GGU PAPER LEAK: गुरु घासीदास केंद्रीय विश्वविद्यालय (GGU) में कथित प्रश्नपत्र लीक और समर्थ पोर्टल हैकिंग मामले की जांच अब अंतिम चरण में पहुंच गई है। पिछले कई दिनों से चर्चा में रहे इस मामले में गठित फैक्ट फाइंडिंग कमेटी ने अपनी जांच पूरी कर ली है और रिपोर्ट भी तैयार कर ली गई है। रिपोर्ट को फिलहाल सीलबंद लिफाफे में सुरक्षित रखा गया है। संभावना जताई जा रही है कि इसे जल्द ही विश्वविद्यालय प्रशासन को सौंपा जाएगा।
इस पूरे मामले ने विश्वविद्यालय के छात्रों, शिक्षकों और प्रशासन के बीच चिंता बढ़ा दी है। जांच रिपोर्ट सामने आने के बाद ही यह साफ हो पाएगा कि वास्तव में प्रश्नपत्र लीक हुआ था या नहीं, और यदि हुआ तो इसके पीछे कौन जिम्मेदार था।
क्या है पूरा मामला?
कुछ समय पहले सोशल मीडिया पर विश्वविद्यालय की सेमेस्टर परीक्षाओं से जुड़े कथित प्रश्नपत्र वायरल होने की खबर सामने आई थी। इसके बाद समर्थ पोर्टल की सुरक्षा व्यवस्था और डेटा एक्सेस को लेकर भी सवाल उठने लगे। आरोप लगे कि परीक्षा से पहले प्रश्नपत्रों से जुड़ी जानकारी कुछ लोगों तक पहुंच गई थी।
मामले की गंभीरता को देखते हुए विश्वविद्यालय प्रशासन ने तत्काल फैक्ट फाइंडिंग कमेटी का गठन किया था। समिति को तकनीकी और प्रशासनिक दोनों पहलुओं की जांच की जिम्मेदारी सौंपी गई थी।
दिनभर चली जांच, जुटाए गए तकनीकी साक्ष्य
फैक्ट फाइंडिंग कमेटी ने कई दिनों तक लगातार जांच की। समिति ने समर्थ पोर्टल की लॉगिन हिस्ट्री, एक्सेस रिकॉर्ड, यूजर गतिविधियों और तकनीकी डेटा का विस्तार से अध्ययन किया।
इसके अलावा संबंधित अधिकारियों, कर्मचारियों, फैकल्टी सदस्यों और कुछ छात्रों के बयान भी दर्ज किए गए। जांच के दौरान यह पता लगाने की कोशिश की गई कि प्रश्नपत्रों से जुड़ी फाइलों तक किस यूजर आईडी के माध्यम से पहुंच बनाई गई और किन परिस्थितियों में यह संभव हुआ।
समिति ने पोर्टल के उपयोग से जुड़े हर पहलू की बारीकी से समीक्षा की ताकि किसी भी संभावित सुरक्षा चूक या अनधिकृत एक्सेस का पता लगाया जा सके।
किन लोगों के पास था पोर्टल का एक्सेस?
जानकारी के अनुसार समर्थ पोर्टल का संचालन और निगरानी कई अधिकारियों की संयुक्त जिम्मेदारी के तहत किया जाता है।
पोर्टल के मुख्य समन्वयक के रूप में डीएसडब्ल्यू डॉ. शैलेंद्र कुमार की भूमिका है। उनके साथ अन्य समन्वयक और सह-समन्वयक भी जुड़े हुए हैं। इसके अलावा परीक्षा नियंत्रक कार्यालय और गोपनीय विभाग को भी अधिकृत एक्सेस प्राप्त है।
यही वजह है कि जांच समिति ने यह पता लगाने पर विशेष जोर दिया कि प्रश्नपत्रों से जुड़ी फाइलों तक किस स्तर पर और किस उपयोगकर्ता द्वारा पहुंच बनाई गई।
रिपोर्ट में हो सकते हैं बड़े खुलासे
विश्वविद्यालय से जुड़े सूत्रों का मानना है कि जांच रिपोर्ट में कई महत्वपूर्ण तथ्य सामने आ सकते हैं। यदि किसी स्तर पर सुरक्षा में चूक, लापरवाही या नियमों का उल्लंघन पाया जाता है तो संबंधित लोगों पर कार्रवाई की संभावना भी बन सकती है।
हालांकि अभी तक विश्वविद्यालय प्रशासन की ओर से किसी भी व्यक्ति को दोषी नहीं ठहराया गया है। अंतिम निष्कर्ष जांच रिपोर्ट सार्वजनिक होने के बाद ही सामने आएंगे।
छात्रों की निगाहें रिपोर्ट पर
इस पूरे मामले का सबसे ज्यादा असर छात्रों पर पड़ा है। परीक्षा प्रक्रिया की पारदर्शिता और विश्वविद्यालय की साख को लेकर भी कई सवाल खड़े हुए हैं। छात्र अब रिपोर्ट का इंतजार कर रहे हैं ताकि उन्हें वास्तविक स्थिति की जानकारी मिल सके।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि जांच में किसी प्रकार की तकनीकी कमजोरी सामने आती है तो विश्वविद्यालय को अपनी डिजिटल सुरक्षा व्यवस्था और मजबूत करनी होगी। वहीं यदि अनधिकृत एक्सेस की पुष्टि होती है तो जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई हो सकती है।
प्रशासन पर बढ़ा दबाव
जांच पूरी होने के बाद विश्वविद्यालय प्रशासन पर भी दबाव बढ़ गया है। रिपोर्ट सामने आने के बाद आगे की कार्रवाई, जिम्मेदारों की पहचान और परीक्षा प्रणाली में सुधार जैसे मुद्दों पर निर्णय लिया जा सकता है।
छत्तीसगढ़ की हर अपडेट के लिए हमारे WhatsApp चैनल को फॉलो करें- https://whatsapp.com/channel/0029VbBj50DATRSgaSxCmo2v