Shri Krishna Janmashtami: श्रीकृष्ण जन्माष्टमी के अवसर पर रायपुर स्थित श्री राधा रास बिहारी मंदिर में श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ रही है। भगवान श्रीकृष्ण और राधारानी के दर्शन के लिए बड़ी संख्या में भक्त मंदिर पहुंच रहे हैं। जन्माष्टमी के विशेष अवसर पर राधारानी का श्रृंगार मुंबई और वृंदावन से मंगाई गई विशेष पोशाक और आभूषणों से किया गया है। वहीं, मंदिर परिसर को कोलकाता और बेंगलुरु से मंगाए गए फूलों से सजाया गया है। फूलों की सजावट और विशेष श्रृंगार के कारण मंदिर परिसर का वातावरण भक्तिमय नजर आ रहा है।
रायपुर का यह इस्कॉन मंदिर अपनी भव्य संरचना और निर्माण शैली के कारण भी विशेष पहचान रखता है। मंदिर के निर्माण में करीब 51 करोड़ रुपए की लागत आने की जानकारी दी गई है। मंदिर निर्माण में इसकी मजबूती का विशेष ध्यान रखा गया है। मंदिर की नींव और स्ट्रक्चर की L&T कंपनी से टेस्टिंग कराई गई थी। टेस्टिंग रिपोर्ट में नींव और स्ट्रक्चर को बेहद मजबूत बताया गया। मंदिर की नींव पाइल फाउंडेशन सिस्टम के जरिए तैयार की गई है।
मंदिर निर्माण की प्रक्रिया आसान नहीं थी। रायपुर इस्कॉन मंदिर के वाइस प्रेसिडेंट जनार्दन दास के मुताबिक, जिस जमीन पर मंदिर का निर्माण किया गया, वहां पहले काली मिट्टी का खेत था। काली मिट्टी वाली जमीन पर इतनी बड़ी संरचना खड़ी करना चुनौतीपूर्ण था। मंदिर की नींव को मजबूत बनाने के लिए सबसे पहले काली मिट्टी को हटाने का काम किया गया। यह प्रक्रिया तब तक जारी रही, जब तक जमीन के नीचे पत्थर नहीं मिला। इसके बाद पाइल फाउंडेशन सिस्टम के माध्यम से मंदिर की नींव तैयार की गई।
मंदिर की संरचना को लेकर भी कई विशेषताएं बताई गई हैं। जनार्दन दास के मुताबिक, मंदिर के सभी शिखरों का निर्माण शास्त्रों के अनुसार किया गया है। मंदिर के सभी शिखर अष्टकोणीय बनाए गए हैं। प्रत्येक शिखर पर कलश लगाया गया है। इन कलशों के निर्माण में करीब 1.25 किलो सोने का उपयोग किए जाने की जानकारी दी गई है।
मंदिर के निर्माण में इस्तेमाल किया गया संगमरमर भी विशेष रूप से मंगाया गया है। मंदिर में लगाए गए संगमरमर के पत्थर राजस्थान के मकराना से मंगाए गए हैं। इससे मंदिर की भव्यता और पारंपरिक स्वरूप को और विशेष रूप दिया गया है।
मंदिर के अंदर और बाहर प्रकाश व्यवस्था पर भी विशेष ध्यान दिया गया है। मंदिर के डिजाइनर अपूर्व वैद्य के अनुसार मंदिर में कुल 265 लाइट्स लगाई गई हैं। इन लाइट्स के जरिए मंदिर के अंदर और बाहरी हिस्से को रोशन किया जाता है। मंदिर के सेंट्रल हॉल में बने स्तंभ भी विशेष आकर्षण का केंद्र हैं। प्रत्येक स्तंभ पर करीब 10 फीट तक विशेष नक्काशी की गई है। इनमें से कुछ स्तंभों पर इस्कॉन से जुड़े लोगों की आकृतियां भी उकेरी गई हैं।
