Raigarh News: छत्तीसगढ़ में समान नागरिक संहिता (UCC) लागू किए जाने की घोषणा के बाद इसके संभावित प्रभावों को लेकर आदिवासी समाज में चर्चा तेज हो गई है। इसी कड़ी में रविवार को रायगढ़ स्थित पंचायती धर्मशाला में सर्व आदिवासी समाज की अति-आवश्यक महाबैठक आयोजित की गई। बैठक में रायगढ़ सहित कई जिलों से समाज प्रमुख, बुद्धिजीवी, युवा और महिला प्रकोष्ठ के पदाधिकारी शामिल हुए।
बैठक में सर्व आदिवासी समाज के कार्यकारी प्रदेश अध्यक्ष एवं पूर्व उप संचालक बी. एस. रावटे मुख्य रूप से उपस्थित रहे। रायगढ़, जशपुर, सारंगढ़-बिलाईगढ़, सक्ती, जांजगीर-चांपा और कोरबा जिले से पहुंचे सैकड़ों सामाजिक प्रतिनिधियों ने UCC के संभावित प्रभावों और आदिवासी समाज के संवैधानिक एवं पारंपरिक अधिकारों को लेकर अपने विचार रखे।
बैठक में संविधान की पांचवीं अनुसूची के तहत आदिवासियों को प्राप्त अधिकारों के साथ-साथ रूढ़िजन्य परंपराओं, रीति-रिवाजों, विवाह संस्कार, दत्तक प्रथा, तलाक, उत्तराधिकार और जमीन के बंटवारे जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर विस्तार से चर्चा की गई।
कार्यकारी प्रदेश अध्यक्ष बी. एस. रावटे ने कहा कि समान नागरिक संहिता लागू होने से आदिवासी समाज की सदियों पुरानी रूढ़िजन्य परंपराओं और सामाजिक व्यवस्था पर प्रभाव पड़ सकता है। उन्होंने कहा कि समाज की पारंपरिक व्यवस्था और संवैधानिक अधिकारों की सुरक्षा को लेकर समाज के सभी संगठनों को एकजुट होकर अपनी बात सरकार तक पहुंचानी होगी।
बैठक में मौजूद समाज प्रमुखों ने आदिवासी समाज के पारंपरिक अधिकारों और सांस्कृतिक पहचान की सुरक्षा को लेकर राज्य सरकार को ठोस सुझाव एवं आपत्तियां भेजने पर सहमति जताई। इसके साथ ही भविष्य में समाज की ओर से अपनाई जाने वाली रणनीति पर भी चर्चा की गई।
बैठक के अंतिम चरण में सर्व आदिवासी समाज के संगठन को मजबूत करने और विभिन्न जिलों में संगठन के विस्तार को लेकर भी विचार-विमर्श हुआ। जिलाध्यक्ष बी. एस. नागेश ने दूर-दराज के जिलों से पहुंचे सभी सामाजिक प्रमुखों, सगाजनों और प्रबुद्धजनों का आभार व्यक्त किया।
उन्होंने कहा कि आदिवासी समाज अपने जल, जंगल, जमीन और रूढ़िजन्य परंपराओं की रक्षा के लिए एकजुट है और समाज के हितों से जुड़े मुद्दों को मजबूती से उठाया जाता रहेगा। छत्तीसगढ़ की हर अपडेट के लिए हमारे WhatsApp चैनल को फॉलो करें- https://whatsapp.com/channel/0029VbBj50DATRSgaSxCmo2v




