Bastar News: चित्रकोट-तीरथगढ़ में उमड़ी पर्यटकों की भीड़, मिचनार हिलटॉप 45 दिन बंद

Bastar News: मानसून के साथ बस्तर के पर्यटन स्थलों की खूबसूरती अपने चरम पर है। चित्रकोट और तीरथगढ़ जलप्रपात में इन दिनों बड़ी संख्या में पर्यटक पहुंच रहे हैं। खासकर सप्ताहांत में चित्रकोट में सैलानियों की भीड़ इतनी बढ़ रही है कि पार्किंग और प्रमुख व्यू-पॉइंट पर जगह कम पड़ने लगी है। लंबे समय तक नक्सल प्रभावित क्षेत्र की छवि के कारण पर्यटकों की आवाजाही प्रभावित रही, लेकिन अब बस्तर की प्राकृतिक खूबसूरती और बेहतर होते सुरक्षा माहौल के बीच दूसरे राज्यों से भी सैलानी पहुंच रहे हैं। इसी बीच मिचनार हिलटॉप को तेंदुआ और उसके दो शावकों की मौजूदगी के कारण 45 दिनों के लिए पर्यटकों के लिए बंद किया गया है।

चित्रकोट में वीकेंड पर बढ़ी भीड़

चित्रकोट जलप्रपात में मानसून के दौरान इंद्रावती नदी का जलस्तर बढ़ने के साथ इसका स्वरूप बेहद आकर्षक हो गया है। तेज बहाव के साथ गिरता पानी और आसपास की हरियाली पर्यटकों को लगातार अपनी ओर खींच रही है।

बताया जा रहा है कि 15 अगस्त के बाद से चित्रकोट में पर्यटकों की संख्या में लगातार बढ़ोतरी देखी जा रही है। शनिवार और रविवार को यहां सबसे ज्यादा भीड़ नजर आती है। परिवारों के साथ युवा, स्थानीय पर्यटक और दूसरे राज्यों से आने वाले सैलानी भी बड़ी संख्या में पहुंच रहे हैं।

वीकेंड पर पार्किंग स्थल में वाहनों की संख्या बढ़ने के कारण कई पर्यटकों को अपने वाहन जलप्रपात से काफी दूर खड़े करने पड़ रहे हैं। इसके बाद वे पैदल या अन्य साधनों से पर्यटन स्थल तक पहुंच रहे हैं।

मानसून में जलप्रपात का बदला हुआ स्वरूप इस भीड़ की बड़ी वजह माना जा रहा है। बारिश के बाद पानी का प्रवाह बढ़ने से चित्रकोट का दृश्य सामान्य दिनों की तुलना में ज्यादा आकर्षक दिखाई दे रहा है।

तीरथगढ़ में भी सैलानियों का सैलाब

कांगेर घाटी क्षेत्र का तीरथगढ़ जलप्रपात भी इन दिनों पर्यटकों की पसंद बना हुआ है। बारिश के बाद यहां पानी का प्रवाह बढ़ गया है और सीढ़ीनुमा चट्टानों से गिरता पानी पर्यटकों को आकर्षित कर रहा है।

चित्रकोट पहुंचने वाले कई पर्यटक अब तीरथगढ़ और आसपास के दूसरे पर्यटन स्थलों को भी अपनी यात्रा में शामिल कर रहे हैं। इससे बस्तर में एक ही पर्यटन स्थल के बजाय पूरे क्षेत्र को पर्यटन सर्किट के रूप में देखने की प्रवृत्ति बढ़ती दिखाई दे रही है।

वीकेंड के दौरान तीरथगढ़ में भी सामान्य दिनों की तुलना में ज्यादा पर्यटक पहुंच रहे हैं। प्राकृतिक नजारे, हरियाली और मानसून की वजह से बस्तर के पर्यटन स्थलों की तस्वीरें और वीडियो सोशल मीडिया पर भी लगातार साझा किए जा रहे हैं।

रायगढ़ के बाइक राइडर्स पहुंचे बस्तर

बस्तर के पर्यटन को लेकर सोशल मीडिया पर बन रही सकारात्मक तस्वीर का एक उदाहरण रायगढ़ से आए बाइक राइडर्स का दल भी है। पिछले सप्ताह रायगढ़ के बाइक राइडर्स बस्तर पहुंचे और उन्होंने अलग-अलग पर्यटन स्थलों की सैर की।

दल के सदस्यों ने यात्रा के दौरान तस्वीरें और वीडियो बनाए और उन्हें सोशल मीडिया पर साझा किया। इससे बस्तर की प्राकृतिक खूबसूरती और पर्यटन स्थलों की जानकारी दूसरे शहरों के लोगों तक भी पहुंची।

बाइक राइडर्स के इस दौरे से यह भी दिखाई देता है कि बस्तर अब सिर्फ स्थानीय पर्यटकों तक सीमित नहीं रह गया है। दूसरे जिलों और राज्यों से आने वाले युवा भी यहां के पर्यटन स्थलों को अपने ट्रैवल प्लान में शामिल कर रहे हैं।