मंदिर में प्रतिदिन पूजा-अर्चना की नियमित व्यवस्था है। यहां रोजाना छह बार आरती और छह बार भगवान को भोग लगाया जाता है। दिन की शुरुआत सुबह 4:30 बजे मंगल आरती से होती है। इसके बाद सुबह 5 बजे तुलसी आरती होती है। सुबह 8:30 बजे श्रृंगार दर्शन और धूप आरती होती है। दोपहर 4:15 बजे उद्यापन आरती, शाम 7 बजे संध्या आरती और रात 8:30 बजे शयन आरती होती है।
जन्माष्टमी के अवसर पर मंदिर में विशेष आयोजन किए जा रहे हैं। 4 सितंबर को सुबह से देर रात तक विभिन्न धार्मिक और सांस्कृतिक कार्यक्रम होंगे। भगवान श्रीकृष्ण की बाल लीलाओं का गुणगान, भजन-कीर्तन, कथक नृत्य, महाभिषेक और महाआरती जैसे कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे।
कार्यक्रम की शुरुआत सुबह 10:30 बजे से दोपहर 12:30 बजे तक होने वाले भजन-कीर्तन से होगी। दोपहर 12 बजे भगवान को राजभोग अर्पित किया जाएगा। इसके बाद दोपहर 12:30 बजे राजभोग आरती होगी।
शाम 5 बजे से 7 बजे तक श्रीकृष्ण पुष्पांजलि कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा। इसी दौरान रवि प्रकाश कथक नृत्य की प्रस्तुति देंगे। शाम 7 बजे संध्या आरती होगी। जन्माष्टमी के विशेष अवसर पर मंदिर में भक्तिमय वातावरण के बीच श्रद्धालु धार्मिक कार्यक्रमों में शामिल होंगे।
रात के समय जन्माष्टमी का मुख्य आयोजन होगा। रात 9 बजे से 11:30 बजे तक भगवान श्रीकृष्ण का महाभिषेक किया जाएगा। इसके बाद मध्यरात्रि में भगवान को छप्पन भोग अर्पित किया जाएगा। रात 12:15 बजे महाआरती होगी। जन्माष्टमी के मुख्य आयोजन के दौरान मंदिर में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के पहुंचने की तैयारी है।
श्रद्धालुओं के लिए दर्शन और प्रसाद की भी विशेष व्यवस्था की गई है। मंदिर में सुबह 10 बजे से रात 2 बजे तक प्रसाद वितरण किया जाएगा। सुबह 11 बजे से हरिनाम संकीर्तन चलता रहेगा। श्रद्धालु सुबह 9 बजे से रात 2 बजे तक भगवान के दर्शन कर सकेंगे।
जन्माष्टमी के अवसर पर शाम 7 बजे से हर घंटे आरती की व्यवस्था भी की गई है। इससे श्रद्धालुओं को अलग-अलग समय पर आरती में शामिल होने का अवसर मिलेगा। मंदिर परिसर में विशेष सजावट, फूलों की खुशबू और धार्मिक कार्यक्रमों के कारण पूरे दिन भक्तिमय माहौल बना रहेगा।
श्री राधा रास बिहारी मंदिर में जन्माष्टमी के अवसर पर राधारानी का विशेष श्रृंगार, मंदिर की फूलों से सजावट और भगवान श्रीकृष्ण के महाभिषेक सहित कई आयोजन श्रद्धालुओं के लिए आकर्षण का केंद्र बने हुए हैं। मंदिर की भव्य संरचना, अष्टकोणीय शिखर, स्वर्ण कलश, मकराना के संगमरमर और विशेष प्रकाश व्यवस्था इसे रायपुर के प्रमुख धार्मिक स्थलों में विशेष पहचान देती है। जन्माष्टमी की मध्यरात्रि में महाआरती के साथ भगवान श्रीकृष्ण के जन्मोत्सव का मुख्य आयोजन संपन्न होगा। छत्तीसगढ़ की हर अपडेट के लिए हमारे WhatsApp चैनल को फॉलो करें- https://whatsapp.com/channel/0029VbBj50DATRSgaSxCmo2v




