CG Diamond News: महासमुंद में मिले हीरे के पक्के संकेत, अब बड़े पैमाने पर होगी ड्रिलिंग

CG Diamond News: छत्तीसगढ़ की धरती अब केवल कोयला, लौह अयस्क और अन्य खनिजों तक सीमित नहीं रह सकती। राज्य के महासमुंद जिले के बलौदा-बेलमुंडी डायमंड ब्लॉक में हीरे की खोज को लेकर बड़ी प्रगति हुई है। एनएमडीसी-सीएमडीसी (NCL) के बोर्ड ने परियोजना में बड़े व्यास (Large Diameter) की ड्रिलिंग को मंजूरी दे दी है। यह फैसला राज्य के खनिज क्षेत्र के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

5 असली हीरे मिलने के बाद बढ़ा भरोसा

अब तक की प्रारंभिक जांच में परियोजना से सकारात्मक संकेत मिले हैं। कंपनी ने करीब 200 टन मिट्टी के नमूने एकत्र कर पन्ना स्थित प्रोसेसिंग प्लांट भेजे थे। परीक्षण के दौरान कुल 1.22 कैरेट वजन के पांच प्राकृतिक हीरे मिलने की पुष्टि हुई।

इसी सफलता के आधार पर अब विस्तृत ड्रिलिंग कर भूमिगत हीरे के संभावित भंडार का वैज्ञानिक आकलन किया जाएगा।

अब क्या होगा आगे?

ड्रिलिंग के अगले चरण में विशेषज्ञ यह पता लगाएंगे कि—

  • जमीन के भीतर हीरा कितनी गहराई पर मौजूद है।
  • संभावित भंडार का आकार और गुणवत्ता क्या है।
  • किम्बरलाइट पाइप की संरचना और क्षमता कितनी है।
  • इसके बाद विस्तृत Feasibility Report तैयार होगी, जिसके आधार पर व्यावसायिक खनन का निर्णय लिया जाएगा।

अंतरराष्ट्रीय अनुभव से बढ़ी उम्मीद

खनन विशेषज्ञों के अनुसार बोत्सवाना, दक्षिण अफ्रीका, कनाडा और ऑस्ट्रेलिया जैसे प्रमुख हीरा उत्पादक देशों में शुरुआती चरण में मिले ऐसे ही संकेत बाद में बड़े व्यावसायिक हीरा भंडार में बदल चुके हैं। इसी कारण बलौदा-बेलमुंडी परियोजना को भी देश की संभावनाशील डायमंड परियोजनाओं में शामिल माना जा रहा है।

हालांकि विशेषज्ञ यह भी मानते हैं कि प्रारंभिक सफलता बड़े व्यावसायिक भंडार की गारंटी नहीं होती। अंतिम निष्कर्ष विस्तृत ड्रिलिंग और भूवैज्ञानिक अध्ययन के बाद ही सामने आएगा।

अन्य खनन परियोजनाओं पर भी चर्चा

दिल्ली में आयोजित बोर्ड बैठक में केवल डायमंड प्रोजेक्ट ही नहीं बल्कि राज्य की अन्य प्रमुख खनन परियोजनाओं की भी समीक्षा की गई।

  • बैलाडीला डिपॉजिट-4 से चालू वित्त वर्ष में 10 लाख टन लौह अयस्क उत्पादन का लक्ष्य तय किया गया।
  • भविष्य में इसे बढ़ाकर 70 लाख टन प्रतिवर्ष तक ले जाने की योजना बनाई गई है।

पर्यावरण और स्थानीय विकास पर रहेगा फोकस

अधिकारियों के अनुसार सभी परियोजनाओं में पर्यावरण संरक्षण, स्थानीय समुदायों के हित और क्षेत्रीय विकास को प्राथमिकता दी जाएगी।

छत्तीसगढ़ खनिज विकास निगम के अध्यक्ष सौरभ सिंह ने कहा कि यदि परियोजना सफल रहती है तो बलौदा-बेलमुंडी राज्य को देश के प्रमुख हीरा उत्पादक क्षेत्रों की सूची में शामिल करा सकती है। छत्तीसगढ़ की हर अपडेट के लिए हमारे WhatsApp चैनल को फॉलो करें- https://whatsapp.com/channel/0029VbBj50DATRSgaSxCmo2v