Raigarh News: ‘मेरा रेशम, मेरा अभियान 2.0’ से टसर किसानों को नई दिशा, 300 हितग्राहियों ने लिया प्रशिक्षण

Raigarh News: राष्ट्रीय अभियान मेरा रेशम, मेरा अभियान 2.0’ के तहत रायगढ़ जिले में टसर रेशम उत्पादन से जुड़े किसानों और हितग्राहियों के लिए जागरूकता, प्रशिक्षण एवं टसर रोग प्रबंधन कार्यशाला का आयोजन किया गया। 2 से 3 सितंबर 2026 तक जिले के विभिन्न टसर रेशम केंद्रों में आयोजित कार्यक्रमों में करीब 300 हितग्राही, जिनमें महिला स्व-सहायता समूह, टसर कृमिपालक और सिल्क समग्र योजना के हितग्राही शामिल रहे, ने प्रशिक्षण लिया।

अभियान का मुख्य उद्देश्य टसर रेशम उत्पादन से जुड़े किसानों को वैज्ञानिक तरीके से उन्नत बीज का उपयोग कर कृमिपालन करने, रोग प्रबंधन अपनाने और अंतरफसल के माध्यम से अतिरिक्त आय अर्जित करने के लिए प्रोत्साहित करना रहा। प्रशिक्षण के दौरान किसानों को क्लस्टर आधारित खेती की तकनीक और टसर उत्पादन को बेहतर बनाने के व्यावहारिक तरीकों की जानकारी दी गई।

कार्यक्रम के दौरान रेशम केंद्र सम्बलपुरी में केंद्रीय रेशम बोर्ड के वैज्ञानिक वाई.एस. श्रीनाथ, रायगढ़ रेशम विभाग के उप संचालक मनीष पवार, फील्ड ऑफिसर रेशम राम खिलावन करियाम, वरिष्ठ रेशम निरीक्षक विकास पटेल, कनिष्ठ रेशम निरीक्षक चन्द्रिका प्रसाद श्रीवास सहित विभागीय कर्मचारियों का सहयोग रहा।

अभियान के तहत रेशम केंद्र सम्बलपुरी, बंगुरसिया, टसर परियोजना केंद्र जुर्डा, कोटरापाली और सुकुलभठली से जुड़े कृषकों के साथ सीधा संवाद किया गया। इस दौरान किसानों की समस्याओं, उनके अनुभवों और टसर उत्पादन से संबंधित चुनौतियों पर चर्चा करते हुए उन्हें वैज्ञानिक पद्धतियों की जानकारी दी गई।

प्रशिक्षण में रोग प्रबंधन को विशेष महत्व दिया गया। केंद्रीय रेशम बोर्ड के वैज्ञानिक वाई.एस. श्रीनाथ ने मलबरी रोग प्रबंधन तकनीक के संबंध में जानकारी दी। वहीं चाकी कीटपालन और रोग प्रबंधन को लेकर भी जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया। किसानों को सेनीटेक के उपयोग की व्यवहारिक जानकारी देते हुए रोगों की रोकथाम के लिए आवश्यक सावधानियों के बारे में बताया गया।

टसर कृमिपालन के दौरान होने वाली ग्रेसरी बीमारी से बचाव को लेकर भी किसानों से विस्तार से संवाद किया गया। ग्राम हाटी, मुनुन्द, बेहरामार और जोगड़ा के कृषकों को ग्रेसरी बीमारी की रोकथाम, उन्नत बीज प्रबंधन और क्लस्टर आधारित खेती के संबंध में व्यवहारिक जानकारी दी गई।

प्रशिक्षण के दौरान किसानों को यह भी बताया गया कि जिन क्षेत्रों में वर्तमान में टसर उत्पादन प्रभावी नहीं है, वहां नए पौधरोपण के माध्यम से उत्पादन क्षेत्र का विस्तार किया जा सकता है। इसके साथ ही अंतरफसल को अपनाकर किसान एक ही कृषि क्षेत्र से अतिरिक्त आय प्राप्त कर सकते हैं। अंतरफसल के लिए पौधरोपण की तकनीक, फसलों के चयन और इससे संभावित अतिरिक्त आय को लेकर भी किसानों के साथ विस्तृत चर्चा की गई।

अभियान के दौरान किसानों के सुझावों और उनके अनुभवों को भी महत्व दिया गया। विभाग की ओर से कहा गया कि किसानों द्वारा दिए गए सुझावों को आगामी कार्ययोजना में शामिल किया जाएगा और उनके आधार पर टसर रेशम उत्पादन को बढ़ाने के लिए प्रयास किए जाएंगे।

‘मेरा रेशम, मेरा अभियान 2.0’ के माध्यम से किसानों को वैज्ञानिक तकनीक, उन्नत बीज, रोग प्रबंधन, क्लस्टर आधारित खेती और अंतरफसल जैसी पद्धतियों से जोड़ने पर जोर दिया गया। विभाग का उद्देश्य टसर रेशम उत्पादन को अधिक प्रभावी बनाने के साथ किसानों की आजीविका और आय के अवसरों को बढ़ाना है। छत्तीसगढ़ की हर अपडेट के लिए हमारे WhatsApp चैनल को फॉलो करें- https://whatsapp.com/channel/0029VbBj50DATRSgaSxCmo2v