Raipur News: छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में सरकारी जमीनों पर अवैध कब्जों के खिलाफ एक बड़ी कार्रवाई करते हुए छत्तीसगढ़ गृह निर्माण एवं अधोसंरचना विकास मंडल ने करोड़ों रुपये मूल्य की भूमि को अतिक्रमणमुक्त कराया है। सेजबहार फेस-1 कॉलोनी में एक निजी बिल्डर द्वारा कथित तौर पर बिना अनुमति सड़क निर्माण कर सरकारी जमीन पर कब्जा करने की कोशिश की जा रही थी, जिसे प्रशासनिक टीम ने बुलडोजर कार्रवाई के जरिए ध्वस्त कर दिया। इस कार्रवाई के बाद स्पष्ट संकेत दिया गया है कि सरकारी संपत्तियों पर अवैध कब्जा करने वालों के खिलाफ सख्त कदम उठाए जाएंगे।
सेजबहार में बड़ी कार्रवाई, अवैध निर्माण हटाया गया
जानकारी के अनुसार रायपुर के सेजबहार फेस-1 क्षेत्र में गृह निर्माण मंडल की भूमि पर एक निजी बिल्डर द्वारा सड़क निर्माण किया जा रहा था। मंडल को जब इस संबंध में जानकारी मिली तो राजस्व अभिलेखों और सीमांकन के आधार पर जांच कराई गई। जांच में संबंधित भूमि को गृह निर्माण मंडल की संपत्ति पाया गया, जिसके बाद अधिकारियों ने मौके पर पहुंचकर अवैध निर्माण को हटाने की कार्रवाई शुरू की।
कार्रवाई के दौरान जेसीबी और अन्य मशीनों की मदद से अवैध सड़क निर्माण को पूरी तरह ध्वस्त कर दिया गया। अधिकारियों ने बताया कि यह भूमि मंडल की महत्वपूर्ण परिसंपत्ति है और भविष्य की आवासीय योजनाओं के लिए सुरक्षित रखी गई है।
2006 की आवास योजना से जुड़ा है मामला
पूरा मामला वर्ष 2006 में शुरू हुई दीनदयाल आवास योजना से जुड़ा हुआ है। उस समय कलेक्टर रायपुर के आदेश पर ग्राम सेजबहार और ग्राम दतरेंगा की कुल 21.538 हेक्टेयर भूमि छत्तीसगढ़ गृह निर्माण मंडल को आवंटित की गई थी।
इस जमीन पर निम्न आय वर्ग (LIG) के परिवारों के लिए बड़े पैमाने पर आवास निर्माण की योजना बनाई गई थी। परियोजना के तहत कुल 1435 मकान बनाए जाने थे ताकि मध्यम और निम्न आय वर्ग के लोगों को किफायती आवास उपलब्ध कराया जा सके।
बाद में परियोजना के अंतर्गत 1366 मकानों का निर्माण पूरा कर लिया गया, लेकिन भूमि विवाद और अन्य तकनीकी कारणों के चलते 79 मकानों का निर्माण लंबित रह गया। यही विवादित क्षेत्र बाद में अतिक्रमण की कोशिश का केंद्र बन गया।
सीमांकन में सामने आया अवैध कब्जे का मामला
हाल ही में गृह निर्माण मंडल ने अपनी लगभग 18 हेक्टेयर भूमि का दोबारा सीमांकन कराया। राजस्व रिकॉर्ड और भौतिक सत्यापन के दौरान अधिकारियों को पता चला कि एक निजी बिल्डर द्वारा विवादित हिस्से पर सड़क बनाकर कब्जा स्थापित करने की कोशिश की जा रही है।
सीमांकन रिपोर्ट सामने आने के बाद मंडल ने तत्काल कार्रवाई का निर्णय लिया। अधिकारियों की टीम ने मौके पर पहुंचकर स्थिति का निरीक्षण किया और अवैध निर्माण को हटाने की प्रक्रिया शुरू कर दी।
अधिकारियों की मौजूदगी में हुई कार्रवाई
