CG News: महासमुंद में सोने की दूसरी खदान की नीलामी पूरी, 100 करोड़ से अधिक राजस्व की उम्मीद

CG News: छत्तीसगढ़ के महासमुंद जिले में खनिज संसाधनों के क्षेत्र में एक और बड़ी उपलब्धि दर्ज हुई है। जिले के करणखोल-राचपालपुर क्षेत्र में स्थित प्रदेश की दूसरी सोने की खदान की नीलामी प्रक्रिया पूरी कर ली गई है। इस खदान के खनन अधिकार दुर्ग स्थित कंपनी आरके मिनरल्स ने 50 प्रतिशत की उच्चतम बोली लगाकर हासिल किए हैं। अनुमान है कि इस परियोजना से राज्य सरकार को 100 करोड़ रुपये से अधिक का राजस्व प्राप्त होगा। इस नीलामी के साथ छत्तीसगढ़ में खनिज आधारित निवेश और औद्योगिक गतिविधियों को नई गति मिलने की संभावना जताई जा रही है। साथ ही महासमुंद और आसपास के क्षेत्रों में दुर्लभ और बहुमूल्य खनिजों की खोज भी तेज कर दी गई है। दो वर्षों में शुरू होगा वाणिज्यिक खनन कार्य

खनिज एवं खनिकर्म विभाग के अनुसार नीलामी प्रक्रिया पूरी होने के बाद अब आगे की प्रशासनिक और तकनीकी औपचारिकताएं पूरी की जाएंगी। विभागीय अधिकारियों का कहना है कि आगामी दो वर्षों के भीतर इस खदान से वाणिज्यिक स्तर पर सोना निकालने का कार्य शुरू हो सकता है। यह परियोजना न केवल राज्य की अर्थव्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण मानी जा रही है, बल्कि इससे स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर भी बढ़ने की उम्मीद है। खनन गतिविधियों के लिए आवश्यक बुनियादी ढांचे और तकनीकी तैयारियों पर भी काम किया जाएगा। 300 किलोग्राम से अधिक सोने की संभावना, विस्तृत क्षेत्र में फैला ब्लॉक भारतीय भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण (GSI) द्वारा किए गए अध्ययन में इस क्षेत्र में 300 किलोग्राम से अधिक सोने के भंडार की संभावना जताई गई है। यह खदान लगभग 150 हेक्टेयर क्षेत्र में फैली हुई है। यह छत्तीसगढ़ की दूसरी आधिकारिक सोने की खदान है जिसकी नीलामी पूरी हुई है। इससे पहले बागमहरा (सोनाखान) क्षेत्र की खदान का आवंटन वेदांता समूह को किया गया था, जहां प्रारंभिक कार्य शुरू हो चुका है। विशेषज्ञों का मानना है कि राज्य में सोने के खनन से खनिज अर्थव्यवस्था को नई दिशा मिलेगी। महासमुंद में दुर्लभ निकल और पैलेडियम का बड़ा भंडार

महासमुंद जिला केवल सोने तक सीमित नहीं है, बल्कि यहां औद्योगिक महत्व के कई दुर्लभ खनिजों की मौजूदगी भी सामने आई है। भालूकोना क्षेत्र में निकल, कॉपर और पैलेडियम जैसे महत्वपूर्ण धातुओं का बड़ा भंडार पाया गया है। डेक्कन गोल्ड माइंस को आवंटित इस ब्लॉक में अब तक लगभग 1.3 किलोमीटर क्षेत्र में खनिजों की उपस्थिति प्रमाणित हो चुकी है। 430 मीटर की गहराई तक किए गए अध्ययन में पेंटलैंडाइट, चाल्कोपायराइट और पायरोटाइट जैसे उच्च मूल्य वाले सल्फाइड अयस्क पाए गए हैं। ये खनिज आधुनिक बैटरी तकनीक, इलेक्ट्रॉनिक्स और हाई-टेक उद्योगों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण माने जाते हैं, जिससे इस क्षेत्र की रणनीतिक अहमियत और बढ़ जाती है। गरियाबंद और महासमुंद में हीरे व रत्नों की खोज तेज महासमुंद के साथ-साथ गरियाबंद जिले में भी खनिज अन्वेषण कार्यों को गति दी गई है। गरियाबंद का पायलीखंड क्षेत्र पहले से ही हीरे की संभावनाओं के लिए जाना जाता है, जहां किम्बरलाइट पाइप्स की पहचान के लिए आधुनिक तकनीक से सर्वे किया जा रहा है।

इसके अलावा महासमुंद के कुछ क्षेत्रों में अलेक्जेंड्राइट और गार्नेट जैसे कीमती रत्नों के संकेत भी मिले हैं। खनिज विभाग इन क्षेत्रों को ब्लॉक के रूप में विकसित कर नीलामी की तैयारी कर रहा है, जिससे आने वाले वर्षों में राज्य के राजस्व में उल्लेखनीय वृद्धि की उम्मीद है। राज्य की खनिज अर्थव्यवस्था को नई दिशा छत्तीसगढ़ सरकार की खनिज नीति के तहत लगातार नए ब्लॉकों की पहचान और नीलामी की प्रक्रिया चल रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि सोना, हीरा और दुर्लभ धातुओं की खोज राज्य को देश के प्रमुख खनिज उत्पादक क्षेत्रों में शामिल कर सकती है। छत्तीसगढ़ की हर अपडेट के लिए हमारे WhatsApp चैनल को फॉलो करें- https://whatsapp.com/channel/0029VbBj50DATRSgaSxCmo2v