Singhanpur Gufa: मधुमक्खियों के खौफ से फिर दहली सिंघनपुर गुफा, रिसर्च टीम पर हमला… इसी रहस्यमयी पहाड़ी ने ले ली थी पूर्व राजा की भी जान

Singhanpur Gufa: छत्तीसगढ़ के रायगढ़ जिले की ऐतिहासिक और रहस्यमयी सिंघनपुर गुफा एक बार फिर सुर्खियों में है। हजारों साल पुराने शैलचित्रों और पाषाणकालीन इतिहास को अपने भीतर समेटे यह गुफा शनिवार को अचानक उस समय दहशत का केंद्र बन गई, जब रिसर्च के लिए पहुंची रविशंकर विश्वविद्यालय की वैज्ञानिक टीम पर मधुमक्खियों के झुंड ने हमला कर दिया। इस घटना में तीन महिला और दो पुरुष शोधकर्ता घायल हो गए, जिन्हें तत्काल अस्पताल में भर्ती कराया गया। घटना के बाद इलाके में एक बार फिर उस रहस्यमयी गुफा को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं, जिसे लेकर स्थानीय लोगों के बीच पहले से ही भय और रहस्य का माहौल बना हुआ है। ग्रामीणों का कहना है कि यह वही इलाका है, जहां मधुमक्खियों के हमले में पूर्व रियासत के राजा लोकेश बहादुर सिंह की भी मौत हो चुकी है।

रिसर्च के दौरान अचानक टूट पड़ा मधुमक्खियों का झुंड

जानकारी के अनुसार, रायपुर स्थित पंडित रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय के साइंटिस्ट विभाग की पांच सदस्यीय टीम शनिवार दोपहर भूपदेवपुर थाना क्षेत्र स्थित सिंघनपुर गुफा पहुंची थी। टीम का उद्देश्य गुफा के भीतर मौजूद प्राचीन शैलचित्रों और पुरातात्विक अवशेषों का अध्ययन करना था। टीम पहाड़ी चढ़कर मुख्य गुफा के भीतर पहुंची और रिसर्च कार्य में जुटी हुई थी। इसी दौरान दोपहर करीब तीन बजे अचानक मधुमक्खियों का बड़ा झुंड सक्रिय हो गया और शोधकर्ताओं पर हमला कर दिया। हमला इतना तेज था कि टीम के सदस्य घबराकर गुफा से बाहर भागने लगे। मधुमक्खियों के लगातार डंक मारने से सभी घायल हो गए। कुछ सदस्यों के शरीर में सूजन और तेज दर्द की शिकायत भी सामने आई।

पुलिस और वन विभाग ने पहुंचकर किया रेस्क्यू

घटना की सूचना मिलते ही भूपदेवपुर पुलिस और वन विभाग की टीम मौके पर पहुंची। आसपास के ग्रामीणों की मदद से सभी घायलों को सुरक्षित बाहर निकाला गया। बाद में उन्हें उपचार के लिए रायगढ़ स्थित जिंदल अस्पताल भेजा गया, जहां उनका इलाज जारी है। स्थानीय लोगों के मुताबिक मधुमक्खियों के हमले के बाद वहां अफरा-तफरी का माहौल बन गया था। हालांकि डॉक्टरों के अनुसार फिलहाल सभी की हालत खतरे से बाहर बताई जा रही है।

30 हजार साल पुराने इतिहास को समेटे है सिंघनपुर गुफा

सिंघनपुर गुफा केवल एक पर्यटन स्थल नहीं, बल्कि छत्तीसगढ़ के प्राचीन इतिहास की बेहद महत्वपूर्ण धरोहर मानी जाती है। यह गुफा शैलचित्रों और पाषाणकालीन अवशेषों के लिए देशभर में प्रसिद्ध है। इतिहासकारों के अनुसार लगभग 30 हजार वर्ष पुराने इन शैलचित्रों की खोज वर्ष 1910 में एंडरसन नामक शोधकर्ता ने की थी। इसे छत्तीसगढ़ का पहला खोजा गया शैलचित्र स्थल माना जाता है। गुफा की दीवारों पर शिकार करते मानव, पशु-पक्षियों की आकृतियां, समूहों में चलते लोग और घोड़ों से जुड़े दृश्य आज भी उस प्राचीन सभ्यता की कहानी बयान करते हैं। पर्यटन विभाग के अनुसार सिंघनपुर पहाड़ियों में कुल 11 गुफाएं मौजूद हैं, जिनमें मुख्य गुफा सबसे अधिक रहस्यमयी और दुर्गम मानी जाती है।

पहले भी हो चुकी हैं ऐसी घटनाएं

स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि सिंघनपुर गुफा के भीतर वर्षों से मधुमक्खियों का विशाल बसेरा बना हुआ है। यही कारण है कि जानकार लोग बिना सावधानी के गुफा के भीतर प्रवेश करने से बचते हैं। ग्रामीणों के अनुसार इससे पहले भी यहां मधुमक्खियों के हमले की कई घटनाएं हो चुकी हैं। कई बार लोग रोमांच या गड़े धन की अफवाहों के चलते गुफा के भीतर पहुंच जाते हैं और मुश्किल में फंस जाते हैं। इसी वजह से आसपास के गांवों में यह मान्यता भी बन चुकी है कि गुफा क्षेत्र बेहद संवेदनशील और खतरनाक है।

पूर्व राजा की मौत से जुड़ी है रहस्यमयी कहानी

सिंघनपुर गुफा को लेकर सबसे ज्यादा चर्चा उस घटना की होती है, जिसमें पूर्व रियासत के राजा लोकेश बहादुर सिंह की मौत का जिक्र किया जाता है। स्थानीय मान्यताओं के मुताबिक राजा की मृत्यु भी इसी क्षेत्र में मधुमक्खियों के हमले के दौरान हुई थी। हालांकि इस घटना को लेकर आधिकारिक दस्तावेज सीमित हैं, लेकिन ग्रामीण आज भी इसे एक बड़ी चेतावनी की तरह याद करते हैं। यही कारण है कि इलाके के लोग गुफा क्षेत्र में जाने से पहले बेहद सतर्क रहने की सलाह देते हैं।

सुरक्षा व्यवस्था बढ़ाने की उठी मांग

शनिवार की घटना के बाद अब स्थानीय लोगों ने प्रशासन से सिंघनपुर गुफा क्षेत्र में सुरक्षा व्यवस्था बढ़ाने की मांग की है। लोगों का कहना है कि यहां रिसर्च और पर्यटन के लिए आने वाले लोगों को पहले से चेतावनी बोर्ड, सुरक्षा गाइडलाइन और आवश्यक सुरक्षा उपकरण उपलब्ध कराए जाने चाहिए। इतिहास, रहस्य और खतरे का अनोखा संगम बनी सिंघनपुर गुफा एक बार फिर चर्चा के केंद्र में है। जहां एक ओर यह स्थल छत्तीसगढ़ की प्राचीन सभ्यता की अनमोल धरोहर है, वहीं दूसरी ओर यहां छिपा खतरा हर आने वाले को सतर्क रहने का संदेश भी दे रहा है। छत्तीसगढ़ की हर अपडेट के लिए हमारे WhatsApp चैनल को फॉलो करें- https://whatsapp.com/channel/0029VbBj50DATRSgaSxCmo2v