Raigarh News: रायगढ़ जिले के पाली क्षेत्र में संचालित अग्रोहा स्टील एंड पावर प्राइवेट लिमिटेड एक नए विवाद में घिर गई है। ग्राम पंचायत लाखा के आश्रित गांव चिराईपानी के ग्रामीणों ने कंपनी पर पंचायत की जमीन पर कब्जा बनाए रखने और सार्वजनिक रास्ते का उपयोग भारी वाहनों की पार्किंग के रूप में करने का आरोप लगाया है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि जल्द ही जमीन खाली नहीं की गई तो बड़े स्तर पर आंदोलन शुरू किया जाएगा।
ग्रामीणों के अनुसार, करीब छह महीने पहले ग्राम पंचायत लाखा और कंपनी के बीच एक भूमि किराया समझौता किया गया था। आरोप है कि यह निर्णय ग्रामसभा और स्थानीय ग्रामीणों की जानकारी के बिना लिया गया। बाद में जब गांव के लोगों को इसकी जानकारी मिली तो उन्होंने इसका विरोध किया। बढ़ते विरोध के बाद पंचायत को संबंधित एग्रीमेंट निरस्त करना पड़ा।
किरायानामा निरस्त, फिर भी नहीं छोड़ा कब्जा
ग्रामीणों का आरोप है कि समझौता समाप्त होने और पंचायत द्वारा नोटिस जारी किए जाने के बावजूद कंपनी ने जमीन पर कब्जा नहीं छोड़ा है। चिराईपानी गांव की लगभग एक एकड़ जमीन पर फेंसिंग कर उसे पार्किंग क्षेत्र के रूप में उपयोग किया जा रहा है। यहां प्रतिदिन बड़ी संख्या में भारी वाहन खड़े किए जा रहे हैं।
स्थानीय लोगों का कहना है कि यह जमीन गांव की सार्वजनिक जरूरतों के लिए उपयोगी है और कंपनी द्वारा इसका उपयोग ग्रामीणों के हितों के खिलाफ है। इससे आवागमन और स्थानीय गतिविधियों पर भी असर पड़ रहा है।
सार्वजनिक रास्ते पर भी उठे सवाल
ग्रामीणों ने यह भी आरोप लगाया है कि कंपनी के वाहनों ने गांव के सार्वजनिक मार्ग को लगभग स्थायी पार्किंग स्थल में बदल दिया है। इससे लोगों को आने-जाने में परेशानी हो रही है। खासकर बच्चों, बुजुर्गों और किसानों को रोजमर्रा के कामों में दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।
गांव के लोगों का कहना है कि उद्योगों को विकास के लिए स्थापित किया जाता है, लेकिन यदि स्थानीय लोगों की सुविधा और अधिकार प्रभावित होने लगें तो इसका विरोध स्वाभाविक है।
सरपंच ने नोटिस जारी होने की पुष्टि की
ग्राम पंचायत लाखा के सरपंच इंद्र कुमार पंडा ने बताया कि कंपनी को कब्जा हटाने और घेराबंदी समाप्त करने के लिए नोटिस भेजा गया है। उन्होंने कहा कि पंचायत को भूमि किराए से प्राप्त राशि पंचायत की आय का एक स्रोत थी, क्योंकि अन्य वित्तीय संसाधन सीमित हैं। हालांकि, ग्रामीणों की आपत्ति के बाद किरायानामा निरस्त कर दिया गया है।
सरपंच के अनुसार, कंपनी ने छह माह की अवधि के लिए प्रति माह 15 हजार रुपये के हिसाब से भुगतान किया था, लेकिन समझौता समाप्त होने के बाद भी भूमि खाली नहीं की गई है।
ग्रामीणों ने दी आंदोलन की चेतावनी
चिराईपानी निवासी और सेवानिवृत्त शिक्षक विपिन कुमार डनसेना ने कहा कि जब किरायानामा समाप्त हो चुका है तो कंपनी को तत्काल जमीन खाली करनी चाहिए। उन्होंने सवाल उठाया कि यदि उद्योग पाली क्षेत्र में स्थापित है तो दूसरे गांव की जमीन का उपयोग क्यों किया जा रहा है।
ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि प्रशासन और कंपनी प्रबंधन ने जल्द समाधान नहीं निकाला तो गांव स्तर पर व्यापक आंदोलन शुरू किया जाएगा।
पंचायत प्रतिनिधियों की भूमिका पर भी सवाल
इस पूरे मामले ने पंचायत प्रतिनिधियों की कार्यप्रणाली पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि गांव की जमीन से जुड़ा इतना बड़ा निर्णय ग्रामसभा में चर्चा किए बिना लिया गया। लोगों का कहना है कि भविष्य में ऐसे मामलों में पारदर्शिता और ग्रामीणों की सहमति सुनिश्चित की जानी चाहिए। छत्तीसगढ़ की हर अपडेट के लिए हमारे WhatsApp चैनल को फॉलो करें- https://whatsapp.com/channel/0029VbBj50DATRSgaSxCmo2v




