अब तक डायल 112 सेवा सीमित जिलों में संचालित हो रही थी, लेकिन नई व्यवस्था लागू होने के बाद प्रदेश के ग्रामीण, दूरस्थ और नक्सल प्रभावित इलाकों तक भी पुलिस, एंबुलेंस और फायर ब्रिगेड जैसी आपात सेवाएं तेजी से पहुंच सकेंगी।
400 नई गाड़ियों से घटेगा रिस्पांस टाइम
डायल 112 सेवा में शामिल की जा रही नई गाड़ियां आधुनिक तकनीक और अत्याधुनिक सुविधाओं से लैस होंगी। इनमें कैमरे, GPS सिस्टम और रियल टाइम मॉनिटरिंग जैसी सुविधाएं उपलब्ध रहेंगी। अधिकारियों का कहना है कि इससे किसी भी घटना पर प्रतिक्रिया देने का समय काफी कम होगा।
विशेष रूप से बस्तर संभाग और दूरस्थ ग्रामीण क्षेत्रों में इसका बड़ा फायदा मिलने की उम्मीद है, जहां अब तक कई बार पुलिस और मेडिकल सहायता पहुंचने में अधिक समय लग जाता था।
पुलिस, फायर और एंबुलेंस सेवाएं होंगी और मजबूत
डायल 112 सेवा के जरिए नागरिकों को एक ही नंबर पर पुलिस सहायता, अग्निशमन सेवा और मेडिकल इमरजेंसी के लिए एंबुलेंस सुविधा उपलब्ध कराई जाती है। नई व्यवस्था लागू होने के बाद इन सेवाओं का दायरा और क्षमता दोनों बढ़ेंगी।
सरकार का दावा है कि ERSS 2.0 सिस्टम नागरिकों को तेज और बेहतर इमरजेंसी रिस्पॉन्स उपलब्ध कराने की दिशा में बड़ा कदम साबित होगा।
फॉरेंसिक विभाग को भी मिलेंगे 32 नए वाहन
कार्यक्रम के दौरान फॉरेंसिक साइंस विभाग को भी 32 नए वाहन सौंपे जाएंगे। इन वाहनों के जरिए फॉरेंसिक टीम किसी भी अपराध स्थल तक तेजी से पहुंच सकेगी।
नए आपराधिक कानूनों के तहत अब गंभीर घटनाओं में फॉरेंसिक टीम की मौके पर मौजूदगी जरूरी कर दी गई है। ऐसे में इन वाहनों से जांच प्रक्रिया और मजबूत होने की उम्मीद है। बताया जा रहा है कि ये वाहन अलग-अलग जिलों की फॉरेंसिक टीमों को उपलब्ध कराए जाएंगे।
पुरानी गाड़ियां बन चुकी थीं कबाड़
प्रदेश में पहले संचालित डायल 112 वाहनों की स्थिति लंबे समय से खराब बताई जा रही थी। रायपुर सहित पूरे प्रदेश में करीब 300 वाहन थे, लेकिन समय पर मेंटेनेंस नहीं होने के कारण अधिकांश गाड़ियां खराब हो चुकी थीं।
कई वाहन थानों और पुलिस कार्यालयों में लंबे समय से खड़े-खड़े कबाड़ जैसी स्थिति में पहुंच गए थे। कई गाड़ियों के महत्वपूर्ण पार्ट्स भी खराब हो चुके थे, जिससे सेवा प्रभावित हो रही थी।
शुरुआत से विवादों में रही डायल 112 सेवा
छत्तीसगढ़ में डायल 112 सेवा का संचालन शुरू से ही विवादों में रहा है। शुरुआत में इसका संचालन टाटा कंपनी और एबीपी द्वारा किया जा रहा था। बाद में टाटा कंपनी ने काम छोड़ दिया, जिसके बाद एबीपी ने संचालन जारी रखा।
इसके बाद नई कंपनी के चयन के लिए टेंडर प्रक्रिया शुरू हुई थी, जिसमें महाराष्ट्र की एक कंपनी एल-1 घोषित हुई, लेकिन दस्तावेजों में गड़बड़ी मिलने के बाद उसे हटा दिया गया। बाद में सरकारी कंपनी सी-डैक को आईटी सिस्टम का जिम्मा सौंपा गया, जबकि वाहनों के संचालन का ठेका जीवीके कंपनी को दिया गया।
अब सभी 33 जिलों तक पहुंचेगी सुविधा
वर्ष 2018 से संचालित डायल 112 सेवा अब तक लाखों लोगों को आपात स्थितियों में मदद पहुंचा चुकी है। हालांकि इसकी पहुंच सीमित जिलों तक थी। अब सरकार इसे पूरे प्रदेश में लागू करने जा रही है।
सरकार का कहना है कि नई तकनीक, आधुनिक वाहनों और बेहतर मॉनिटरिंग सिस्टम के जरिए नागरिकों को तेज और भरोसेमंद इमरजेंसी सेवा उपलब्ध कराई जाएगी। छत्तीसगढ़ की हर अपडेट के लिए हमारे WhatsApp चैनल को फॉलो करें- https://whatsapp.com/channel/0029VbBj50DATRSgaSxCmo2v





