Bhoramdev Jungle Safari: 34KM का नया एडवेंचर ट्रैक शुरू, दुरदुरी झरना और 360° व्यू प्वाइंट बना सबसे बड़ा आकर्षण

Bhoramdev Jungle Safari: छत्तीसगढ़ के कबीरधाम जिले स्थित भोरमदेव वन्यजीव अभयारण्य में अब पर्यटकों के लिए एक बड़ा आकर्षण शुरू हो गया है। 34 किलोमीटर लंबे जंगल सफारी ट्रैक की शुरुआत के साथ राज्य के इको-टूरिज्म सेक्टर को नई गति मिलने की उम्मीद जताई जा रही है। यह सफारी न केवल रोमांच और प्राकृतिक सौंदर्य का अनूठा अनुभव देगी, बल्कि स्थानीय रोजगार और वन संरक्षण के लिहाज से भी अहम मानी जा रही है।

अचानकमार टाइगर रिजर्व और मध्य प्रदेश के कान्हा नेशनल पार्क के बीच स्थित यह अभयारण्य पहले से ही जैव विविधता के लिए जाना जाता रहा है, लेकिन अब संगठित सफारी संचालन शुरू होने से यह राष्ट्रीय स्तर पर एक उभरता पर्यटन केंद्र बन सकता है।

34 किलोमीटर का सफारी ट्रैक, हर मोड़ पर नया अनुभव

नया विकसित किया गया जंगल सफारी ट्रैक लगभग 34 किलोमीटर लंबा है, जिसमें पर्यटकों को प्राकृतिक सुंदरता के कई दुर्लभ दृश्य देखने को मिलेंगे। इस रूट में दुरदुरी झरना, बावापारा का 360 डिग्री व्यू प्वाइंट और सकरी नदी के विभिन्न मार्ग शामिल किए गए हैं।

घने जंगलों, पहाड़ी रास्तों और जल स्रोतों से गुजरने वाला यह ट्रैक पर्यटकों को एक सम्पूर्ण वन्यजीव और प्रकृति अनुभव देने के उद्देश्य से तैयार किया गया है। खास बात यह है कि सफारी के दौरान अलग-अलग इको-ज़ोन से गुजरते हुए पर्यटक विविध वनस्पतियों और जीव-जंतुओं को करीब से देख सकेंगे।

शुरुआत में सीमित वाहन, ऑनलाइन बुकिंग सुविधा

सफारी के शुरुआती चरण में तीन छह-सीटर वाहनों को संचालन में लगाया गया है, ताकि पर्यावरणीय संतुलन बनाए रखते हुए नियंत्रित संख्या में पर्यटकों को प्रवेश दिया जा सके।

पर्यटकों की सुविधा के लिए ऑनलाइन टिकट बुकिंग की व्यवस्था भी शुरू की गई है, जिससे यात्रा की योजना बनाना आसान हो गया है। अधिकारियों का कहना है कि मांग बढ़ने पर भविष्य में वाहनों की संख्या बढ़ाई जा सकती है, लेकिन फिलहाल प्राथमिकता संतुलित पर्यटन को दी जा रही है।

वन्यजीव गलियारे के रूप में रणनीतिक महत्व

भोरमदेव अभयारण्य केवल पर्यटन स्थल नहीं, बल्कि पारिस्थितिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण क्षेत्र भी है। यह क्षेत्र छत्तीसगढ़ के अचानकमार टाइगर रिजर्व और मध्य प्रदेश के कान्हा राष्ट्रीय उद्यान के बीच एक अहम वन्यजीव गलियारे का काम करता है।

इस गलियारे के माध्यम से वन्यजीवों की आवाजाही संभव होती है, जिससे उनकी आनुवंशिक विविधता बनी रहती है और प्रजातियों का दीर्घकालिक अस्तित्व सुनिश्चित होता है। विशेषज्ञों के अनुसार, ऐसे गलियारे किसी भी इकोसिस्टम की स्थिरता के लिए बेहद जरूरी होते हैं।

