BRICS Summit: BRICS समिट के दूसरे दिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने टेक्नोलॉजी और जरूरी मिनरल्स को हथियार की तरह इस्तेमाल करने पर आपत्ति जताई। उन्होंने कहा कि टेक्नोलॉजी और महत्वपूर्ण खनिजों का इस्तेमाल हथियार के रूप में करना गलत है और इसका असर दुनिया की तरक्की पर पड़ सकता है। प्रधानमंत्री ने BRICS देशों के बीच सहयोग बढ़ाने और मजबूत सप्लाई चेन तैयार करने पर जोर दिया।
समिट के दूसरे दिन कार्यक्रम की शुरुआत भारत मंडपम में सदस्य देशों के नेताओं के ग्रुप फोटो सेशन के साथ हुई। इस दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दोनों ओर चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग और रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन नजर आए। तीनों नेताओं की यह तस्वीर BRICS समिट के प्रमुख दृश्यों में शामिल रही।
अपने संबोधन में प्रधानमंत्री मोदी ने दुनिया के देशों की आपसी निर्भरता का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि महामारी, जलवायु आपदाओं और सप्लाई चेन में आई रुकावटों ने यह स्पष्ट किया है कि दुनिया के देश एक-दूसरे से जुड़े हुए हैं। किसी एक स्थान पर उत्पन्न होने वाला संकट दूसरे देशों को भी प्रभावित कर सकता है।
प्रधानमंत्री ने BRICS देशों के बीच आपसी सहयोग को और मजबूत करने की आवश्यकता बताई। उन्होंने विशेष रूप से ऐसी सप्लाई चेन तैयार करने पर जोर दिया, जो वैश्विक परिस्थितियों में आने वाली बाधाओं के बावजूद बेहतर तरीके से काम कर सके। उनके मुताबिक देशों के बीच सहयोग बढ़ाना वैश्विक विकास के लिए महत्वपूर्ण है।
BRICS समिट के दौरान भारत समेत सदस्य देशों के नेताओं के बीच विभिन्न मुद्दों पर चर्चा हुई। समिट के पहले दिन नेताओं के लिए डिनर का आयोजन भी किया गया था। इसमें चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग और अबू धाबी के क्राउन प्रिंस को छोड़कर अन्य विश्व नेता शामिल हुए।
अबू धाबी के क्राउन प्रिंस शेख खालिद बिन मोहम्मद समिट में शामिल होने के बाद अपने देश लौट गए थे। वहीं PTI ने सूत्रों के हवाले से बताया कि चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग आराम करने के लिए अपने होटल लौट गए थे।
समिट के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सात देशों के नेताओं के साथ अलग-अलग द्विपक्षीय बैठकें भी प्रस्तावित हैं। इन बैठकों में विभिन्न द्विपक्षीय और अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर चर्चा की जानी है।
BRICS समिट में सदस्य देशों ने शनिवार को नई दिल्ली डेक्लरेशन को भी मंजूरी दी। इसमें कई अंतरराष्ट्रीय और साझा हित से जुड़े मुद्दों पर सदस्य देशों की ओर से साझा बयान जारी किया गया।
नई दिल्ली डेक्लरेशन में रूस और चीन समेत BRICS देशों ने पहलगाम आतंकी हमले की निंदा की। साझा बयान में आतंकवाद से निपटने और आतंकियों को पनाह देने वालों के खिलाफ मिलकर कार्रवाई करने की बात कही गई। इसके साथ ही आतंकियों तक पहुंचने वाली फंडिंग रोकने और उन्हें सुरक्षित ठिकाने उपलब्ध कराने वालों के खिलाफ कार्रवाई पर भी सहमति जताई गई।
BRICS देशों की ओर से संयुक्त बयान पर सहमति ऐसे समय में बनी है, जब पश्चिम एशिया में तनाव की स्थिति बनी हुई है। ईरान, सऊदी अरब और UAE जैसे देशों के कई मुद्दों पर अलग-अलग रुख हैं। इसके बावजूद BRICS मंच पर साझा घोषणा को मंजूरी दी गई।
समिट के दूसरे दिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संबोधन में टेक्नोलॉजी, जरूरी मिनरल्स और सप्लाई चेन से जुड़े मुद्दे प्रमुख रहे। उन्होंने वैश्विक संकटों से मिले अनुभवों का उल्लेख करते हुए देशों के बीच सहयोग को मजबूत करने की जरूरत बताई। वहीं BRICS की साझा घोषणा में आतंकवाद के खिलाफ सहयोग और पहलगाम हमले की निंदा को भी शामिल किया गया।
BRICS समिट के दौरान नेताओं की बैठकों और साझा घोषणाओं के बीच प्रधानमंत्री मोदी का टेक्नोलॉजी और मिनरल्स को हथियार की तरह इस्तेमाल न करने का संदेश भी प्रमुख रहा। उन्होंने वैश्विक सप्लाई चेन को मजबूत बनाने और BRICS देशों के बीच सहयोग बढ़ाने पर जोर दिया।
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