Doctors Candle March CG: रायपुर स्थित जवाहरलाल नेहरू स्मृति चिकित्सा महाविद्यालय में जूनियर डॉक्टरों ने अपनी तीन प्रमुख मांगों को लेकर शांतिपूर्ण कैंडल मार्च निकाला। जूनियर डॉक्टर्स एसोसिएशन छत्तीसगढ़ और छत्तीसगढ़ डॉक्टर्स फेडरेशन के संयुक्त बैनर तले हुए इस प्रदर्शन में इंटर्न, पीजी रेजिडेंट, सीनियर रेजिडेंट और सुपरस्पेशलिटी डॉक्टर बड़ी संख्या में शामिल हुए।
मोमबत्तियों और तख्तियों के साथ डॉक्टरों ने सरकार तक अपनी मांगें पहुंचाने की कोशिश की और जल्द समाधान नहीं मिलने पर आंदोलन तेज करने की चेतावनी दी।
तीन प्रमुख मांगों पर अड़े डॉक्टर
जूनियर डॉक्टरों ने सरकार के सामने तीन मुख्य मांगें रखी हैं:
- स्टाइपेंड में बढ़ोतरी: इंटर्न, PG, SR और सुपरस्पेशलिटी डॉक्टरों के स्टाइपेंड में तत्काल सम्मानजनक वृद्धि की मांग। साथ ही सुपरस्पेशलिटी कैडर के गठन की बात भी उठाई गई।
- आउटसोर्सिंग पर रोक: राज्य के बाहर से मेडिकल प्रोफेशनल्स की आउटसोर्सिंग व्यवस्था को तत्काल रद्द करने की मांग।
- स्थानीय डॉक्टरों का भविष्य सुरक्षित करना: छत्तीसगढ़ के मेडिकल युवाओं के रोजगार अवसरों और स्वास्थ्य व्यवस्था में उनकी भूमिका सुनिश्चित करने की मांग।
शांतिपूर्ण प्रदर्शन में गूंजे नारे
कैंडल मार्च के दौरान डॉक्टरों ने “हमारा हक – हमारी आवाज – हमारा भविष्य” और “Save Local Doctors, Save Our Future” जैसे नारे लगाए। डॉक्टरों ने इसे केवल वेतन से जुड़ा मुद्दा नहीं बताते हुए चिकित्सा व्यवस्था और स्थानीय प्रतिभाओं के भविष्य से जुड़ा विषय बताया।
असंतोष की वजह क्या है
वक्ताओं के अनुसार लंबे समय से उनकी मांगों पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है। इंटर्न से लेकर सुपरस्पेशलिटी स्तर तक डॉक्टरों को न तो पर्याप्त आर्थिक सुरक्षा मिल रही है और न ही करियर ग्रोथ के स्पष्ट अवसर।
इसके साथ ही हाल ही में स्वास्थ्य विभाग के एक आदेश को लेकर भी असंतोष बढ़ा है, जिसमें अन्य राज्यों के डॉक्टरों को बिना स्थानीय पंजीयन कार्य करने की अनुमति मिलने की बात सामने आई है। इससे स्थानीय डॉक्टरों में चिंता बढ़ गई है।
‘यह सिर्फ वेतन नहीं, भविष्य का सवाल’
डॉक्टरों ने स्पष्ट कहा कि यह आंदोलन केवल स्टाइपेंड वृद्धि का मुद्दा नहीं है, बल्कि छत्तीसगढ़ की स्वास्थ्य व्यवस्था और स्थानीय डॉक्टरों के भविष्य की सुरक्षा का विषय है।
उन्होंने सरकार से अपील की कि उनकी मांगों पर गंभीरता से विचार किया जाए और संवाद के माध्यम से समाधान निकाला जाए, अन्यथा आंदोलन को और व्यापक रूप दिया जाएगा।




