Raigarh News: जिले में स्वास्थ्य सेवाओं को सुरक्षित और सुलभ बनाने के लिए स्वास्थ्य विभाग द्वारा ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में संचालित चिकित्सा गतिविधियों की निगरानी की जा रही है। कलेक्टर मयंक चतुर्वेदी के दिशा-निर्देशन और मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. अनिल कुमार जगत के मार्गदर्शन में बिना वैध अनुज्ञा के संचालित क्लीनिकों तथा बिना अनुमति चिकित्सा कार्य करने वाले लोगों के खिलाफ निरीक्षण और कार्रवाई की प्रक्रिया जारी है। विभाग की ओर से ऐसे मामलों की शिकायत मिलने पर संबंधित व्यक्तियों के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई किए जाने की जानकारी दी गई है।
स्वास्थ्य विभाग के अनुसार जिले के विभिन्न ग्रामीण एवं शहरी क्षेत्रों में अवैध रूप से संचालित क्लीनिकों की जांच की जा रही है। इसके साथ ही ऐसे लोगों की गतिविधियों की भी निगरानी की जा रही है, जो बिना वैध अनुज्ञा के लोगों का उपचार कर रहे हैं या चिकित्सा अथवा शल्य चिकित्सा से संबंधित कार्य कर रहे हैं। विभाग ने स्पष्ट किया है कि बिना वैध अनुमति के चिकित्सा कार्य करने वालों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
विभाग की ओर से बताया गया कि अवैध चिकित्सा गतिविधियों से जुड़े मामलों में निरीक्षण की प्रक्रिया लगातार जारी है। शिकायत प्राप्त होने पर संबंधित स्थान की जांच की जाती है और नियमों के उल्लंघन की स्थिति में कार्रवाई की जाती है। स्वास्थ्य विभाग ने कहा है कि यह अभियान आगे भी जारी रहेगा और बिना वैध अनुज्ञा के चिकित्सा कार्य करने वाले लोगों के विरुद्ध आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।
स्वास्थ्य विभाग ने आम नागरिकों से अपील की है कि बीमारी की स्थिति में बिना वैध अनुमति चिकित्सा कार्य करने वाले लोगों या झोलाछाप डॉक्टरों से उपचार कराने से बचें। नागरिक निकटतम शासकीय प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र या पंजीकृत चिकित्सक से ही उपचार कराने की सलाह दी गई है। विभाग के अनुसार पंजीकृत स्वास्थ्य संस्थानों और चिकित्सकों के माध्यम से जांच एवं उपचार की उचित व्यवस्था सुनिश्चित की जा सकती है।
विभाग ने नागरिकों से यह भी कहा है कि उपचार कराने से पहले चिकित्सक की वैधता और पंजीयन से संबंधित जानकारी पर ध्यान दिया जाए। बिना वैध अनुमति के चिकित्सा कार्य करने वाले किसी व्यक्ति की जानकारी मिलने पर इसकी सूचना स्वास्थ्य विभाग को दी जा सकती है, ताकि संबंधित मामले की जांच कर आवश्यक कार्रवाई की जा सके।
इसी बीच जिले में आम लोगों को किफायती दरों पर दवाइयां उपलब्ध कराने के उद्देश्य से जनऔषधि केंद्रों के संचालन की जानकारी भी स्वास्थ्य विभाग की ओर से दी गई है। जिले के लगभग सभी विकासखंडों में जनऔषधि केंद्र संचालित किए जा रहे हैं। इन केंद्रों के माध्यम से विभिन्न प्रकार की जेनेरिक दवाइयां आम नागरिकों को उपलब्ध कराई जा रही हैं।
स्वास्थ्य विभाग के अनुसार जनऔषधि केंद्रों में उपलब्ध कई दवाइयां सामान्य बाजार में मिलने वाली ब्रांडेड दवाइयों की तुलना में कम कीमत पर उपलब्ध हैं। कुछ दवाइयों की कीमत ब्रांडेड दवाओं की तुलना में लगभग 70 प्रतिशत तक कम बताई गई है। इसका उद्देश्य आवश्यक दवाइयों की खरीद पर लोगों के खर्च को कम करना और किफायती दर पर दवाइयां उपलब्ध कराना है।
