Raipur Crime News: छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर से ठगी का एक ऐसा सनसनीखेज मामला सामने आया है, जिसने हर किसी को हैरान कर दिया है। खूबसूरती और भरोसे का जाल बिछाकर लोगों को फंसाने वाली एक शातिर युवती को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। यह युवती अपने गैंग के साथ मिलकर फर्जी MBBS डिग्री और सरकारी नौकरी दिलाने के नाम पर करोड़ों रुपए की ठगी कर रही थी।
इस पूरे मामले में अब तक कुल 2 करोड़ 34 लाख रुपए की धोखाधड़ी सामने आई है। पुलिस पहले ही इस गिरोह के 4 सदस्यों को गिरफ्तार कर चुकी थी, जबकि मुख्य आरोपी युवती लंबे समय से फरार चल रही थी। अब उसकी गिरफ्तारी के साथ ही इस हाई-प्रोफाइल ठगी का बड़ा खुलासा हुआ है।
कैसे रचा गया ‘हुस्न का जाल’? भरोसा जीतकर की करोड़ों की ठगी
मामले की शुरुआत 17 फरवरी 2026 को हुई, जब पीड़ित संजय निराला ने सिविल लाइन थाने में शिकायत दर्ज कराई। उन्होंने बताया कि कुछ लोगों ने उन्हें और उनके रिश्तेदारों को पोस्ट ऑफिस में नौकरी दिलाने और मेडिकल डिग्री बनवाने का झांसा दिया।
गिरोह ने पहले भरोसा जीतने के लिए मीठी बातों और आकर्षक व्यक्तित्व का सहारा लिया। खासकर युवती का इस्तेमाल लोगों को प्रभावित करने और विश्वास में लेने के लिए किया जाता था। इसके बाद उनसे मोटी रकम वसूली जाती थी।
जब लंबे समय तक न तो नौकरी लगी और न ही कोई वैध दस्तावेज मिला, तब पीड़ितों को ठगी का एहसास हुआ और उन्होंने पुलिस में शिकायत दर्ज करवाई।
पुलिस की कार्रवाई—पहले 4 आरोपी पकड़े, फिर दिल्ली से मास्टरमाइंड गिरफ्तार
शिकायत मिलते ही रायपुर पुलिस ने तत्काल मामला दर्ज कर जांच शुरू की। इस दौरान पुलिस ने गिरोह के चार आरोपियों—भुनेश्वर बंजारे, नरेश मनहर, हीरा दिवाकर और राकेश रात्रे—को गिरफ्तार कर लिया।
पूछताछ के दौरान सामने आया कि इस पूरे नेटवर्क की मास्टरमाइंड एक युवती है, जो फरार हो गई थी। पुलिस ने लगातार तकनीकी साक्ष्यों और लिंक के आधार पर उसकी तलाश जारी रखी।
आखिरकार पुलिस को सूचना मिली कि आरोपी युवती दिल्ली में छिपी हुई है। इसके बाद टीम को दिल्ली भेजा गया, जहां से उसे गिरफ्तार कर रायपुर लाया गया।
पूछताछ में बड़ा खुलासा—फर्जी MBBS और BAMS डिग्री का रैकेट
गिरफ्तारी के बाद पूछताछ में युवती ने कई चौंकाने वाले खुलासे किए। उसने स्वीकार किया कि वह अपने एक साथी के साथ मिलकर फर्जी मेडिकल डिग्रियां तैयार करवाती थी।
इसमें DY Patil Vidyapeeth के नाम का इस्तेमाल कर नकली MBBS और BAMS सर्टिफिकेट बनाए जाते थे। इन फर्जी दस्तावेजों के जरिए लोगों को नौकरी और एडमिशन का झांसा दिया जाता था।
पुलिस ने आरोपी के पास से तीन मोबाइल फोन भी जब्त किए हैं, जिनमें कई अहम डिजिटल सबूत मिले हैं। अब इन डिवाइसेस की जांच के जरिए पूरे नेटवर्क को खंगाला जा रहा है।
कानूनी धाराएं और आगे की कार्रवाई
पुलिस ने इस मामले में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की कई गंभीर धाराओं के तहत केस दर्ज किया है। इनमें धोखाधड़ी, साजिश और जालसाजी से जुड़ी धाराएं शामिल हैं।
जांच अधिकारी के मुताबिक, यह मामला सिर्फ रायपुर तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका नेटवर्क अन्य राज्यों तक भी फैला हो सकता है। पुलिस अब इस एंगल पर भी जांच कर रही है कि इस गिरोह ने और किन-किन लोगों को निशाना बनाया है।
युवाओं को बनाया निशाना—सरकारी नौकरी का लालच बना हथियार
इस पूरे मामले में सबसे चिंताजनक बात यह है कि गिरोह ने बेरोजगार युवाओं को अपना मुख्य टारगेट बनाया। सरकारी नौकरी का सपना दिखाकर उनसे लाखों रुपए वसूले गए।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के मामलों में लोग जल्दबाजी और भरोसे के कारण फंस जाते हैं। इसलिए किसी भी नौकरी या डिग्री से जुड़े ऑफर को स्वीकार करने से पहले उसकी पूरी जांच करना बेहद जरूरी है।
पुलिस की अपील—सतर्क रहें, धोखाधड़ी से बचें
रायपुर पुलिस ने आम लोगों से अपील की है कि वे किसी भी अनजान व्यक्ति या संस्था के झांसे में न आएं। खासकर नौकरी और शिक्षा से जुड़े मामलों में सतर्कता बरतें।
अगर कोई व्यक्ति या संस्था पैसे लेकर नौकरी या डिग्री दिलाने का दावा करती है, तो तुरंत इसकी सूचना पुलिस को दें।
निष्कर्ष: सुंदर चेहरे के पीछे छिपा था बड़ा अपराध
रायपुर का यह मामला सिर्फ एक ठगी नहीं, बल्कि एक संगठित अपराध का उदाहरण है, जहां लोगों की भावनाओं और सपनों का फायदा उठाया गया।
युवती की गिरफ्तारी के बाद भले ही इस केस में बड़ा खुलासा हुआ हो, लेकिन यह घटना एक चेतावनी भी है कि आज के दौर में सतर्क रहना कितना जरूरी है।
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