CG Breaking News: भूपेश बघेल के पूर्व PA के घर ED की रेड, दुर्ग में पूर्व पटवारी के ठिकाने पर भी जांच, CGPSC केस में 7 जगह कार्रवाई

CG Breaking News: छत्तीसगढ़ में CGPSC भर्ती घोटाले से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने मंगलवार को प्रदेश में 7 ठिकानों पर कार्रवाई की है। दुर्ग जिले में दो स्थानों पर ED की टीमें जांच कर रही हैं। इनमें पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के PA रहे केके चंद्रवंशी और पूर्व पटवारी कमलेश सिंह राजपूत के घर शामिल हैं। दोनों जगह सुबह से दस्तावेजों और अन्य सामग्री की जांच की जा रही है। कार्रवाई के दौरान संबंधित परिसरों के बाहर पुलिस बल भी तैनात किया गया है।

सुबह 6 बजे पहुंची ED की टीम

भिलाई में केके चंद्रवंशी के घर ED की टीम सुबह करीब 6 बजे पहुंची। अधिकारियों की टीम 2-3 गाड़ियों से मौके पर पहुंची और घर के अंदर जांच शुरू की। टीम दस्तावेजों के साथ अन्य जरूरी सामान और रिकॉर्ड की भी जांच कर रही है।

कार्रवाई के दौरान घर के बाहर सुरक्षा के लिए पुलिस बल तैनात किया गया है। ED की टीम फिलहाल घर के अंदर मौजूद दस्तावेजों और अन्य सामग्री को खंगाल रही है।

केके चंद्रवंशी पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के PA रह चुके हैं। CGPSC भर्ती मामले में जांच आगे बढ़ने के बीच उनके ठिकाने पर ED की कार्रवाई को महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

पूर्व पटवारी के घर भी छापेमारी

दुर्ग के सिकोला भाठा की बंगाली कॉलोनी स्थित कमलेश सिंह राजपूत के घर पर भी ED की टीम सुबह से जांच कर रही है। जानकारी के मुताबिक, करीब 8 अधिकारी दो गाड़ियों से उनके घर पहुंचे।

कमलेश राजपूत पटवारी संघ के प्रदेश पदाधिकारी भी रह चुके हैं। ED की जांच में उनके परिवार के सदस्यों की सरकारी पदों पर हुई नियुक्तियों से जुड़े पहलुओं को भी खंगाले जाने की जानकारी सामने आई है।

बताया गया है कि उनकी दो बेटियां पटवारी, एक बेटी उपपंजीयक और बेटा नायब तहसीलदार के पद पर हैं। हालांकि, इन नियुक्तियों को लेकर ED की ओर से फिलहाल कोई विस्तृत आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है।

सोनवानी की गिरफ्तारी के बाद कार्रवाई

CGPSC मामले में ED की यह कार्रवाई पूर्व CGPSC चेयरमैन टामन सिंह सोनवानी की गिरफ्तारी के बाद हुई है। उन्हें 25 जुलाई को प्रश्नपत्र लीक और कथित भर्ती अनियमितताओं से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में गिरफ्तार किया गया था।

यह जांच CGPSC की वर्ष 2020 और 2021 की राज्य सेवा परीक्षाओं में कथित प्रश्नपत्र लीक और भर्ती प्रक्रिया में गड़बड़ी के आरोपों से जुड़ी है। ED ने 2024 में CBI की ओर से दर्ज FIR के आधार पर मनी लॉन्ड्रिंग की जांच शुरू की थी।

जांच एजेंसी का आरोप है कि परीक्षा से जुड़े प्रश्नपत्रों को कथित तौर पर लीक कराने और चयन प्रक्रिया में हेरफेर करने में मदद की गई। इसके बदले अवैध लेन-देन किए जाने और उसका फायदा रिश्तेदारों तथा कथित तौर पर पैसे देने वाले उम्मीदवारों को मिलने का आरोप है।

