजेंसियों की कार्रवाई और तेज होने की संभावना है।
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