आज जब अधिकांश छात्र महंगी कोचिंग और बाहरी संसाधनों पर निर्भर रहते हैं, ऐसे समय में प्रीतोष की यह उपलब्धि हजारों विद्यार्थियों के लिए प्रेरणा बनकर सामने आई है। उनकी सफलता यह साबित करती है कि यदि लक्ष्य स्पष्ट हो और मेहनत लगातार की जाए तो सीमित संसाधनों में भी बड़े मुकाम हासिल किए जा सकते हैं।
नियमित पढ़ाई और अनुशासन बना सफलता का आधार
प्रीतोष कुमार सिंह ने अपनी सफलता के पीछे नियमित पढ़ाई और सही रणनीति को सबसे अहम बताया। उन्होंने कहा कि वे रोजाना निश्चित समय तक पढ़ाई करते थे और हर विषय के लिए अलग रूटीन तैयार किया था।
उन्होंने बताया कि:
- Accountancy विषय की वे रोज प्रैक्टिस करते थे,
- जबकि Business Studies (BST) और Economics की पढ़ाई Alternate Days यानी एक दिन छोड़कर करते थे।
उनका मानना है कि कॉमर्स विषयों में Concept Clear होना बेहद जरूरी है और इसके लिए लगातार अभ्यास करना पड़ता है। यही कारण रहा कि उन्होंने केवल रटने के बजाय Concepts को समझने पर ज्यादा फोकस किया।
YouTube बना पढ़ाई का सबसे बड़ा माध्यम
डिजिटल युग में ऑनलाइन शिक्षा तेजी से बढ़ रही है और प्रीतोष की सफलता इसका बेहतरीन उदाहरण बनकर सामने आई है।
प्रीतोष ने बताया:
“मेरी पूरी तैयारी YouTube से हुई। मैंने घर पर रहकर बिना किसी ट्यूशन और कोचिंग के पढ़ाई की।”
उन्होंने विभिन्न एजुकेशनल चैनलों, ऑनलाइन वीडियो लेक्चर्स और डिजिटल नोट्स की मदद से अपनी तैयारी मजबूत की। उनका कहना है कि आज इंटरनेट पर गुणवत्तापूर्ण शैक्षणिक सामग्री आसानी से उपलब्ध है, जरूरत सिर्फ सही दिशा में मेहनत करने की होती है।
उन्होंने यह भी कहा कि ऑनलाइन पढ़ाई ने उन्हें Time Management में काफी मदद की, क्योंकि वे अपनी सुविधा के अनुसार पढ़ाई कर पाते थे और किसी Topic को बार-बार समझ सकते थे।
स्कूल शिक्षकों ने भी निभाई महत्वपूर्ण भूमिका
हालांकि प्रीतोष ने Self Study को अपनी ताकत बताया, लेकिन उन्होंने अपने स्कूल शिक्षकों के योगदान को भी बेहद महत्वपूर्ण माना।
उन्होंने कहा कि जब भी किसी विषय में Doubt होता था, स्कूल के शिक्षक हमेशा मदद के लिए तैयार रहते थे। शिक्षकों ने समय-समय पर उनके सवालों का समाधान किया और सही मार्गदर्शन दिया।
स्कूल के शिक्षकों का मानना है कि प्रीतोष शुरू से ही मेहनती और अनुशासित छात्र रहे हैं। वे पढ़ाई को लेकर हमेशा गंभीर रहते थे और हर विषय को गहराई से समझने की कोशिश करते थे।
परिवार का मिला पूरा सहयोग
प्रीतोष की सफलता के पीछे उनके परिवार का सहयोग भी बड़ी ताकत बनकर सामने आया।
उनके पिता Santosh Kumar Singh और माता Aparna Singh ने हर परिस्थिति में उनका हौसला बढ़ाया और पढ़ाई के लिए सकारात्मक माहौल दिया।
परिवार का कहना है कि प्रीतोष शुरू से ही पढ़ाई के प्रति गंभीर रहे हैं। उन्होंने कभी दबाव में आकर पढ़ाई नहीं की, बल्कि अपनी रुचि और अनुशासन के साथ लगातार मेहनत की।
माता-पिता ने बताया कि वे हमेशा अपने बेटे को आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करते रहे और यही वजह है कि उसने बिना कोचिंग के भी शानदार सफलता हासिल की।
छात्रों के लिए प्रेरणा बनी सफलता
आज के समय में कई छात्र यह मानते हैं कि अच्छे अंक लाने के लिए महंगी कोचिंग जरूरी होती है, लेकिन प्रीतोष कुमार सिंह की सफलता इस सोच को बदलने वाली है।
उनकी उपलब्धि यह संदेश देती है कि:
- नियमित अभ्यास,
- सही रणनीति,
- आत्मविश्वास,
- और Self Study के जरिए भी बड़ी सफलता हासिल की जा सकती है।
शिक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि यदि छात्र समय का सही उपयोग करें और डिजिटल प्लेटफॉर्म का सकारात्मक तरीके से इस्तेमाल करें तो घर बैठे भी उत्कृष्ट परिणाम प्राप्त किए जा सकते हैं।
सोशल मीडिया पर हो रही सराहना
CBSE रिजल्ट जारी होने के बाद प्रीतोष कुमार सिंह की सफलता सोशल मीडिया पर भी चर्चा का विषय बन गई है। लोग उनकी मेहनत और बिना कोचिंग शानदार प्रदर्शन की सराहना कर रहे हैं।
कई यूजर्स ने इसे “Real Success Story” बताते हुए कहा कि यह उन छात्रों के लिए प्रेरणा है जो सीमित संसाधनों के बावजूद बड़े सपने देखते हैं।
रायगढ़ के लिए गर्व का क्षण
प्रीतोष की सफलता से रायगढ़ जिले में खुशी का माहौल है। स्कूल प्रबंधन, शिक्षक, मित्र और परिचित लगातार उन्हें बधाई दे रहे हैं।
उनकी यह उपलब्धि साबित करती है कि छोटे शहरों के छात्र भी राष्ट्रीय स्तर की परीक्षाओं में शानदार प्रदर्शन कर सकते हैं और अपने जिले व प्रदेश का नाम रोशन कर सकते हैं।
भविष्य को लेकर प्रीतोष का कहना है कि वे आगे भी पूरी मेहनत और ईमानदारी के साथ अपने लक्ष्य की ओर बढ़ते रहेंगे। छत्तीसगढ़ की हर अपडेट के लिए हमारे WhatsApp चैनल को फॉलो करें- https://whatsapp.com/channel/0029VbBj50DATRSgaSxCmo2v





