Supreme Court of India: देश की सर्वोच्च अदालत Supreme Court of India ने रियल एस्टेट रेगुलेटरी अथॉरिटीज़ (RERA) के कामकाज पर कड़ी नाराज़गी जताते हुए कहा कि अगर ये संस्थाएं सिर्फ डिफॉल्टर बिल्डरों को राहत देने का माध्यम बन रही हैं, तो इन्हें खत्म कर देना ही बेहतर होगा। अदालत की इस टिप्पणी ने रियल एस्टेट सेक्टर और राज्यों की सरकारों में हलचल पैदा कर दी है।
किस मामले की सुनवाई के दौरान आई टिप्पणी?
यह टिप्पणी उस समय आई जब अदालत Himachal Pradesh में RERA कार्यालय को शिमला से धर्मशाला स्थानांतरित करने के फैसले से जुड़े मामले की सुनवाई कर रही थी।
मुख्य न्यायाधीश Surya Kant और न्यायमूर्ति Joymalya Bagchi की पीठ ने कहा:
“यह समय आ गया है कि सभी राज्य RERA की स्थापना पर पुनर्विचार करें। अगर यह संस्था सिर्फ डिफॉल्टर बिल्डरों को सुविधा देने का माध्यम बन रही है, तो इसे खत्म कर देना ही बेहतर है।”
‘रिहैबिलिटेशन सेंटर’ बन गया है RERA?
सुनवाई के दौरान जब अदालत को बताया गया कि कई राज्यों में सेवानिवृत्त आईएएस अधिकारियों की नियुक्ति RERA में की जाती है, तो CJI ने तीखी टिप्पणी करते हुए कहा कि:
“हर राज्य में यह संस्था रिटायर्ड अधिकारियों के लिए रिहैबिलिटेशन सेंटर बन गई है। जिन लोगों के लिए यह बनाई गई थी, वे ही निराश और परेशान हैं।”
गौरतलब है कि सितंबर 2024 में भी शीर्ष अदालत ने RERA को “रिटायर्ड ब्यूरोक्रेट्स का पुनर्वास केंद्र” बताया था।
RERA एक्ट क्यों बना था?
Real Estate (Regulation and Development) Act, 2016 यानी RERA एक्ट 2016 को रियल एस्टेट सेक्टर में पारदर्शिता लाने, घर खरीदारों के हितों की रक्षा करने और परियोजनाओं को समय पर पूरा कराने के उद्देश्य से लागू किया गया था।
लेकिन अदालत के अनुसार, नौ साल बाद भी यह सुनिश्चित नहीं हो पाया है कि:
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RERA रजिस्टर्ड प्रोजेक्ट समय पर पूरे होंगे

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बिल्डरों के वादे पूरे होंगे
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खरीदारों को समयबद्ध राहत मिलेगी
हाई कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट का फैसला
मामले में Himachal Pradesh High Court ने राज्य सरकार की उस अधिसूचना पर रोक लगा दी थी, जिसमें RERA कार्यालय को धर्मशाला शिफ्ट करने का आदेश था।
हालांकि, 12 फरवरी को सुप्रीम कोर्ट ने हाई कोर्ट के आदेश में हस्तक्षेप करते हुए राज्य सरकार को कार्यालय स्थानांतरित करने की अनुमति दे दी। साथ ही यह भी निर्देश दिया कि अपीलीय प्राधिकरण को भी धर्मशाला स्थानांतरित किया जाए, ताकि प्रभावित लोगों को असुविधा न हो।
घर खरीदारों की क्या राय?
होमबायर्स संगठन Forum for People’s Collective Efforts (FPCE) ने कहा कि वे लंबे समय से इस बात को उठा रहे हैं कि RERA अपने मूल उद्देश्य से भटक गया है।
FPCE के अध्यक्ष Abhay Upadhyay ने कहा:
“अगर RERA घर खरीदारों की अपेक्षाओं पर खरा नहीं उतरता, तो या तो इसमें बुनियादी सुधार किए जाएं या इसके अस्तित्व पर पुनर्विचार किया जाए।”
आगे क्या?
सुप्रीम कोर्ट की यह टिप्पणी सिर्फ एक मामले तक सीमित नहीं मानी जा रही। इससे पूरे देश में RERA की संरचना, नियुक्तियों और कामकाज पर बहस तेज हो सकती है।
रियल एस्टेट सेक्टर, राज्य सरकारें और लाखों घर खरीदार अब यह देख रहे हैं कि क्या RERA में व्यापक सुधार होंगे या वास्तव में इसकी भूमिका पर बड़ा निर्णय लिया जाएगा।
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