यह घटना 2 मई की देर रात की बताई जा रही है, जब पीड़ित अपने निजी कार्य से लौट रहा था और कुछ समय के लिए रास्ते में रुका। इसी दौरान आरोपियों ने योजना बनाकर वारदात को अंजाम दिया।
कैसे रची गई लूट की साजिश?
पुलिस के अनुसार, पीड़ित आकाश कुमार तिवारी (38 वर्ष) गरियाबंद आबकारी विभाग में लिपिक के पद पर कार्यरत हैं। वह 2 मई की रात राजिम से खाना खाकर करीब 11:30 बजे रायपुर लौट रहे थे।
रात करीब 12:30 बजे जब वे ग्राम केंद्री बस स्टॉप के पास रुके और यात्री प्रतीक्षालय में बैठे, तभी अभनपुर की ओर से पल्सर बाइक पर सवार दो युवक वहां पहुंचे।
पहले आरोपियों ने सामान्य तरीके से माचिस मांगी, जिससे पीड़ित को किसी तरह का संदेह नहीं हुआ। इसके बाद अचानक दोनों युवकों ने आरोप लगाया कि पीड़ित के पास गांजा है और वे उसकी तलाशी लेने लगे।
“गांजा चेकिंग” के बहाने शुरू हुई वारदात
आरोपियों ने खुद को जांच करने वाले के रूप में प्रस्तुत किया और जबरदस्ती पीड़ित की तलाशी लेने लगे। जब पीड़ित ने इसका विरोध किया, तो दोनों युवकों ने आक्रामक रवैया अपनाया।
मोबाइल की रोशनी में चेहरा देखने के बाद उन्होंने पीड़ित का हाथ पकड़ लिया और उसे जबरन पास के खेत की ओर ले गए।
यह पूरी घटना सुनियोजित प्रतीत होती है, जिसमें पहले भरोसा बनाना और फिर डर पैदा कर अपराध को अंजाम देना शामिल था।
खेत में ले जाकर दी जान से मारने की धमकी
खेत में ले जाने के बाद आरोपियों ने पीड़ित को जमीन पर गिरा दिया और उसे जान से मारने की धमकी दी। अकेले होने और रात का समय होने के कारण पीड़ित खुद को असहाय स्थिति में पाया।
आरोपियों ने उसके हाथ में पहनी दो सोने की अंगूठियां और गले में पहनी सोने की चेन लूट ली। लूटे गए जेवरों की कुल कीमत करीब 80 हजार रुपये बताई जा रही है।
घटना के दौरान पीड़ित ने विरोध करने की कोशिश नहीं की, क्योंकि उसे अपनी जान का खतरा महसूस हो रहा था।
घटना के बाद क्या हुआ?
वारदात के बाद पीड़ित सीधे अपने घर रायपुर चला गया। अगले दिन 3 मई को उसने अभनपुर थाने पहुंचकर पूरी घटना की शिकायत दर्ज कराई।
पुलिस ने अज्ञात आरोपियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 309(4) और 351(2) के तहत मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
पुलिस जांच: CCTV और संदिग्धों पर फोकस
मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस आसपास के इलाकों के सीसीटीवी फुटेज खंगाल रही है। इसके अलावा संदिग्ध बाइक सवार युवकों की पहचान और गिरफ्तारी के लिए विशेष टीम लगाई गई है।
पीड़ित ने पुलिस को बताया है कि वह आरोपियों को सामने आने पर पहचान सकता है, जिससे जांच में मदद मिलने की उम्मीद है।
क्या बताता है यह मामला?
यह घटना इस बात का संकेत देती है कि अपराधी अब नए-नए तरीकों से लोगों को निशाना बना रहे हैं। “चेकिंग” या “तलाशी” के नाम पर लोगों को भ्रमित करना और फिर लूटपाट करना एक खतरनाक ट्रेंड बनता जा रहा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि आम नागरिकों को इस तरह के मामलों में सतर्क रहने की जरूरत है और किसी भी अनजान व्यक्ति को बिना सत्यापन के खुद की तलाशी लेने की अनुमति नहीं देनी चाहिए।
रात में सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल
रात के समय सुनसान स्थानों पर सुरक्षा की कमी इस घटना में साफ दिखाई देती है। बस स्टॉप जैसे सार्वजनिक स्थान पर भी इस तरह की वारदात होना पुलिस गश्त और निगरानी व्यवस्था पर सवाल खड़ा करता है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि ऐसे इलाकों में नियमित पुलिस पेट्रोलिंग बढ़ाई जानी चाहिए, ताकि अपराधियों के हौसले पस्त किए जा सकें।
आगे क्या कदम जरूरी?
इस घटना के बाद पुलिस और प्रशासन के सामने चुनौती है कि ऐसे मामलों की पुनरावृत्ति रोकी जाए। इसके लिए संवेदनशील क्षेत्रों की पहचान, सीसीटीवी कवरेज बढ़ाना और रात में गश्त तेज करना जरूरी होगा।
साथ ही, आम नागरिकों को भी जागरूक रहना होगा और संदिग्ध गतिविधियों की सूचना तुरंत पुलिस को देनी होगी।
स्पष्ट है कि यह मामला केवल एक लूट की घटना नहीं, बल्कि सुरक्षा व्यवस्था के लिए एक चेतावनी है, जिसे गंभीरता से लेने की जरूरत है। छत्तीसगढ़ की हर अपडेट के लिए हमारे WhatsApp चैनल को फॉलो करें- https://whatsapp.com/channel/0029VbBj50DATRSgaSxCmo2v