सोशल मीडिया पर बस्तर की प्राकृतिक सुंदरता, जलप्रपात, जंगल और सड़कों के वीडियो सामने आने से उन लोगों में भी रुचि बढ़ रही है, जो पहले बस्तर को मुख्य रूप से नक्सल प्रभावित क्षेत्र के तौर पर देखते थे।

नक्सल प्रभावित छवि से पर्यटन तक

बस्तर लंबे समय तक नक्सल गतिविधियों के कारण देशभर में अलग पहचान रखता रहा है। सुरक्षा से जुड़ी चिंताओं के कारण कई पर्यटक यहां आने से बचते थे। अब सुरक्षा व्यवस्था में सुधार और पर्यटन स्थलों की बेहतर पहुंच के साथ बस्तर की एक नई तस्वीर सामने आ रही है।

चित्रकोट और तीरथगढ़ जैसे प्रमुख पर्यटन स्थलों पर बढ़ती भीड़ इसी बदलाव का संकेत मानी जा सकती है। हालांकि पर्यटन को बढ़ावा देने के साथ पर्यटकों की सुरक्षा, सड़क व्यवस्था, पार्किंग, स्थानीय गाइड और भीड़ प्रबंधन जैसी व्यवस्थाओं को मजबूत करना भी जरूरी होगा।

बस्तर की प्राकृतिक संपदा को पर्यटन के माध्यम से नई पहचान मिलने से स्थानीय स्तर पर रोजगार और छोटे कारोबार को भी लाभ मिलने की संभावना है। होटल, होम-स्टे, स्थानीय परिवहन, खान-पान और हस्तशिल्प से जुड़े लोगों के लिए पर्यटकों की बढ़ती संख्या आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा दे सकती है।

मिचनार हिलटॉप 45 दिन बंद

जहां एक ओर चित्रकोट और तीरथगढ़ में पर्यटकों की भीड़ बढ़ रही है, वहीं मिचनार हिलटॉप को फिलहाल आम पर्यटकों के लिए बंद कर दिया गया है।

वन विभाग के अनुसार क्षेत्र में एक तेंदुए और उसके दो शावकों की मौजूदगी सामने आई है। वन्यजीवों की सुरक्षा और पर्यटकों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए हिलटॉप को 45 दिनों के लिए बंद रखने का निर्णय लिया गया है।

मिचनार हिलटॉप पर पर्यटकों की आवाजाही रोकने का उद्देश्य किसी संभावित मानव-वन्यजीव संघर्ष की स्थिति से बचना है। खासकर शावकों के साथ तेंदुए की मौजूदगी को देखते हुए पर्यटकों का क्षेत्र में जाना जोखिमपूर्ण हो सकता है।

45 दिन की अवधि पूरी होने के बाद हिलटॉप को दोबारा पर्यटकों के लिए खोला जाएगा या प्रतिबंध आगे बढ़ाया जाएगा, यह उस समय की वन्यजीव स्थिति और विभागीय आकलन पर निर्भर करेगा।

पर्यटन बढ़ा तो सुरक्षा भी जरूरी

बस्तर में पर्यटकों की बढ़ती संख्या के साथ पर्यटन स्थलों पर सुरक्षा और प्रबंधन की जिम्मेदारी भी बढ़ेगी। जलप्रपातों के आसपास तेज बहाव वाले क्षेत्रों में चेतावनी संकेत, बैरिकेडिंग और निगरानी व्यवस्था महत्वपूर्ण होगी।

मानसून के दौरान जलप्रपातों का पानी अचानक बढ़ सकता है। ऐसे में पर्यटकों को निर्धारित सुरक्षित क्षेत्रों में ही रहने और प्रशासन तथा वन विभाग के निर्देशों का पालन करने की जरूरत होगी।

इसी तरह जंगल और पहाड़ी क्षेत्रों में वन्यजीवों की मौजूदगी को लेकर भी पर्यटकों को सावधानी बरतनी होगी। मिचनार हिलटॉप को बंद करने का फैसला इसी सुरक्षा दृष्टिकोण को दर्शाता है।

बस्तर की नई पहचान बन रहा पर्यटन

चित्रकोट और तीरथगढ़ में बढ़ती भीड़ तथा रायगढ़ समेत दूसरे जिलों से पर्यटकों की आवाजाही बस्तर के पर्यटन क्षेत्र के लिए सकारात्मक संकेत है। मानसून ने फिलहाल इन पर्यटन स्थलों को खास आकर्षण दिया है।

अगर पर्यटन सुविधाओं, सड़क संपर्क, सुरक्षा और स्थानीय स्तर की व्यवस्थाओं को लगातार बेहतर किया जाता है, तो बस्तर की प्राकृतिक खूबसूरती को देश के बड़े पर्यटन मानचित्र पर और मजबूत जगह मिल सकती है। छत्तीसगढ़ की हर अपडेट के लिए हमारे WhatsApp चैनल को फॉलो करें- https://whatsapp.com/channel/0029VbBj50DATRSgaSxCmo2v