कार्रवाई का नेतृत्व कार्यपालन अभियंता नितेश कश्यप और संपदा अधिकारी अमृत लाल बरमन ने किया। प्रशासनिक टीम ने राजस्व अभिलेखों के आधार पर भूमि की स्थिति स्पष्ट की और अवैध निर्माण को हटाने के निर्देश दिए।
अधिकारियों के अनुसार सरकारी भूमि पर किसी भी प्रकार का अनधिकृत निर्माण स्वीकार नहीं किया जाएगा। भविष्य में भी ऐसे मामलों की निगरानी जारी रहेगी ताकि सार्वजनिक संपत्तियों को सुरक्षित रखा जा सके।
नई आवासीय परियोजना की तैयारी
गृह निर्माण मंडल के अधिकारियों ने बताया कि अतिक्रमणमुक्त कराई गई भूमि का उपयोग भविष्य में नई आवासीय परियोजना विकसित करने के लिए किया जाएगा। मंडल इस क्षेत्र में व्यवस्थित विकास की योजना तैयार कर रहा है।
नई परियोजना के माध्यम से मध्यम और निम्न आय वर्ग के लोगों को आधुनिक सुविधाओं से युक्त आवास उपलब्ध कराने की तैयारी की जा रही है। इससे न केवल आवासीय सुविधाएं बढ़ेंगी बल्कि क्षेत्र का नियोजित विकास भी सुनिश्चित होगा।
महत्वपूर्ण तथ्य एक नजर में
- कुल आवंटित भूमि: 21.538 हेक्टेयर (लगभग 53.19 एकड़)
- स्थान: ग्राम सेजबहार एवं ग्राम दतरेंगा, रायपुर
- योजना: दीनदयाल आवास योजना
- प्रस्तावित मकान: 1435 एलआईजी आवास
- निर्मित मकान: 1366
- लंबित मकान: 79
- कार्रवाई: अवैध सड़क निर्माण ध्वस्त
- भविष्य की योजना: नई आवासीय परियोजना का विकास
सरकारी संपत्तियों की सुरक्षा पर जोर
विशेषज्ञों का मानना है कि शहरी क्षेत्रों में सरकारी जमीनों की कीमत लगातार बढ़ रही है, जिसके चलते अतिक्रमण और अवैध कब्जे की घटनाएं भी बढ़ रही हैं। ऐसे में समय पर सीमांकन और प्रशासनिक कार्रवाई बेहद जरूरी हो जाती है।
रायपुर में हुई यह कार्रवाई राज्य के अन्य क्षेत्रों के लिए भी एक संदेश मानी जा रही है कि सार्वजनिक संपत्तियों पर अवैध कब्जा करने की कोशिश करने वालों के खिलाफ प्रशासन सख्त रुख अपनाएगा।
स्थानीय लोगों को मिल सकता है लाभ
यदि प्रस्तावित आवासीय परियोजना पर जल्द काम शुरू होता है तो क्षेत्र के नागरिकों को बेहतर आवासीय सुविधाएं मिल सकती हैं। साथ ही लंबे समय से खाली या विवादित पड़ी जमीन का उपयोग विकास कार्यों के लिए किया जा सकेगा।
गृह निर्माण मंडल का कहना है कि भूमि की सुरक्षा के लिए अतिरिक्त उपाय किए जाएंगे और पूरी परियोजना को नियमानुसार आगे बढ़ाया जाएगा। आने वाले समय में यह क्षेत्र रायपुर के महत्वपूर्ण आवासीय विकास केंद्रों में शामिल हो सकता है।
निष्कर्ष
सेजबहार फेस-1 में की गई यह कार्रवाई केवल एक अतिक्रमण हटाने की प्रक्रिया नहीं है, बल्कि सरकारी संपत्तियों की सुरक्षा और नियोजित शहरी विकास की दिशा में उठाया गया महत्वपूर्ण कदम है। करोड़ों रुपये मूल्य की भूमि को मुक्त कराने के बाद अब नई आवासीय परियोजना का रास्ता साफ हो गया है। यदि योजना तय समय पर आगे बढ़ती है तो हजारों परिवारों को इसका लाभ मिल सकता है और रायपुर के शहरी विकास को नई गति मिलेगी। छत्तीसगढ़ की हर अपडेट के लिए हमारे WhatsApp चैनल को फॉलो करें- https://whatsapp.com/channel/0029VbBj50DATRSgaSxCmo2v