इको-टूरिज्म के तहत नई सुविधाओं की तैयारी

राज्य सरकार इस पहल को व्यापक इको-टूरिज्म मॉडल के रूप में विकसित करने की योजना बना रही है। इसके तहत आने वाले समय में इको-कॉटेज, नेचर ट्रेल्स और गाइडेड टूर जैसी सुविधाएं शुरू की जाएंगी।

इसके साथ ही स्थानीय महिला स्वयं सहायता समूहों को भी इस परियोजना से जोड़ा गया है। “वनांचल रसोई” नाम से फूड आउटलेट शुरू किए जाएंगे, जहां पर्यटकों को पारंपरिक स्थानीय व्यंजन परोसे जाएंगे।

इसके अलावा, क्षेत्रीय हस्तशिल्प को बढ़ावा देने के लिए भी विशेष प्रयास किए जा रहे हैं, जिससे पर्यटक स्थानीय संस्कृति और कला से भी जुड़ सकें।

स्थानीय रोजगार और अर्थव्यवस्था को मिलेगा बढ़ावा

इस परियोजना से लगभग 30 स्थानीय लोगों को सीधे रोजगार मिलने की संभावना है। इसके अलावा होटल, ट्रांसपोर्ट और छोटे व्यवसायों के माध्यम से अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसर भी तेजी से बढ़ेंगे।

विशेषज्ञ मानते हैं कि यदि इस मॉडल को सफलतापूर्वक लागू किया गया, तो यह ग्रामीण और वन क्षेत्रों में आर्थिक विकास का मजबूत माध्यम बन सकता है।

समृद्ध जैव विविधता का केंद्र है भोरमदेव

वर्ष 2001 में स्थापित भोरमदेव वन्यजीव अभयारण्य 352 वर्ग किलोमीटर के क्षेत्र में फैला हुआ है, जिसमें भोरमदेव और चिल्फी वन रेंज शामिल हैं।

यह क्षेत्र अपनी समृद्ध जैव विविधता के लिए जाना जाता है। यहां बाइसन (वन भैंसा), बाघ, तेंदुआ, भालू, सांभर, हिरण और नीलगाय जैसे प्रमुख वन्यजीव पाए जाते हैं।

इसके अलावा यह अभयारण्य 134 प्रजातियों की तितलियों और 126 प्रजातियों के पक्षियों का भी घर है, जो इसे प्रकृति प्रेमियों और शोधकर्ताओं के लिए एक महत्वपूर्ण स्थान बनाता है।

पर्यटन और संरक्षण के बीच संतुलन की चुनौती

हालांकि जंगल सफारी की शुरुआत से पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा, लेकिन इसके साथ पर्यावरण संरक्षण की चुनौती भी जुड़ी हुई है। अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि सभी गतिविधियां निर्धारित मानकों और दिशा-निर्देशों के तहत संचालित होंगी, ताकि वन्यजीवों और प्राकृतिक संसाधनों पर कोई नकारात्मक प्रभाव न पड़े।

नियंत्रित पर्यटक संख्या, निर्धारित रूट और प्रशिक्षित गाइड इस संतुलन को बनाए रखने में अहम भूमिका निभाएंगे।

राज्य के पर्यटन नक्शे पर उभरता नया हॉटस्पॉट

भोरमदेव जंगल सफारी की शुरुआत के साथ छत्तीसगढ़ के पर्यटन नक्शे पर एक नया और आकर्षक स्थल जुड़ गया है। यह पहल न केवल राज्य की प्राकृतिक धरोहर को सामने लाएगी, बल्कि स्थानीय समुदायों के लिए विकास के नए अवसर भी पैदा करेगी।

आने वाले समय में यदि इस परियोजना का विस्तार योजनाबद्ध तरीके से किया गया, तो भोरमदेव अभयारण्य देश के प्रमुख इको-टूरिज्म डेस्टिनेशन में शामिल हो सकता है।

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