CG Liquor Scam: छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित शराब घोटाले और मनी लॉन्ड्रिंग मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) की कार्रवाई को चुनौती देने वाली याचिका हाईकोर्ट ने खारिज कर दी है। चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा और जस्टिस रवींद्र कुमार अग्रवाल की डिवीजन बेंच ने कहा कि जांच एजेंसी के पास कार्रवाई के लिए पर्याप्त सामग्री मौजूद है। मामला नॉर्थ गोवा के अंजुना स्थित करीब 110 करोड़ रुपए कीमत के फाइव स्टार होटल ‘द वेस्टिन’ की कुर्की से जुड़ा है। याचिकाकर्ताओं ने ED के 28 मई 2026 के प्रोविजनल अटैचमेंट ऑर्डर को रद्द करने की मांग की थी।
110 करोड़ की संपत्ति पर कार्रवाई
ED ने जांच के बाद गोवा स्थित होटल को अपराध से अर्जित आय से जुड़ी संपत्ति मानते हुए प्रोविजनल रूप से अटैच किया था। एजेंसी के मुताबिक, होटल की खरीद में इस्तेमाल हुई बड़ी रकम छत्तीसगढ़ शराब सिंडिकेट से जुड़े कथित अवैध धन से आई थी।
इसी कार्रवाई के खिलाफ नई दिल्ली निवासी डॉ. राहुल अग्रवाल और मेसर्स पैसिफिका होटल्स इंडिया प्राइवेट लिमिटेड ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। याचिका में ED की कार्रवाई को चुनौती देते हुए अटैचमेंट ऑर्डर रद्द करने की मांग की गई थी।
ED का दावा- नकदी से खरीदा होटल
जांच एजेंसी के अनुसार, शराब सिंडिकेट के जरिए कथित तौर पर जुटाई गई अवैध रकम में से करीब 110 करोड़ रुपए नकद के रूप में दुर्ग निवासी विजय कुमार अग्रवाल तक पहुंचाए गए थे। ED का दावा है कि इसी रकम का इस्तेमाल राहुल अग्रवाल ने गोवा में होटल खरीदने में किया।
होटल का सौदा मेसर्स सर बायोटेक इंडिया लिमिटेड के साथ हुआ था। जांच के अनुसार, करीब 50 करोड़ रुपए का भुगतान बैंकिंग चैनल के जरिए रजिस्टर्ड सेल डीड के तहत किया गया, जबकि करीब 60 करोड़ रुपए नकद दिए गए।
याचिकाकर्ताओं ने रकम को बताया वैध
हाईकोर्ट में याचिकाकर्ताओं की ओर से ED के आरोपों को चुनौती देते हुए कहा गया कि होटल खरीद में इस्तेमाल किए गए 60 करोड़ रुपए वैध कारोबारी आय थे। उनका तर्क था कि इनकम टैक्स अपीलेट ट्रिब्यूनल के आदेशों में भी इस रकम के स्रोत को लेकर स्थिति स्पष्ट हो चुकी है।
याचिकाकर्ताओं के मुताबिक, आयकर जांच में संबंधित नकदी को वैध व्यावसायिक आय माना गया था और इसे अघोषित आय की श्रेणी में नहीं रखा गया। उन्होंने यह भी तर्क दिया कि विजय अग्रवाल का शराब कारोबार से कोई प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष संबंध नहीं था।
पारिवारिक समझौते का भी दिया हवाला
याचिकाकर्ताओं ने अदालत में 1 मई 2019 को हुए पारिवारिक समझौते का भी उल्लेख किया। उनके अनुसार, इस समझौते के तहत विजय अग्रवाल कंपनी के डायरेक्टर पद से इस्तीफा दे चुके थे और इसके बाद होटल परियोजना से उनका कोई संबंध नहीं रहा।
याचिकाकर्ताओं ने यह भी कहा कि विजय अग्रवाल छत्तीसगढ़ शराब घोटाले से संबंधित मूल FIR या चार्जशीट में आरोपी नहीं हैं। इसी आधार पर होटल की संपत्ति को अपराध की आय से जोड़ने की ED की कार्रवाई पर सवाल उठाए गए।
ED ने बयानों को बनाया आधार
ED ने अदालत को बताया कि जांच के दौरान शराब सिंडिकेट से जुड़े लोगों के बयानों से रकम के लेन-देन की जानकारी सामने आई। एजेंसी के अनुसार, मुख्य कैश डिस्ट्रीब्यूटर लक्ष्मी नारायण उर्फ पप्पू बंसल और प्रबीर कुमार शर्मा के बयानों में करीब 110 करोड़ रुपए नकद विजय अग्रवाल तक पहुंचाए जाने की पुष्टि हुई।
जांच एजेंसी ने राहुल अग्रवाल के पीएमएलए की धारा 50 के तहत दर्ज बयान का भी हवाला दिया। ED के मुताबिक, राहुल अग्रवाल ने बयान में बताया था कि दिल्ली के न्यू फ्रेंड्स कॉलोनी स्थित उनके आवास पर 8 से 10 किस्तों में करीब 60 करोड़ रुपए नकद दिए गए थे।
होटल सौदे में नकद भुगतान पर सवाल
ED ने होटल की खरीद प्रक्रिया में नकद भुगतान को भी जांच का महत्वपूर्ण आधार बताया। एजेंसी के अनुसार, करीब 50 करोड़ रुपए बैंकिंग चैनल के जरिए दिए गए, जबकि शेष 60 करोड़ रुपए नकद भुगतान के रूप में हुए।
जांच एजेंसी ने विक्रेता कंपनी की ओर से नकदी प्राप्त करने वाले विशाल सक्सेना की भूमिका का भी उल्लेख किया। ED के अनुसार, बाद में विशाल सक्सेना को होटल कंपनी में डायरेक्टर बनाया गया। एजेंसी ने इसे कथित मनी लॉन्ड्रिंग प्रक्रिया के तीसरे चरण यानी ‘इंटीग्रेशन’ से जोड़ते हुए अदालत के सामने रखा।
इनकम टैक्स और PMLA पर कोर्ट की अहम टिप्पणी
हाईकोर्ट ने याचिकाकर्ताओं के उस तर्क को स्वीकार नहीं किया कि आयकर विभाग द्वारा रकम को टैक्स के उद्देश्य से वैध मानने के बाद वह मनी लॉन्ड्रिंग जांच से बाहर हो जाती है।
अदालत ने स्पष्ट किया कि आयकर कानून और प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (PMLA) का उद्देश्य, दायरा और कानूनी कसौटियां अलग-अलग हैं। इसलिए किसी रकम का आयकर संबंधी कार्यवाही में स्वीकार किया जाना अपने आप में उसे PMLA के तहत अपराध की आय से जुड़ी जांच से मुक्त नहीं करता।
होटल का संचालन पहले जैसा जारी
हाईकोर्ट ने यह भी महत्वपूर्ण टिप्पणी की कि प्रोविजनल अटैचमेंट के बावजूद होटल का नियमित संचालन प्रभावित नहीं हुआ है। अदालत के अनुसार होटल में न तो कमरे बंद किए गए हैं और न ही कर्मचारियों को हटाया गया है।
इस आधार पर अदालत ने यह भी संकेत दिया कि कुर्की की कार्रवाई का तत्काल प्रभाव होटल के रोजमर्रा के संचालन पर नहीं पड़ा है।




