Republic Day 2026: कोरबा में गणतंत्र दिवस के दिन जिला कलेक्ट्रेट परिसर में उस समय अफरा-तफरी मच गई जब हाल ही में बर्खास्त किए गए नगर सैनिक (होमगार्ड) ने अत्यधिक भावनात्मक तनाव की स्थिति में आत्म-हानि का प्रयास किया। घटना के तुरंत बाद उसे मेडिकल कॉलेज अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां वह चिकित्सकीय निगरानी में है। अधिकारियों ने मामले की जांच शुरू कर दी है।
विवाद की शुरुआत — रिश्वत और पुनर्नामांकन प्रक्रिया पर आरोप
जानकारी के अनुसार नगर सैनिक संतोष पटेल (46 वर्ष) ने पिछले सप्ताह संभागीय सेनानी के समक्ष सम्मेलन में जिला नगर सेनानी अनुज एक्का के खिलाफ गंभीर आरोप लगाए थे। आरोप यह था कि वार्षिक पुनर्नामांकन प्रक्रिया के लिए रिश्वत की मांग की गई। शिकायत में स्टेनो के माध्यम से राशि पहुंचाए जाने का दावा भी शामिल था।
विभागीय जांच के दौरान आरोपी स्टेनो ने इन तथ्यों को स्वीकार नहीं किया। नतीजतन, संतोष की शिकायत अविश्वसनीय मानी गई और मामले को विभागीय स्तर पर उलट कर संतोष के विरुद्ध जांच शुरू हुई।
21 जनवरी को बर्खास्तगी — बढ़ता दबाव और नाराजगी
विवाद के विस्तार के बीच 21 जनवरी को जिला नगर सेनानी कार्यालय से संतोष पटेल की बर्खास्तगी का आदेश जारी कर दिया गया। यह निर्णय उसके लिए भारी मानसिक दबाव का कारण बना।
उसने आरोप लगाया कि सम्मेलन के दौरान वरिष्ठ अधिकारियों ने शिकायतों को खुलकर रखने की अनुमति दी थी, लेकिन बाद में उसी आधार पर उस पर कार्रवाई की गई, जिससे वह स्वयं को असहाय समझने लगा।
गणतंत्र दिवस पर अचानक तनावपूर्ण घटना — कलेक्ट्रेट में मचा हड़कंप
26 जनवरी की सुबह करीब आठ बजे वह कलेक्ट्रेट परिसर पहुंचा। कुछ ही समय पहले कलेक्टर द्वारा ध्वजारोहण का कार्यक्रम समाप्त हुआ था। उक्त मौके पर उपस्थित कर्मचारियों ने बताया कि संतोष अत्यधिक तनाव में दिखाई दे रहा था। इसके बाद अचानक स्थिति बिगड़ने पर प्रशासनिक कर्मचारियों ने तत्काल एंबुलेंस का इंतज़ाम किया।
घटना की जानकारी मिलते ही जिला प्रशासन, सिविल लाइन थाना टीम और सीएसपी मौके व अस्पताल पहुंचे। डॉक्टरों के अनुसार उसकी स्थिति गंभीर बनी हुई है और उसे ICU में रखा गया है।
जेब से मिला नोट — प्रताड़ना के आरोप, बयान का इंतजार
अस्पताल में भर्ती संतोष की जेब से एक हस्तलिखित नोट मिला, जिसमें दो वरिष्ठ अधिकारियों पर प्रताड़ना जैसी शिकायत दर्ज है। पुलिस ने इसे महत्वपूर्ण साक्ष्य मानते हुए सुरक्षित कर लिया है। अधिकारी उसकी स्थिति सुधरने का इंतजार कर रहे हैं ताकि उसके बयान दर्ज हो सकें।
पुलिस का कहना है कि पूरे मामले की जांच निष्पक्षता से की जाएगी और सभी पक्षों से पूछताछ होगी।
नगर सैनिक संगठन में असंतोष — तीन महीनों में दो बार काम बंद आंदोलन
इस घटना ने नगर सैनिक संगठन के भीतर जारी असंतोष को फिर से उभार दिया है। बताया जाता है कि पिछले तीन महीनों में नगर सैनिकों ने दो बार काम बंद आंदोलन किया था।
कुछ महिला नगर सैनिकों ने भी अनुशासन व व्यवहार से जुड़े गंभीर आरोप लगाए हैं। यह सभी स्थितियाँ मिलकर संकेत देती हैं कि जिला नगर सेनानी कार्यालय में आंतरिक प्रबंधन और संवाद व्यवस्था में तनाव मौजूद है।
नगर सैनिक — पुलिस बल का महत्वपूर्ण सहायक घटक
नगर सैनिक बल पुलिस विभाग के लिए एक सहायक बल के रूप में जाना जाता है। जिले में वर्तमान में लगभग 325 नगर सैनिक तैनात हैं, जिनमें लगभग 50% महिलाएँ हैं। आरक्षकों की कमी होने पर ड्यूटी संचालन इन्हीं के माध्यम से किया जाता है, इसलिए प्रशासनिक विवादों का प्रभाव सीधे पुलिस कार्यप्रणाली पर पड़ता है।
प्रशासनिक स्तर पर सवाल — जवाबदेही और कार्य-संस्कृति पर चर्चा
विशेषज्ञों का मानना है कि यह घटना केवल एक व्यक्तिगत विवाद या बर्खास्तगी से जुड़ी नहीं है, बल्कि प्रशासनिक कार्य-संस्कृति, विभागीय संवाद और शिकायत निस्तारण व्यवस्था पर बड़े प्रश्न उठाती है।
यदि शिकायत तंत्र पारदर्शी न हो या शिकायत करने वाले को संरक्षण न मिले, तो संस्थागत प्रक्रियाओं पर भरोसा कमजोर होता है। यह स्थिति पुलिस-जैसे अनुशासित तंत्र में और भी चुनौतीपूर्ण हो जाती है।
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