CG News: छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने उज्बेकिस्तान की दो महिला नागरिकों को महत्वपूर्ण राहत देते हुए उनके डिपोर्टेशन (निर्वासन) का रास्ता साफ कर दिया है। बिलासपुर हाईकोर्ट की खंडपीठ ने केंद्र सरकार, राज्य सरकार और संबंधित एजेंसियों को निर्देश दिया है कि दोनों महिलाओं को जल्द से जल्द उनके देश उज्बेकिस्तान भेजने की प्रक्रिया पूरी की जाए।
मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति रमेश सिन्हा और न्यायमूर्ति रवींद्र कुमार अग्रवाल की खंडपीठ ने बंदी प्रत्यक्षीकरण (हेबियस कॉर्पस) याचिका की सुनवाई के दौरान पाया कि राज्य सरकार, केंद्र सरकार और उज्बेकिस्तान दूतावास सभी महिलाओं के शीघ्र डिपोर्टेशन के पक्ष में हैं। इसके बाद अदालत ने याचिका का निपटारा करते हुए आवश्यक कार्रवाई के निर्देश जारी किए।
डिटेंशन सेंटर से लगाई थी रिहाई की गुहार
यह याचिका उज्बेकिस्तान की नागरिक फेरूजा सबिरोवा और दिनोरा सफ्युतदिनोवा की ओर से दायर की गई थी। याचिकाकर्ताओं के अधिवक्ता शांतम पाटिल ने अदालत को बताया कि दोनों महिलाओं को जनवरी 2026 से रायपुर में हिरासत में रखा गया था और बाद में उन्हें केंद्रीय जेल रायपुर स्थित डिटेंशन सेंटर भेज दिया गया।
याचिका में दोनों महिलाओं की रिहाई तथा जल्द से जल्द उनके देश वापस भेजने की मांग की गई थी। सुनवाई के दौरान अदालत को बताया गया कि दोनों महिलाएं लंबे समय से डिपोर्टेशन प्रक्रिया पूरी होने का इंतजार कर रही हैं।
होटल जांच के दौरान आई थीं पुलिस की नजर में
मामले के अनुसार मार्च 2026 में रायपुर के तेलीबांधा थाना क्षेत्र स्थित एक निजी होटल में पुलिस जांच के दौरान दोनों विदेशी नागरिकों की पहचान हुई थी।
जांच में सामने आया कि दिनोरा सफ्युतदिनोवा का वीजा निर्धारित अवधि से काफी पहले समाप्त हो चुका था और वह तय समय से अधिक अवधि तक भारत में रह रही थीं। वहीं फेरूजा सबिरोवा के पास वैध पासपोर्ट और वीजा संबंधी जरूरी दस्तावेज उपलब्ध नहीं पाए गए थे।
इसके बाद पुलिस ने इमिग्रेशन एवं फॉरेनर्स एक्ट, 2025 की विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज कर दोनों महिलाओं को गिरफ्तार कर लिया था। अप्रैल 2026 में न्यायालय में पेश किए जाने के बाद उन्हें न्यायिक अभिरक्षा में रायपुर केंद्रीय जेल के डिटेंशन सेंटर भेज दिया गया था।
दूतावास ने भी किया समर्थन
सुनवाई के दौरान उज्बेकिस्तान दूतावास की ओर से भी अदालत में पत्र प्रस्तुत किया गया। दूतावास ने दोनों महिलाओं को शीघ्र उनके देश भेजने का अनुरोध करते हुए आवश्यक दस्तावेज उपलब्ध कराने और पूरी प्रक्रिया में सहयोग देने का आश्वासन दिया।
केंद्र और राज्य सरकार की ओर से भी अदालत को बताया गया कि डिपोर्टेशन की प्रक्रिया जारी है और आवश्यक औपचारिकताएं पूरी होते ही दोनों महिलाओं को उनके देश भेज दिया जाएगा।
हाईकोर्ट की अहम टिप्पणी
खंडपीठ ने अपने आदेश में कहा कि जब संबंधित सभी पक्ष—राज्य सरकार, केंद्र सरकार और उज्बेकिस्तान दूतावास—डिपोर्टेशन के पक्ष में सहमत हैं और प्रक्रिया शुरू हो चुकी है, तब मामले में कोई विवादित मुद्दा शेष नहीं रह जाता।
अदालत ने इसी आधार पर बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका का निपटारा कर दिया और संबंधित एजेंसियों को प्रक्रिया में तेजी लाने के निर्देश दिए।