डिप्टी कलेक्टर-DSP चयन पर आरोप

CGPSC मामले की जांच में CBI पहले भी पूर्व चेयरमैन टामन सिंह सोनवानी को गिरफ्तार कर चुकी है। उनके साथ बजरंग पावर एंड इस्पात लिमिटेड के डायरेक्टर श्रवण कुमार गोयल की गिरफ्तारी भी हुई थी।

CBI की जांच के मुताबिक, CGPSC की भर्ती प्रक्रिया में कथित तौर पर अनियमितताएं की गईं। एजेंसी ने प्रभावशाली लोगों के रिश्तेदारों को डिप्टी कलेक्टर, DSP सहित अन्य पदों पर चयनित कराने के लिए कथित अवैध लेन-देन के आरोप लगाए हैं।

मामले में जांच एजेंसियां परीक्षा प्रक्रिया, अभ्यर्थियों के चयन और इससे जुड़े आर्थिक लेन-देन की कड़ियों की जांच कर रही हैं।

लीक पेपर से चयन का आरोप

CBI की जांच में यह भी आरोप लगाया गया है कि परीक्षा का प्रश्नपत्र कथित तौर पर कुछ लोगों तक पहले पहुंचा था। जांच एजेंसी के अनुसार, टामन सिंह सोनवानी ने प्रश्नपत्र अपने घर पर साहिल, नीतेश, उसकी पत्नी निशा कोसले और दीपा आडिल को दिया था।

इसके बाद उप परीक्षा नियंत्रक ललित गणवीर द्वारा कथित तौर पर लीक हुआ पेपर बजरंग पावर एंड इस्पात के डायरेक्टर श्रवण गोयल तक पहुंचाए जाने का आरोप है। जांच एजेंसी के मुताबिक, श्रवण गोयल के बेटे शशांक और बहू भूमिका ने कथित तौर पर इसी पेपर से तैयारी की और बाद में दोनों का चयन डिप्टी कलेक्टर पद पर हुआ।

इन आरोपों को लेकर जांच एजेंसियां दस्तावेजों और अन्य साक्ष्यों के आधार पर मामले की कड़ियां जोड़ रही हैं।

18 रिश्तेदारों के चयन का आरोप

CBI ने जांच के दौरान CGPSC में हुई भर्ती को लेकर कई गंभीर आरोप लगाए हैं। एजेंसी के मुताबिक, टामन सिंह सोनवानी के कार्यकाल में उनके करीबी रिश्तेदारों के अलावा कांग्रेस नेताओं और अधिकारियों से जुड़े करीब 18 रिश्तेदारों के चयन में कथित अनियमितताएं हुईं।

जांच एजेंसियों ने परीक्षा, इंटरव्यू और अंतिम चयन प्रक्रिया से जुड़े रिकॉर्ड को भी जांच के दायरे में लिया है। इसी मामले में अलग-अलग स्तर पर जांच और कार्रवाई आगे बढ़ रही है।

171 पदों के लिए हुई थी परीक्षा

CGPSC राज्य सेवा परीक्षा 2021 में कुल 171 पदों के लिए भर्ती प्रक्रिया आयोजित की गई थी। प्रारंभिक परीक्षा 13 फरवरी 2022 को हुई थी। इसमें 2,565 अभ्यर्थी मुख्य परीक्षा के लिए चयनित हुए थे।

इसके बाद 26, 27, 28 और 29 मई 2022 को मुख्य परीक्षा आयोजित की गई। इसमें 509 अभ्यर्थी सफल हुए थे। इंटरव्यू की प्रक्रिया पूरी होने के बाद 11 मई 2023 को 170 अभ्यर्थियों की चयन सूची जारी की गई थी।

भर्ती प्रक्रिया में कथित गड़बड़ी के आरोप सामने आने के बाद यह मामला जांच एजेंसियों तक पहुंचा और अब ED की मनी लॉन्ड्रिंग जांच के तहत प्रदेश के अलग-अलग ठिकानों पर कार्रवाई जारी है। छत्तीसगढ़ की हर अपडेट के लिए हमारे WhatsApp चैनल को फॉलो करें- https://whatsapp.com/channel/0029VbBj50DATRSgaSxCmo2v