Raipur News: मकर संक्रांति से ठीक पहले रायपुर में चाइनीज मांझे के उपयोग को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। टिल्लू चौक के पास चाइनीज मांझे से एक युवती गंभीर रूप से घायल हुई, जिसके बाद शहर के जिम्मेदार विभाग हरकत में आए। नगर निगम और पर्यावरण संरक्षण मंडल ने सोमवार को कई दुकानों पर छापा मारते हुए चाइनीज मांझा जब्त किया और जुर्माना भी लगाया। मामले के बाद प्रशासन ने कड़ी निगरानी का दावा किया है, वहीं इस हादसे ने त्योहार से पहले सुरक्षा और नियमन पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
त्योहार से पहले अचानक सक्रिय हुआ प्रशासन
रायपुर में पतंगबाजी का बाजार इन दिनों तेजी पर है। संक्रांति से दो दिन पहले तक दर्जनों दुकानों में पतंग और चाइनीज मांझे की बिक्री हो रही थी। हालांकि प्रशासन द्वारा पहले से निगरानी या रोकथाम के प्रयास सीमित रहे। इसी बीच युवती के घायल होने की घटना सामने आई तो पूरे सिस्टम की ओर से त्वरित कार्रवाई शुरू हुई। जोन-1 और जोन-5 की निगम टीमों ने पर्यावरण संरक्षण मंडल के साथ संयुक्त निरीक्षण में कई दुकानों में चाइनीज मांझा पाया। दो दुकानों पर 10,000 रुपये का जुर्माना लगाया गया और अवैध स्टॉलों को हटाने की कार्रवाई की गई।
घटना ने बढ़ाई चिंता — नियमों की अनदेखी पर सवाल
चाइनीज मांझा पिछले कुछ वर्षों से पूरे देश में विवादों के केंद्र में रहा है। तेज, धातुयुक्त और रसायन मिश्रित होने के कारण यह न सिर्फ पक्षियों के लिए बल्कि लोगों की जान के लिए भी खतरा बन चुका है। कई राज्यों में इस पर प्रतिबंध है, लेकिन बाजार की मांग, सस्ती उपलब्धता और त्योहार की प्रतिस्पर्धा इसे फिर सक्रिय बना देती है। रायपुर में युवती का घायल होना इसी लापरवाही का एक और उदाहरण है।
नेता प्रतिपक्ष पहुंचे पीड़ित के घर — मदद का भरोसा
घायल युवती नेहा यादव से मिलने निगम में नेता प्रतिपक्ष आकाश तिवारी पहुंचे। उन्होंने परिवार से घटना की जानकारी लेने के साथ जरूरत पड़ने पर सहायता का आश्वासन दिया। नेहा ने बताया कि वह मंदिर जा रही थी कि तभी मांझा उसके चेहरे पर आया और खुद को बचाने के प्रयास में होंठ व उंगलियां कट गईं। यह बयान साफ दिखाता है कि ऐसे हादसे कितने अप्रत्याशित और गंभीर होते हैं।
CM के निर्देश: निगरानी तंत्र को मजबूत करने की तैयारी
मुख्यमंत्री के आदेश के बाद अधिकारियों ने दावा किया है कि अब निगरानी तंत्र और सख्त किया जाएगा। सवाल ये है कि यह सक्रियता त्योहार के तीन दिन पहले क्यों आई? अगर माहभर पहले ही निगरानी शुरू हो जाती तो शहर में सप्लाई और बिक्री पर नियंत्रण आसान होता। दुकानदारों का कहना है कि सप्लाई पहले ही आ चुकी थी और रोक पहले लगती तो नुकसान से बचा जा सकता था।
सुरक्षा बनाम मनोरंजन — समाज को भी लेना होगा फैसला
पतंगबाजी एक उत्साह और आनंद का खेल है। विशेषकर संक्रांति पर यह बच्चों, युवाओं और परिवारों के लिए एक उत्सव जैसा माहौल देता है। लेकिन चाइनीज मांझा ने इस आनंद को जोखिम में बदल दिया है। जानकारों का मानना है कि त्योहार सुरक्षित रहे इसके लिए नियम, प्रवर्तन और जागरूकता — तीनों की जरूरत है। माता-पिता और स्कूलों को भी बच्चों को सुरक्षित विकल्प अपनाने की सीख देनी होगी।
जनता के नाम अपील — ‘पतंग दूसरी मिल जाएगी, जिंदगी नहीं!’
स्थानीय संगठनों एवं नागरिक समूहों ने कहा है कि चाइनीज मांझा सिर्फ प्रतिस्पर्धा जीतने का उपकरण नहीं बल्कि गंभीर खतरा है। अपील जारी की गई है कि न इसे खरीदें, न बेचने दें और न उपयोग करने दें। नागरिकों ने कहा — “पतंग कटेगी तो नई मिल जाएगी, लेकिन सांसों की डोर कट गई तो कुछ नहीं बचता।”
अंतिम प्रभाव: प्रतिबंध सिर्फ कागज पर नहीं, सड़कों पर लागू होना चाहिए
यह मामला सिर्फ एक हादसा नहीं बल्कि पूरे सिस्टम के लिए चेतावनी है। अगर कानून और व्यवस्था त्योहारों से पहले सक्रिय हो जाए, तो हादसे टाले जा सकते हैं। प्रशासन, दुकानदार, नागरिक और राजनीतिक नेतृत्व — सभी की जिम्मेदारी है कि त्योहारों में मनोरंजन और सुरक्षा का संतुलन कायम रहे। आने वाले दिनों में निगरानी कितनी सख्त रहती है, यह शहर की सुरक्षा को तय करेगा।
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