जनऔषधि केंद्रों के माध्यम से उपलब्ध कराई जा रही जेनेरिक दवाइयों को निर्धारित गुणवत्ता और प्रभावशीलता के मानकों के अनुरूप बताया गया है। स्वास्थ्य विभाग के अनुसार इन दवाओं का उद्देश्य लोगों को आवश्यक औषधियां किफायती दर पर उपलब्ध कराना है। इससे उपचार के दौरान दवाइयों पर होने वाले आर्थिक खर्च को कम करने में मदद मिल सकती है।
जिले के ग्रामीण और दूर-दराज के क्षेत्रों में जनऔषधि केंद्रों की उपलब्धता को लेकर भी स्वास्थ्य विभाग की ओर से जानकारी दी गई है। इन केंद्रों के माध्यम से लोगों को आवश्यक दवाइयां स्थानीय स्तर पर उपलब्ध कराने का प्रयास किया जा रहा है। जनऔषधि केंद्रों में विभिन्न बीमारियों के उपचार में उपयोग होने वाली जेनेरिक दवाइयां उपलब्ध होने की जानकारी दी गई है।
स्वास्थ्य विभाग ने नागरिकों से दवाइयों का सेवन चिकित्सक की सलाह के अनुसार करने की अपील की है। विभाग ने कहा है कि यदि किसी महंगी दवा के स्थान पर गुणवत्तापूर्ण जेनेरिक दवा उपलब्ध है तो उसके संबंध में चिकित्सक या फार्मासिस्ट से जानकारी ली जा सकती है। दवा की कीमत के साथ उसके उपयोग और चिकित्सकीय आवश्यकता की जानकारी भी लेना जरूरी बताया गया है।
स्वास्थ्य विभाग ने लोगों से अपील की है कि किसी भी बीमारी में स्वयं उपचार करने के बजाय पंजीकृत चिकित्सक से परामर्श लिया जाए। विभाग के अनुसार बीमारी की सही जांच और उचित उपचार के लिए योग्य एवं पंजीकृत चिकित्सक से संपर्क करना जरूरी है। ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं की निगरानी के साथ विभाग द्वारा लोगों को सुरक्षित उपचार के संबंध में जागरूक करने का कार्य भी किया जा रहा है।
जिले में अवैध क्लीनिकों और बिना वैध अनुज्ञा चिकित्सा कार्य करने वालों के खिलाफ निरीक्षण और कार्रवाई की प्रक्रिया को लगातार जारी रखने की बात कही गई है। स्वास्थ्य विभाग को प्राप्त शिकायतों के आधार पर संबंधित स्थानों की जांच की जा रही है। नियमों का उल्लंघन पाए जाने पर संबंधितों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
स्वास्थ्य विभाग ने नागरिकों से अपील की है कि यदि उनके क्षेत्र में कोई व्यक्ति बिना वैध अनुमति के चिकित्सा कार्य कर रहा है या अवैध रूप से क्लीनिक संचालित कर रहा है तो इसकी जानकारी विभाग को उपलब्ध कराएं। शिकायत के आधार पर विभाग द्वारा आवश्यक जांच और कार्रवाई की जाएगी।
वहीं, जनऔषधि केंद्रों में उपलब्ध कम कीमत वाली जेनेरिक दवाइयों की जानकारी भी आम लोगों तक पहुंचाने पर जोर दिया जा रहा है। स्वास्थ्य विभाग के अनुसार इन केंद्रों के माध्यम से बाजार मूल्य की तुलना में कम कीमत पर दवाइयां उपलब्ध होने से जरूरतमंद लोगों को उपचार के दौरान दवाइयों के खर्च में राहत मिल सकती है।
कलेक्टर मयंक चतुर्वेदी के दिशा-निर्देशन और मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. अनिल कुमार जगत के मार्गदर्शन में जिले में स्वास्थ्य सेवाओं से संबंधित निगरानी और कार्रवाई की प्रक्रिया जारी है। विभाग ने अवैध चिकित्सा गतिविधियों पर निरीक्षण आगे भी जारी रखने की बात कही है। साथ ही नागरिकों से सुरक्षित उपचार के लिए शासकीय स्वास्थ्य केंद्रों अथवा पंजीकृत चिकित्सकों से संपर्क करने और जनऔषधि केंद्रों से उपलब्ध किफायती जेनेरिक दवाइयों के संबंध में चिकित्सक या फार्मासिस्ट से जानकारी लेने की अपील की गई है। छत्तीसगढ़ की हर अपडेट के लिए हमारे WhatsApp चैनल को फॉलो करें- https://whatsapp.com/channel/0029VbBj50DATRSgaSxCmo2v




