CG News: 48 घंटे में तेंदुए ने किया दो मवेशियों का शिकार, जंगल जाना छोड़ रहे ग्रामीण

CG News: छत्तीसगढ़ के कोरबा जिले में एक बार फिर तेंदुए की सक्रियता ने ग्रामीणों की चिंता बढ़ा दी है। कोरबा वनमंडल के पसरखेत वन परिक्षेत्र अंतर्गत कोरकोमा और कोलगा इलाके में तेंदुए ने महज 48 घंटे के भीतर एक बैल और एक भैंस का शिकार कर लिया है। लगातार दो घटनाओं के बाद ग्रामीणों में भय का माहौल है। स्थिति ऐसी बन गई है कि कई लोगों ने जंगल की ओर जाना कम कर दिया है, जबकि पशुपालक अपने मवेशियों को खुले में छोड़ने से बच रहे हैं। वन विभाग ने मामले को गंभीरता से लेते हुए निगरानी बढ़ा दी है। तेंदुए की गतिविधियों पर नजर रखने के लिए घटनास्थल के आसपास थर्मल कैमरे लगाए गए हैं। अधिकारियों का कहना है कि वन्यजीव की लोकेशन और मूवमेंट का पता लगाने के लिए लगातार मॉनिटरिंग की जा रही है। पहली घटना: बैल को बनाया शिकार जानकारी के अनुसार पहली घटना 27 मई को सामने आई। कर्रानारा बस्ती निवासी आमासो उरांव अपने बैलों को रोज की तरह जंगल में चरने के लिए छोड़कर आए थे। शाम के समय एक बैल तो वापस लौट आया, लेकिन दूसरा बैल घर नहीं पहुंचा। परिजनों और ग्रामीणों ने देर शाम तक उसकी तलाश की। काफी खोजबीन के बाद कटंग नाला के पास बैल का शव मिला। सूचना मिलने पर वन विभाग की टीम मौके पर पहुंची और जांच शुरू की। घटनास्थल पर मिले पंजों के निशान और हमले के तरीके से स्पष्ट हुआ कि बैल का शिकार तेंदुए ने किया है। इस घटना के बाद ग्रामीणों में चिंता बढ़ गई थी, लेकिन दो दिन बाद हुई दूसरी घटना ने पूरे क्षेत्र में दहशत फैला दी। दूसरी घटना: भैंस पर हमला, जंगल में मिला शव 29 मई की सुबह कोरकोमा निवासी दुहन सिंह राठिया की भैंस चरने के लिए जंगल गई थी। शाम तक भैंस घर नहीं लौटी तो परिजनों ने उसकी तलाश शुरू की। काफी खोजबीन के बाद फिटकपारा क्षेत्र में राइस मिल से कुछ दूरी पर जंगल की एक खाई में भैंस का शव मिला। सूचना पर पहुंची वन विभाग की टीम ने निरीक्षण किया। जांच में भैंस के शरीर पर तेंदुए के हमले के स्पष्ट निशान मिले। लगातार दो दिनों में दो बड़े मवेशियों का शिकार होने से ग्रामीणों की चिंता और बढ़ गई है। लोगों को आशंका है कि तेंदुआ अभी भी आसपास के जंगलों में मौजूद है और भविष्य में फिर हमला कर सकता है। ग्रामीणों में दहशत, प्रभावित हुई दिनचर्या कोरकोमा, कोलगा और आसपास के गांवों के लोग खेती-किसानी और दैनिक जरूरतों के लिए काफी हद तक जंगल पर निर्भर रहते हैं। लेकिन तेंदुए की मौजूदगी की खबर के बाद अब लोग अकेले जंगल जाने से बच रहे हैं। महिलाएं लकड़ी और वनोपज संग्रह के लिए जंगल जाने में डर महसूस कर रही हैं। वहीं पशुपालकों ने भी अपने मवेशियों को जंगल में खुला छोड़ना कम कर दिया है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि जल्द स्थिति नियंत्रित नहीं हुई तो उनकी आजीविका पर भी असर पड़ सकता है। वन विभाग ने बढ़ाई निगरानी मामले की गंभीरता को देखते हुए कोरबा वनमंडल की डीएफओ प्रमलता यादव ने अधिकारियों को विशेष निगरानी के निर्देश दिए हैं। उनके निर्देश पर एसडीओ दक्षिण सूर्यकांत सोनी और एसडीओ उत्तर राठिया की टीम लगातार क्षेत्र में मॉनिटरिंग कर रही है। वन विभाग ने घटनास्थलों और आसपास के संवेदनशील इलाकों में थर्मल कैमरे लगाए हैं। इन कैमरों की मदद से रात के समय भी तेंदुए की गतिविधियों पर नजर रखी जा सकेगी। अधिकारियों का कहना है कि कैमरों से प्राप्त फुटेज का विश्लेषण किया जा रहा है ताकि तेंदुए की मौजूदगी और मूवमेंट की सटीक जानकारी मिल सके। मुआवजा प्रक्रिया शुरू वन विभाग ने दोनों मृत मवेशियों का पशु चिकित्सकों की टीम से पोस्टमार्टम कराया है। रिपोर्ट के आधार पर प्रभावित पशुपालकों को मुआवजा देने की प्रक्रिया भी शुरू कर दी गई है। अधिकारियों ने आश्वासन दिया है कि निर्धारित नियमों के तहत पशुपालकों को आर्थिक सहायता प्रदान की जाएगी ताकि उन्हें हुए नुकसान की भरपाई की जा सके। ग्रामीणों के लिए जारी की गई एडवाइजरी वन विभाग ने लोगों से विशेष सतर्कता बरतने की अपील की है। अधिकारियों ने कहा है कि कोई भी व्यक्ति अकेले जंगल न जाए और समूह में ही आवाजाही करे। बच्चों को जंगल या सुनसान इलाकों में अकेले न भेजने की सलाह दी गई है। इसके अलावा मवेशियों को रात के समय खुले में न छोड़ने और सुरक्षित बाड़ों में रखने की अपील की गई है। यदि किसी को तेंदुआ दिखाई देता है या उसके पंजों के निशान नजर आते हैं तो तत्काल वन विभाग को सूचना देने को कहा गया है। मानव-वन्यजीव संघर्ष बना चुनौती विशेषज्ञों का मानना है कि जंगलों के आसपास बढ़ती मानवीय गतिविधियों और वन्यजीवों के प्राकृतिक आवास में बदलाव के कारण मानव-वन्यजीव संघर्ष की घटनाएं बढ़ रही हैं। कोरबा सहित छत्तीसगढ़ के कई वन क्षेत्रों में पिछले कुछ वर्षों में तेंदुए और भालू की गतिविधियां बढ़ी हैं।